राज्यपाल का बड़ा फैसला, डॉ. जी.पी. सिंह संभालेंगे ANDUAT की कमान, बने नए कुलपति

राज्यपाल का बड़ा फैसला, डॉ. जी.पी. सिंह संभालेंगे ANDUAT की कमान, बने नए कुलपति

उत्तर प्रदेश की गवर्नर आनंदीबेन पटेल ने डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को आचार्य नरेंद्र देव एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, अयोध्या का नया वाइस चांसलर अपॉइंट किया है. इस तीन साल की अपॉइंटमेंट से एग्रीकल्चरल एजुकेशन और रिसर्च को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है. डॉ. सिंह गेहूं सुधार और क्लाइमेट-रेज़िलिएंट एग्रीकल्चर के एक्सपर्ट हैं.

ANDUAT के नए कुलपति बने डॉ. सिंहANDUAT के नए कुलपति बने डॉ. सिंह
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 11, 2026,
  • Updated Feb 11, 2026, 4:36 PM IST

उत्तर प्रदेश में कृषि से राजभवन ने एक बड़ा निर्णय लिया है. प्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने ICAR-नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज (NBPGR), नई दिल्ली के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (ANDUAT), कुमारगंज, अयोध्या के नए कुलपति नियुक्त किए गए हैं. डॉ. सिंह को तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है. यह निर्णय विश्वविद्यालय अधिनियम, 1958 की धारा 11(1) के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य संस्थान में राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञता और प्रशासनिक कुशलता का संचार करना है.

डॉ. सिंह का पढ़ाई और करियर का सफर

17 मार्च, 1964 को वाराणसी में जन्मे डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का एकेडमिक सफ़र और करियर सच में प्रेरणा देने वाला रहा है. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सेंट्रल हिंदू स्कूल, वाराणसी से की, और फिर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से अंडरग्रेजुएट (B.Sc.) और पोस्टग्रेजुएट (M.Sc. Ag.) की डिग्री हासिल की. ​​उन्होंने 1992 में चंद्रशेखर आज़ाद यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी से अपनी PhD पूरी की. डॉ. सिंह का करियर साइंटिफिक रिसर्च के प्रति उनके डेडिकेशन का सबूत है; उन्होंने इंदौर, शिमला, करनाल और दिल्ली जैसे जाने-माने इंस्टीट्यूशन में अलग-अलग पदों पर काम किया. वाइस चांसलर बनने से पहले, उन्होंने ICAR-IIWBR, करनाल के डायरेक्टर और फिर NBPGR, नई दिल्ली के हेड के तौर पर इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च को दुनिया भर में पहचान दिलाई.

कई पुरस्कारों से सम्मानित

इंडियन एग्रीकल्चरल साइंस में डॉ. सिंह का रुतबा बहुत जाना-माना है, जैसा कि उन्हें मिले कई सम्मानों से पता चलता है. उन्हें भारत सरकार ने "विज्ञान श्री" (नेशनल साइंस अवॉर्ड 2025) से सम्मानित किया है. उन्हें दर्जनों अवॉर्ड भी मिले हैं, जिनमें मशहूर डॉ. रफी अहमद किदवई अवॉर्ड (2015), डॉ. ए.बी. जोशी मेमोरियल अवॉर्ड (2020), और BGRI जीन स्टीवर्डशिप अवॉर्ड शामिल हैं. वे इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA) और नेशनल एकेडमी ऑफ़ एग्रीकल्चरल साइंसेज (NAAS) सहित कई बड़ी साइंस एकेडमी के फेलो भी हैं. इंडियन जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग सोसाइटी के प्रेसिडेंट के तौर पर भी उनकी लीडरशिप स्किल्स दिखी हैं.

प्लांट जेनेटिक रिसोर्स मैनेजमेंट और खेती पर फोकस

डॉ. सिंह की रिसर्च एक्सपर्टीज़ मुख्य रूप से गेहूं में सुधार, प्लांट जेनेटिक रिसोर्स मैनेजमेंट और क्लाइमेट-रेज़िलिएंट खेती पर फोकस रही है. उन्होंने गेहूं की ऐसी वैरायटी डेवलप करने में लीड किया है जो गर्मी और सूखे जैसे बहुत ज़्यादा हालात झेल सकती हैं, और मार्कर-असिस्टेड ब्रीडिंग (MABB) में भी. उनकी रिसर्च ने न सिर्फ़ फसल की बायोडायवर्सिटी को बचाया है, बल्कि देश की फ़ूड सिक्योरिटी को भी मजबूत किया है. एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि उनकी गहरी टेक्निकल समझ अयोध्या की यूनिवर्सिटी में रिसर्च की क्वालिटी को ग्लोबल स्टैंडर्ड तक ले जाने में मदद करेगी.

डॉ. सिंह की नियुक्ति को अयोध्या और उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र के लिए एक "बदलाव लाने वाला मास्टरस्ट्रोक" माना जा रहा है. 

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