
अमेरिका और बांग्लादेश के बीच हुई ट्रेड डील को लेकर भारत के कपास कारोबारियों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है. ज्यादातर भारतीय स्टेकहोल्डर्स का कहना है कि इस समझौते के बावजूद ढाका को भारतीय कपास की आपूर्ति पहले की तरह जारी रहेगी. हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स को आशंका है कि नई व्यवस्था के चलते बांग्लादेश का रुख आंशिक रूप से अमेरिकी कपास की ओर हो सकता है. वहीं, भारत के पक्ष में सबसे मजबूत दलील उसकी भौगोलिक नजदीकी मानी जा रही है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के अध्यक्ष विनय एन कोटक ने कहा कि अमेरिका या अन्य दूरस्थ देशों से कपास बांग्लादेश पहुंचने में कम से कम 45 दिन लगते हैं, जबकि भारत से यही सप्लाई लगभग 8 दिन में पूरी हो जाती है. बांग्लादेश के स्पिनिंग मिल्स की वर्किंग कैपिटल सीमित होती है, ऐसे में तेज डिलीवरी उनके लिए अहम रहती है.
CAI अध्यक्ष ने कहा कि बांग्लादेश के रेडीमेड गारमेंट्स निर्यात का केवल करीब 25 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका जाता है, जबकि लगभग 50 प्रतिशत निर्यात यूरोपीय बाजारों में होता है. यूरोप के लिए तैयार होने वाले कपड़ों में भारतीय कपास की क्वालिटी और स्पेसिफिकेशन की अच्छी मांग रहती है. यही वजह है कि बांग्लादेश के लिए भारत को पूरी तरह नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.
हालांकि, एक व्यावहारिक समस्या भी सामने रखी गई है. फिलहाल सड़क मार्ग से कपास निर्यात बंद है, जिसका असर सप्लाई चेन पर पड़ सकता है. कोटक ने कहा है कि अगर बांग्लादेश में चुनाव के बाद हालात सामान्य होते हैं और सड़क मार्ग फिर से खुलता है तो भारतीय निर्यातकों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी.
दूसरी ओर कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ललित कुमार गुप्ता इस ट्रेड डील को घरेलू कपास बाजार के लिए सकारात्मक मानते हैं. उन्होंने कहा कि अगर बांग्लादेश की कुल मांग बढ़ती है तो भारत से भी कुछ मात्रा में कपास का आयात स्वाभाविक रूप से बढ़ेगा. भारत की लॉजिस्टिक्स लागत अमेरिका या अन्य देशों की तुलना में कम है, जो एक बड़ा फायदा है.
बता दें कि सीसीआई ने हाल ही में घरेलू बिक्री कीमतों में संशोधन किया है और निर्यात के लिए न्यूनतम कीमत भी तय की है. गुप्ता ने कहा कि निर्यात कीमतें घरेलू बाजार के अनुरूप रखी गई हैं. इससे भारतीय कपास को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स ने इस डील पर चिंता जताई है. अतुल गणात्रा ने कहा कि अमेरिकी कपास पर 18 प्रतिशत टैरिफ छूट मिलने की स्थिति में बांग्लादेश भारतीय और ब्राजीलियाई कपास से दूरी बना सकता है. ब्राजील से कपास 68-69 सेंट प्रति पाउंड की दर पर मिल रही है, जो भारतीय कीमतों के मुकाबले काफी सस्ती पड़ती है.
गणात्रा ने कहा कि पड़ोसी देश में राजनीतिक अस्थिरता के कारण पहले ही भारतीय कपास निर्यात प्रभावित हुआ है. जहां 2025-26 सीजन के लिए 15 लाख गांठ निर्यात का अनुमान लगाया गया था, वहीं अब यह घटकर करीब 10 लाख गांठ रहने की संभावना है. सितंबर में समाप्त होने वाले इस सीजन में जनवरी अंत तक करीब 6 लाख गांठ का ही निर्यात हो सका है.