US-Iran Conflict: युद्ध के असर से भारत के खाद्य तेल और उर्वरक आयात पर संकट! कृषि निर्यात पर भी पड़ेगा बुरा असर

US-Iran Conflict: युद्ध के असर से भारत के खाद्य तेल और उर्वरक आयात पर संकट! कृषि निर्यात पर भी पड़ेगा बुरा असर

अमेरिका-ईरान तनाव की आंच अब भारत के खाद्य तेल और उर्वरक कारोबार तक पहुंच सकती है. शिपिंग सरचार्ज और बढ़ते मालभाड़े से आयात महंगा होने की आशंका है, जबकि मध्य पूर्व और यूरोप को होने वाला कृषि निर्यात भी दबाव में आ सकता है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 03, 2026,
  • Updated Mar 03, 2026, 1:02 PM IST

अमेरिका-ईरान तनाव की बढ़ती आंच अब भारत के खाद्य तेल और उर्वरक कारोबार तक पहुंचती दिख रही है. उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात लंबे समय तक बिगड़े रहे तो खाद्य तेल आयात, खासकर सूरजमुखी तेल, और खरीफ सीजन से पहले जरूरी उर्वरक कच्चे माल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है. मध्य पूर्व से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर शिपिंग कंपनियों ने एहतियातन अतिरिक्त शुल्क लगाना शुरू कर दिया है.

फ्रांस की कंटेनर कंपनी CMA CGM ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले कार्गो पर प्रति कंटेनर 2,000 से 4,000 डॉलर तक का आपातकालीन कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज लागू किया है. इससे आयातकों की लागत सीधे बढ़ रही है और आगे बीमा प्रीमियम में इजाफा भी संभव माना जा रहा है.

खाद का कच्‍चा माल फंसने की आशंका

सॉल्युबल फर्टिलाइजर इंडस्ट्री एसोसिएशन के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में बंदरगाहों पर बढ़ती अनिश्चितता से कंटेनरों की कमी और जाम की स्थिति बन सकती है. भारत अपनी सल्फर जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर, यूएई और ओमान से मंगाता है, जो डीएपी और एसएसपी जैसे उर्वरकों के उत्पादन में अहम कच्चा माल है. जून से शुरू होने वाले खरीफ बुवाई सीजन से पहले यदि सप्लाई चेन प्रभावित हुई तो घरेलू बाजार में दबाव बढ़ सकता है.

लंबे रास्‍ते से आ सकती है खाद्य तेल की खेप

वहीं, खाद्य तेल के मोर्चे पर भी जोखिम बना हुआ है. भारत हर साल करीब 1.6 करोड़ टन खाद्य तेल आयात करता है, जिसमें लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी सूरजमुखी तेल की है. इसकी आपूर्ति मुख्य रूप से रूस, यूक्रेन और अर्जेंटीना से होती है. अगर जहाजों को लाल सागर मार्ग से हटकर लंबा रास्ता अपनाना पड़ा तो खेपों में देरी और भाड़े में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है. अभी तक सीधा असर नहीं दिखा है, लेकिन उद्योग जगत हालात पर नजर बनाए हुए है.

इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी चिंता बढ़ा रही है. ऊर्जा लागत, मालभाड़ा और बायोफ्यूल बाजार आपस में जुड़े होने के कारण तेल कीमतों में उछाल का असर वनस्पति तेल बाजार पर भी पड़ता है. इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) ने संकेत दिया है कि डॉलर-रुपया विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव निकट अवधि में अस्थिरता बनाए रख सकते हैं.

निर्यात पर भी असर पड़ने की आशंका

वहीं, निर्यात क्षेत्र भी अछूता नहीं है. भारत अपने ऑयलमील निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत मध्य पूर्व और 15 प्रतिशत यूरोप भेजता है. अगर समुद्री मार्ग बाधित होते हैं तो कृषि, बागवानी और फूल से बने उत्पादों की खेपों पर भी असर पड़ सकता है. (पीटीआई)

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