India-US Trade Deal: भारत के किसानों के लिए राहत, अमेरिका ने बदली ट्रेड फैक्‍टशीट, लिस्ट से हटी ये चीज

India-US Trade Deal: भारत के किसानों के लिए राहत, अमेरिका ने बदली ट्रेड फैक्‍टशीट, लिस्ट से हटी ये चीज

India-US Trade Deal में गुपचुप बदलाव ने दलहन सेक्टर को राहत दे दी है. टैरिफ कट लिस्ट से कुछ दालों को बाहर किए जाने के बाद किसानों की चिंता कम हुई है. आखिर फैक्टशीट में ऐसा क्या बदला गया, जिसने पल्सेज मार्केट का समीकरण बदल दिया, जानिए पूरी कहानी...

Pulses Import Removed from trade dealPulses Import Removed from trade deal
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 11, 2026,
  • Updated Feb 11, 2026, 10:51 AM IST

भारत-अमेरिका ट्रेड डील में अमेरिका की ओर से चुपचाप किया गया संशोधन भारतीय दलहन सेक्टर के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है. व्‍हाइट हाउस (White House) ने फैक्टशीट जारी करने के महज एक दिन बाद कुछ शब्दों और शर्तों में बदलाव कर दिए हैं, जिनका सीधा असर दाल बाजार पर पड़ सकता था. संशोधित दस्तावेज में ‘कुछ दालों’ को टैरिफ कट सूची से बाहर कर दिया गया है, जिससे घरेलू किसानों और व्यापारियों की चिंताएं काफी हद तक कम हो गई हैं.

डील के शुरुआती संस्करण में संकेत था कि भारत अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों की एक व्यापक रेंज पर शुल्क (टैरिफ) खत्‍म या कम करेगा. इसमें कुछ दालें भी शामिल थीं. अगर यह प्रावधान लागू रहता तो अमेरिकी दालें कम आयात शुल्क पर भारतीय बाजार में आ सकती थीं. इससे मंडियों में कीमतों पर दबाव बनने की आशंका रहती और घरेलू उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ सकता था. 

दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्‍ता है भारत

लेकिन, संशोधित फैक्टशीट में कृषि श्रेणी को सीमित करते हुए कुछ दालों को टैरिफ कट लिस्ट से हटा दिया गया है. मालूम हो कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्ता देश है और उत्पादन बढ़ाने के लिए पिछले कुछ वर्षों से आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. आयात में ढील से यह रणनीति कमजोर पड़ सकती थी. 

पुरानी लिस्‍ट में था 'कुछ दालों' का जिक्र

डील की शुरुआती फैक्टशीट में अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों की एक व्यापक सूची शामिल थी, जिन पर भारत द्वारा टैरिफ खत्म करने या कम करने की बात कही गई थी. इस सूची में सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स DDGS, लाल ज्वार, विभिन्न मेवे, ताजे और प्रोसेस्ड फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट जैसे उत्पाद शामिल थे.

नई लिस्‍ट में अब सिर्फ ये चीजें

अब संशोध‍ित सूची में सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन (DDGs), लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स, और दूसरे प्रोडक्ट्स का जिक्र है.

अब 500 अरब डॉलर की खरीद की बाध्‍यता खत्‍म

डील के प्रारंभिक मसौदे में 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पादों की खरीद को ‘प्रतिबद्धता’ के रूप में पेश किया गया था. बाद में इसे केवल ‘इरादा’ बताया गया. हालांकि, यह व्यापक व्यापारिक संतुलन से जुड़ा संशोधन है, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव कृषि आयात पर भी पड़ता है. बाध्यकारी खरीद की स्थिति में दालों सहित कई उत्पादों का आयात बढ़ सकता था, जिससे घरेलू बाजार अस्थिर होता.

दलहन व्यापार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिकी मसूर, मटर या अन्य पल्सेज पर शुल्क घटाया जाता तो घरेलू कीमतों में गिरावट संभव थी. सरकार पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य और बफर स्टॉक के जरिए बाजार को संतुलित रखने की कोशिश कर रही है. ऐसे में सस्ते आयात का दबाव नीति संतुलन को बिगाड़ सकता था.

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