US-Bangladesh Trade Deal से भारत के कपास निर्यात पर पड़ेगा असर? जानें क्‍या बोले इंडस्‍ट्री एक्‍सपर्ट

US-Bangladesh Trade Deal से भारत के कपास निर्यात पर पड़ेगा असर? जानें क्‍या बोले इंडस्‍ट्री एक्‍सपर्ट

Cotton Export: बांग्लादेश के कपास आयात पर US ट्रेड डील का असर सीमित रहने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन टैरिफ छूट और कम कीमतों ने भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है. जानें इंडस्‍ट्री एक्‍सपर्ट्स का क्या कहना है...

Cotton Export BangladeshCotton Export Bangladesh
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 12, 2026,
  • Updated Feb 12, 2026, 9:30 AM IST

अमेरिका और बांग्लादेश के बीच हुई ट्रेड डील को लेकर भारत के कपास कारोबारियों और इंडस्‍ट्री एक्‍सपर्ट्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है. ज्‍यादातर भारतीय स्टेकहोल्डर्स का कहना है कि इस समझौते के बावजूद ढाका को भारतीय कपास की आपूर्ति पहले की तरह जारी रहेगी. हालांकि, कुछ एक्‍सपर्ट्स को आशंका है कि नई व्यवस्था के चलते बांग्लादेश का रुख आंशिक रूप से अमेरिकी कपास की ओर हो सकता है. वहीं, भारत के पक्ष में सबसे मजबूत दलील उसकी भौगोलिक नजदीकी मानी जा रही है.

‘भौगोलिक नजदीकी भारत की बड़ी ताकत’

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के अध्यक्ष विनय एन कोटक ने कहा कि अमेरिका या अन्य दूरस्थ देशों से कपास बांग्लादेश पहुंचने में कम से कम 45 दिन लगते हैं, जबकि भारत से यही सप्‍लाई लगभग 8 दिन में पूरी हो जाती है. बांग्लादेश के स्पिनिंग मिल्स की वर्किंग कैपिटल सीमित होती है, ऐसे में तेज डिलीवरी उनके लिए अहम रहती है.

यूरोप पर निर्भरता भी अहम कारण

CAI अध्‍यक्ष ने कहा कि  बांग्लादेश के रेडीमेड गारमेंट्स निर्यात का केवल करीब 25 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका जाता है, जबकि लगभग 50 प्रतिशत निर्यात यूरोपीय बाजारों में होता है. यूरोप के लिए तैयार होने वाले कपड़ों में भारतीय कपास की क्‍वालिटी और स्पेसिफिकेशन की अच्छी मांग रहती है. यही वजह है कि बांग्लादेश के लिए भारत को पूरी तरह नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.

सड़क मार्ग बंद होना बना अड़चन

हालांकि, एक व्यावहारिक समस्या भी सामने रखी गई है. फिलहाल सड़क मार्ग से कपास निर्यात बंद है, जिसका असर सप्लाई चेन पर पड़ सकता है. कोटक ने कहा है कि अगर बांग्लादेश में चुनाव के बाद हालात सामान्य होते हैं और सड़क मार्ग फिर से खुलता है तो भारतीय निर्यातकों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी.

घरेलू बाजार के लिए सकारात्मक संकेत: CCI 

दूसरी ओर कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ललित कुमार गुप्ता इस ट्रेड डील को घरेलू कपास बाजार के लिए सकारात्मक मानते हैं. उन्‍होंने कहा कि अगर बांग्लादेश की कुल मांग बढ़ती है तो भारत से भी कुछ मात्रा में कपास का आयात स्वाभाविक रूप से बढ़ेगा. भारत की लॉजिस्टिक्स लागत अमेरिका या अन्य देशों की तुलना में कम है, जो एक बड़ा फायदा है.

कीमतों में संशोधन और निर्यात नीति

बता दें कि सीसीआई ने हाल ही में घरेलू बिक्री कीमतों में संशोधन किया है और निर्यात के लिए न्यूनतम कीमत भी तय की है. गुप्ता ने कहा कि निर्यात कीमतें घरेलू बाजार के अनुरूप रखी गई हैं. इससे भारतीय कपास को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

सस्ते विकल्प से बढ़ी चुनौती

हालांकि, कुछ एक्‍सपर्ट्स ने इस डील पर चिंता जताई है. अतुल गणात्रा ने कहा कि अमेरिकी कपास पर 18 प्रतिशत टैरिफ छूट मिलने की स्थिति में बांग्लादेश भारतीय और ब्राजीलियाई कपास से दूरी बना सकता है. ब्राजील से कपास 68-69 सेंट प्रति पाउंड की दर पर मिल रही है, जो भारतीय कीमतों के मुकाबले काफी सस्ती पड़ती है.

निर्यात अनुमान में कटौती की आशंका

गणात्रा ने कहा कि पड़ोसी देश में राजनीतिक अस्थिरता के कारण पहले ही भारतीय कपास निर्यात प्रभावित हुआ है. जहां 2025-26 सीजन के लिए 15 लाख गांठ निर्यात का अनुमान लगाया गया था, वहीं अब यह घटकर करीब 10 लाख गांठ रहने की संभावना है. सितंबर में समाप्त होने वाले इस सीजन में जनवरी अंत तक करीब 6 लाख गांठ का ही निर्यात हो सका है.

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