
भारत से चीन भेजे गए गैर-बासमती चावल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. चीन की कार्रवाई से कारोबार पर पड़ रहे बुरे असर को लेकर छत्तीसगढ़ के राइस एक्सपोर्टर्स ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. छत्तीसगढ़ की राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TREACG) ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है. संगठन ने कहा कि चीन द्वारा तीन भारतीय कंपनियों को अस्थायी रूप से सस्पेंड करना और चावल की खेप को रोकना गलत आरोपों पर आधारित है. इससे भारतीय निर्यातकों के हितों को नुकसान हो रहा है.
निर्यातकों ने कहा कि चीन ने भारतीय चावल में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) के अंश होने का आरोप लगाया है. हालांकि, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने साफ किया है कि भारत में किसी भी प्रकार के जीएम चावल की व्यावसायिक खेती को मंजूरी नहीं दी गई है. ICAR ने यह भी कहा कि उसके किसी भी रिसर्च प्रोग्राम में GMO चावल पर काम नहीं हो रहा और भारत से निर्यात होने वाला पूरा चावल नॉन-GMO है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, TREACG ने पत्र में कहा कि चीनी पोर्ट्स पर कई भारतीय खेपों को रोका या वापस कर दिया गया है. इससे निर्यातकों को भारी डेमरेज चार्ज, वापसी भाड़ा और अनुबंध से जुड़े जोखिम का सामना करना पड़ रहा है. कई मामलों में माल को “बैक टू टाउन” या दूसरे बाजारों में भेजना पड़ा, जिससे व्यापार में अनिश्चितता बढ़ गई है.
निर्यातकों ने बताया कि एपीडा ने 16 अप्रैल को तीन भारतीय कंपनियों को सूचना दी थी कि चीन के कस्टम विभाग जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स ऑफ चाइना ने उन्हें अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है. इससे पूरे सेक्टर में चिंता का माहौल है.
राइस एक्सपोर्टर्स ने सरकार से कई ठोस कदम उठाने की मांग की है. इसमें चीन के कस्टम विभाग के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत, स्पष्ट ट्रेड एडवाइजरी जारी करना, लोड पोर्ट से जारी नॉन-GMO सर्टिफिकेशन को अंतिम मान्यता दिलाना और प्रभावित निर्यातकों को राहत देना शामिल है.
निर्यातकों ने कहा है कि भारत दुनिया में नॉन-GMO चावल का भरोसेमंद सप्लायर है, लेकिन इस तरह की घटनाओं से अंतरराष्ट्रीय बाजार में देश की साख पर असर पड़ सकता है. इसलिए उन्होंने सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की है, ताकि व्यापार सामान्य हो सके और निर्यातकों को हो रहे नुकसान को रोका जा सके.