Wheat production: मौसम की चुनौतियों के बावजूद गेहूं की फसल बुलंद, कृषि मंत्रालय ने कहा—नहीं घटेगी पैदावार

Wheat production: मौसम की चुनौतियों के बावजूद गेहूं की फसल बुलंद, कृषि मंत्रालय ने कहा—नहीं घटेगी पैदावार

इस साल देश के गेहूं उत्पादन परिदृश्य पर मौसम की अनिश्चितताओं का गहरा साया रहा है, जिसे लेकर कृषि मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है. फसल के आखिरी पड़ाव पर, फरवरी के महीने में तापमान में अचानक हुई बेतहाशा बढ़ोतरी ने चिंताएं बढ़ा दी थीं, जिससे दाने भरने की कुदरती अवधि प्रभावित हुई है. इसके साथ ही, कई प्रमुख क्षेत्रों में पकने के समय हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने स्थानीय स्तर पर अनाज की गुणवत्ता और पैदावार को काफी नुकसान पहुंचाया है. सरकार का कहना है कि नई किस्मों और किसानों की सूझबूझ ने बड़े नुकसान को टाल दिया है. कुल मिलाकर, देश का अन्न भंडार सुरक्षित है.

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जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Apr 28, 2026,
  • Updated Apr 28, 2026, 6:01 PM IST

आजकल चारों तरफ देश में गेहूं की पैदावार को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं, लेकिन कृषि मंत्रालय ने तस्वीर साफ कर दी है. सरकार का कहना है कि मौसम की तमाम चुनौतियों के बाद भी गेहूं की फसल पर कोई आंच नहीं आएगी और पैदावार में कमी नहीं होगी. अगर हम जमीनी हकीकत पर नजर डालें, तो इस साल  2025-26 का मौसम भले ही उतार-चढ़ाव भरा रहा, पर फसल की सेहत अब भी काफी 'मजबूत' बनी हुई है.

इस बार कुदरत ने किसानों का कड़ा इम्तिहान जरूर लिया, लेकिन हमारे मेहनतकश किसानों ने अपनी अकलमंदी और तजुर्बे से बाजी मार ली. लगभग 33.4 करोड़ हेक्टेयर के विशाल रकबे में गेहूं की बुवाई की गई थी. इस सीजन की सबसे राहत वाली बात यह रही कि फसल को किसी भी तरह के कीड़ों या गंभीर बीमारियों ने छूआ तक नहीं. किसानों ने वक्त की नजाकत को भांपते हुए बुवाई का काम जल्दी शुरू कर दिया था, जिसकी बदौलत पिछले साल के मुकाबले इस बार गेहूं के इलाके में अच्छी-खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि, आखिरी वक्त पर मौसम ने अपनी करवट से थोड़ी चिंता जरूर बढ़ाई, लेकिन कुल मिलाकर गेहूं की खेती का नतीजा शानदार रहने वाला है.

कुदरत की बेरुखी पर भारी किसानों की मेहनत

जब फसल पकने और कटाई का आखिरी दौर चल रहा था, तब फरवरी के महीने में अचानक पारा चढ़ गया. इस गैर-मामूली गर्मी की वजह से गेहूं के दाने भरने का जो समय होता है, वह थोड़ा घट गया, जिससे कुछ इलाकों में पैदावार पर असर पड़ा. इतना ही नहीं, कुछ जगहों पर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने भी दस्तक दी, जिससे अनाज की चमक और क्वालिटी को लोकल लेवल पर थोड़ा नुकसान पहुंचा है. मगर सरकार और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि हालात काबू से बाहर नहीं हैं.

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि इस साल फसल में किसी बीमारी का असर नहीं रहा और खरपतवार भी बहुत कम थे. जल्दी बुवाई करने का फैसला मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ, क्योंकि जब तपिश बढ़ी, तब तक दाने काफी हद तक पक चुके थे. इस तरह किसानों की सूझबूझ ने मौसम के कहर को काफी हद तक कम कर दिया.

वक्त पर बुवाई और नए बीजों ने किया कमाल

इस साल गेहूं के उत्पादन को लेकर जो 'उम्मीद की किरण' नजर आ रही है, उसके पीछे कुछ ठोस वजहें हैं. पहली तो यह कि इस साल 0.6 मिलियन हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन पर गेहूं बोया गया, जो पिछले साल की कमी को पूरा करने में मददगार साबित होगा. दूसरी और सबसे अहम बात यह है कि हमारे देश में अब 'किस्म प्रतिस्थापन दर' काफी तेजी से बढ़ी है. इसका मतलब यह है कि किसानों ने अब पुरानी और कमजोर बीजों को छोड़कर ऐसी आधुनिक और 'क्लाइमेट-स्मार्ट' किस्मों को अपना लिया है, जो ज्यादा गर्मी झेल सकती हैं और बीमारियों से लड़ने की ताकत रखती हैं.

इन नई किस्मों ने एक ढाल की तरह काम किया है, जिससे गर्मी और जैविक दबावों के बावजूद पैदावार में स्थिरता बनी हुई है. इसी वजह से यह उम्मीद जताई जा रही है कि 2025-26 का सीजन पिछले साल यानी 2024-25 के मुकाबले काफी शानदार रहेगा.

मंडियों की रौनक और उत्साहजनक आंकड़े

सरकार का कहना है कि अगर हम मंडियों में गेहूं की आवक और सरकारी खरीद की बात करें, तो आंकड़े काफी तसल्लीबख्श हैं. हरियाणा की मंडियों में तो इस बार जबरदस्त गहमागहमी है. वहां गेहूं की आवक ने सरकार के 75 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को भी पीछे छोड़ दिया है. अब तक 56.13 लाख मीट्रिक टन की खरीद पूरी हो चुकी है, जो पिछले साल के इसी दौर के मुकाबले करीब 9 लाख मीट्रिक टन ज्यादा है.

उधर मध्य प्रदेश में भी कहानी कुछ ऐसी ही है. शुरुआत में वहां खरीद का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन रखा गया था, लेकिन पैदावार की बेहतरीन उम्मीदों को देखते हुए राज्य सरकार की गुजारिश पर इसे बढ़ाकर सीधा 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है. ये आंकड़े इस बात को साबित करते हैं कि गेहूं की पैदावार को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि देश के अन्न भंडार भरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

महाराष्ट्र में गेहूं की बेहतर पैदावार

महाराष्ट्र जैसे राज्यों से भी गेहूं के उत्पादन को लेकर बहुत ही सकारात्मक खबरें आ रही हैं. अनुमान है कि इस साल महाराष्ट्र में गेहूं की पैदावार करीब 22.90 लाख टन रहेगी, जो राज्य में पिछले कुछ वर्षों से लगातार हो रही तरक्की का सबूत है. अप्रैल 2026 के आखिर तक विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों से मंडियों में गेहूं की आवक का सिलसिला थमा नहीं है. इन तमाम बातों का नतीजा यह है कि भले ही कुछ इलाकों में मौसम की बेरुखी से स्थानीय स्तर पर नुकसान हुआ हो, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं की स्थिति बहुत ही मजबूत और 'सुदृढ़' है. बेहतर बीज, आधुनिक खेती के तरीके और रकबे में बढ़ोतरी ने मिलकर एक ऐसा सुरक्षा चक्र बना दिया है, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा पूरी तरह सही है.

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