
महाराष्ट्र में किसानों की कई मांगों को लेकर बुधवार को बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला. क्रांतिकारी शेतकरी संगठन के नेता रविकांत तुपकर ने किसानों के साथ मिलकर विधानभवन के बाहर जोरदार आंदोलन किया. उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि किसानों से किए गए कई वादे अब तक पूरे नहीं किए गए हैं. इसी वजह से बड़ी संख्या में किसान उनके साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और सरकार से जल्द फैसला लेने की मांग की.
रविकांत तुपकर ने कहा कि किसानों की सबसे बड़ी मांग कर्जमाफी, फसल बीमा का लाभ, फसलों का सही दाम (एमएसपी) और किसानों से जुड़े दूसरे लंबित मामलों का जल्द समाधान है. उनका कहना है कि कई किसान आर्थिक परेशानी से गुजर रहे हैं और उन्हें समय पर सरकारी मदद नहीं मिल रही है. इसलिए सरकार को बिना देरी किए इन सभी मांगों पर फैसला लेना चाहिए.
प्रदर्शन के दौरान रविकांत तुपकर बड़ी संख्या में किसानों के साथ सीधे विधानभवन की ओर बढ़े. उन्होंने विधानसभा परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की ताकि सरकार तक किसानों की आवाज सीधे पहुंच सके. हालांकि वहां पहले से ही बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे. सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के बावजूद तुपकर और उनके संगठन के कई कार्यकर्ता मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंच गए.
विरोध प्रदर्शन के दौरान रविकांत तुपकर और किसानों ने सातबारा (भूमि रिकॉर्ड) की प्रतियां विधानभवन की ओर फेंकीं. इसके साथ ही उन्होंने सोयाबीन और कपास भी वहां बिखेर दिए. किसानों का कहना था कि यह प्रदर्शन सरकार का ध्यान उनकी समस्याओं की ओर खींचने के लिए किया गया. अचानक हुए इस विरोध प्रदर्शन से विधानभवन परिसर में कुछ समय के लिए हलचल मच गई.
रविकांत तुपकर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने किसानों से कई वादे किए थे, लेकिन अब तक उन्हें पूरा नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि अगर किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा. उनका कहना है कि किसान लंबे समय से कर्ज, फसल नुकसान और कम दाम जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, इसलिए सरकार को उनकी परेशानियों को गंभीरता से लेना चाहिए.
प्रदर्शन में शामिल किसानों ने सरकार से मांग की कि कर्जमाफी, फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और अन्य लंबित मुद्दों पर जल्द फैसला लिया जाए. किसानों का कहना है कि समय पर मदद मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी और खेती करना आसान हो सकेगा. अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है कि वह किसानों की मांगों को लेकर क्या फैसला करती है.
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