Edible Oil: पश्‍चि‍म एशिया और ब्लैक सी तनाव से भारत के खाद्य तेल बाजार में बढ़ी चिंता, सप्‍लाई और कीमतों पर असर

Edible Oil: पश्‍चि‍म एशिया और ब्लैक सी तनाव से भारत के खाद्य तेल बाजार में बढ़ी चिंता, सप्‍लाई और कीमतों पर असर

वेस्ट एशिया में संघर्ष और ब्लैक सी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के खाद्य तेल बाजार पर भी दिखने लगा है. सूरजमुखी तेल की सप्लाई और पाम ऑयल की ढुलाई लागत को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है. उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने आने वाले महीनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका जताई है.

Edible Oil Supply and Price IssueEdible Oil Supply and Price Issue
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 13, 2026,
  • Updated Mar 13, 2026, 2:23 PM IST

वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष और ब्लैक सी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के खाद्य तेल बाजार पर दिखने लगा है. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) ने कहा है कि इन हालातों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और भारत के लिए खाद्य तेल की सप्लाई को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं. खासतौर पर सूरजमुखी तेल की शिपमेंट और पाम ऑयल की ढुलाई लागत को लेकर बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है.

सूरजमुखी तेल की शिपमेंट पर खतरा

बिजनेसलाइन की रिपेार्ट के मुताबिक, SEA के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बीवी मेहता ने कहा कि भारत लंबे समय से रूस और यूक्रेन से सूरजमुखी तेल आयात पर निर्भर रहा है. लेकिन मौजूदा हालात में रेड सी और स्वेज नहर से जुड़े जोखिम बढ़ने से शिपमेंट में देरी की आशंका है. इससे लॉजिस्टिक लागत बढ़ सकती है और घरेलू बाजार में उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है. इन परिस्थितियों के कारण पिछले कुछ समय में सूरजमुखी तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बढ़ोतरी देखने को मिली है.

लंबी अवधि के समझौतों की तलाश

रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बने जोखिम को देखते हुए भारत अब वैकल्पिक स्रोतों पर भी ध्यान दे रहा है. इसके तहत अर्जेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे और उरुग्वे के साथ सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के लिए दीर्घकालिक समझौतों की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं. इससे भविष्य में सप्लाई के जोखिम को कम करने की रणनीति तैयार की जा रही है.

पाम ऑयल पर बायोफ्यूल सेक्टर की बढ़ती मांग

वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पाम ऑयल बाजार पर भी पड़ रहा है. वेस्ट एशिया में युद्ध के कारण ऊर्जा बाजार में आई तेजी के बाद बायोफ्यूल कंपनियां पाम ऑयल आधारित बायोडीजल की ओर ज्यादा रुचि दिखा रही हैं. इससे दक्षिण-पूर्व एशिया में पाम ऑयल की मांग बढ़ने और कीमतों को सहारा मिलने की संभावना जताई जा रही है.

कीमतों में बदलाव और रुपये की कमजोरी

फरवरी 2026 में सूरजमुखी तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया. क्रूड सनफ्लावर ऑयल का CIF भाव करीब 1420 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया, जो एक साल पहले लगभग 1216 डॉलर प्रति टन था. वहीं पाम ऑयल और सोयाबीन तेल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रहीं. इसके अलावा पिछले एक साल में रुपये में करीब 4.2 प्रतिशत की गिरावट भी आयातकों और रिफाइनरों के लिए चिंता का कारण बन रही है.

खाद्य तेल आयात में बढ़ोतरी

SEA के आंकड़ों के अनुसार, ऑयल सीजन 2025-26 के पहले चार महीनों (नवंबर से फरवरी) के दौरान भारत का खाद्य तेल आयात बढ़ा है. इस अवधि में कुल आयात 52.18 लाख टन रहा. पाम ऑयल के आयात में खासा इजाफा देखा गया, जबकि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात में कुछ कमी दर्ज की गई है.

किन देशों से आ रहा है खाद्य तेल?

आयात के स्रोतों की बात करें तो पाम ऑयल के मामले में इंडोनेशिया और मलेशिया भारत के प्रमुख सप्लायर बने हुए हैं. वहीं, सोयाबीन तेल मुख्य रूप से अर्जेंटीना और ब्राजील से आ रहा है. सूरजमुखी तेल की सप्लाई में रूस अभी भी सबसे बड़ा निर्यातक है, जिसके बाद यूक्रेन और अर्जेंटीना का स्थान आता है.

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