
ऑस्ट्रेलिया ने भारत के 44 फ्यूमिगेशन सर्विस प्रोवाइडर्स के लाइसेंस को सस्पेंड कर दिया है. सर्विस देने वाली कंपनियों में 5 हरियाणा की और 3 पंजाब से हैं. फ्यूमिगेशन ऐसा प्रोसेस है जिसमें धुआं के जरिये कीटों के असर को कम किया जाता है या खत्म किया जाता है. गोदामों में अनाज को सुरक्षित रखने में इस प्रोसेस का बहुत महत्व है क्योंकि कीटों का हमला पूरे भंडार को बर्बाद कर सकता है. यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में निर्यात से जुड़ी 60 परसेंट फ्यूमिगेशन एजेंसियां इसकी जद में आ गई हैं.
ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले से भारत पर क्या असर होगा, आइए जान लेते हैं.
सबसे पहले तो यह जान लेना चाहिए कि ऑस्ट्रेलिया ने भारत के किसी अनाज या अन्य चीज के आयात पर किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाई है. इसमें बासमती चावल को लेकर चिंता जताई जा रही है. लेकिन भारत के निर्यातकों ने साफ कर दिया है कि बासमती के एक्सपोर्ट पर कोई बैन नहीं है. केवल फ्यूमिगेशन एजेंसी को सस्पेंड किया गया है.
एक बात और महत्वपूर्ण है. ऑस्ट्रेलिया, भारत के बासमती का बहुत बड़ा बाजार नहीं है बल्कि प्रीमियम मार्केट है. यानी महंगे चावल जरूर निर्यात होते हैं, लेकिन खेप बहुत अधिक नहीं जाती. इस लिहाज से इस फैसले के असर को बहुत बड़े पैमाने पर नहीं देखा जा रहा है.
फ्यूमिगेशन एजेंसियों पर रोक से बासमती चावल की क्वालिटी या उसकी सेफ्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा. ऑस्ट्रेलिया भेजे जाने वाले बासमती चावल की खेप या मात्रा पर भी इससे कोई असर नहीं होगा. भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 और मई 2026 के बीच ऑस्ट्रेलिया को 734.87 करोड़ रुपये मूल्य का 72,422 मीट्रिक टन बासमती चावल निर्यात किया गया. यह जून 2024 और मई 2025 के बीच इसी अवधि में निर्यात किए गए 607.23 करोड़ रुपये मूल्य के 60,177 मीट्रिक टन चावल से अधिक था.
ऑस्ट्रेलिया की एजेंसियों को पता चला कि बासमती की कुछ खेप फ्यूमिगेशन की तारीख चस्पा किए बिना ही कागजी तौर पर फाइनल कर दी गई थी. इस मामले को लेकर ऑस्ट्रेलिया सरकार ने सख्ती दिखाते हुए फ्यूमिगेशन एजेंसियों पर कार्रवाई की और 44 को सस्पेंड कर दिया.
फ्यूमिगेशन एजेंसियों को सस्पेंड करने से बासमती की खेप महंगी हो जाएगी जो ऑस्ट्रेलिया के बाजारों में भेजी जा रही है. इस तरह भारत पर कोई सीधा असर नहीं होगा बल्कि ऑस्ट्रेलिया में बासमती चावल महंगा हो सकता है. हालांकि जो खेप पहले निकल चुकी है, उसके दाम पर असर नहीं होगा क्योंकि उसका कोट पहले ही हो जाता है.
इस फैसले का खामियाजा भारत के एक्सपोर्टरों को अधिक भुगतना पड़ सकता है क्योंकि उन्हें भारत में चावल को फ्यूमिगेट कराने के अलावा ऑस्ट्रेलिया में माल उतरने पर भी उसी एजेंसी से फ्यूमिगेशन कराना होगा. इस तरह बासमती की खेप अगर एक बार फ्यूमिगेट हुई है और उस एजेंसी को ऑस्ट्रेलिया ने सस्पेंड कर दिया है तो एक्सपोर्टर को दोबारा भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों जगह नए सिरे से यह काम करना होगा.
इससे निर्यात महंगा होगा, खेप पहुंचने में देरी होगी और निर्धारित टाइम टेबल को पूरा करना भी मुश्किल होगा. इससे पूरे निर्यात की चेन पर बुरा असर होगा. इस फैसले से प्रति कंटेनर निर्यातकों का खर्च 700 से 1200 डॉलर तक पहुंच जाएगा जो पहले नहीं था.
बासमती के निर्यातक इस पूरे वाकये का ठीकरा सरकारी एजेंसी पर फोड़ रहे हैं. एक्सपोर्टर्स का कहना है कि फ्यूमिगेशन प्रोसेस का सर्टिफिकेट देना सरकारी एजेंसियों का काम है और एजेंसियों ने ऑस्ट्रेलिया के सभी नियमों का पालन करते हुए फ्यूमिगेशन का काम कराया. ऐसे में अगर कुछ गड़बड़ होती है तो इसका जिम्मा सरकार को लेना चाहिए.
एक्सपोर्टर्स के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले से बासमती के 100 से अधिक कंटेनरों पर सीधा असर होगा. इससे 200 करोड़ का बिजनेस प्रभावित होने का डर है क्योंकि या तो बासमती की खेप लौटा दी जाएगी या उसे दोबारा फ्यूमिगेट करना होगा. इन दोनों काम में नुकसान निर्यातकों का ही होना है.
ऑस्ट्रेलिया की कार्रवाई फिलहाल फ्यूमिगेशन एजेंसियों तक सीमित है और भारतीय बासमती चावल के आयात पर कोई रोक नहीं लगी है. लेकिन दस्तावेजी खामियों के कारण बढ़ी सख्ती से निर्यातकों की लागत और कारोबारी चुनौतियां बढ़ सकती हैं. आने वाले दिनों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तकनीकी स्तर पर समाधान निकलता है या नहीं, इस पर उद्योग की नजरें टिकी रहेंगी.