यूपी के किसानों के लिए बड़ी खबर! बाढ़ से 25.59 लाख हेक्टेयर जमीन बचाने का दावा

यूपी के किसानों के लिए बड़ी खबर! बाढ़ से 25.59 लाख हेक्टेयर जमीन बचाने का दावा

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बाढ़ से बचाव के लिए 1,549 परियोजनाएं पूरी की हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इससे 25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन और 2.21 करोड़ लोगों को लाभ मिला है. इसके अलावा, 1,300 सिंचाई परियोजनाओं से 1.90 करोड़ से अधिक किसानों को फायदा पहुंचा है. जानें बाढ़ सुरक्षा और सिंचाई व्यवस्था से जुड़ी पूरी जानकारी.

यूपी में बाढ़ से बचाव की बड़ी तैयारीयूपी में बाढ़ से बचाव की बड़ी तैयारी
क‍िसान तक
  • Lucknow,
  • Oct 10, 2026,
  • Updated Oct 10, 2026, 5:10 PM IST

उत्तर प्रदेश में बाढ़ से किसानों की जमीन और लोगों के घरों को बचाने के लिए योगी सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं. सरकार के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक अब तक प्रदेश में करीब 1,549 बाढ़ सुरक्षा परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं. इन कार्यों से 25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन को बाढ़ से बचाने में मदद मिली है. वहीं, 2.21 करोड़ से अधिक लोगों को इन परियोजनाओं का लाभ मिला है. इससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों और किसानों को राहत पहुंचाने की कोशिश की गई है. इसके अलावा, सरकार ने सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भी कई परियोजनाएं पूरी की हैं, जिससे किसानों को खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है.

यूपी में बाढ़ से बचाव के लिए 1,549 परियोजनाएं पूरी

उत्तर प्रदेश में कई ऐसे इलाके हैं, जहां बारिश के मौसम में बाढ़ का खतरा बना रहता है. बाढ़ के कारण खेतों में खड़ी फसल खराब हो सकती है. इसके अलावा, उपजाऊ जमीन, घरों और गांवों की सड़कों को भी नुकसान पहुंच सकता है. इससे किसानों की कमाई और ग्रामीण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ता है.

इसी खतरे को कम करने के लिए योगी सरकार ने बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कामों को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया है. सरकार के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक अब तक करीब 1,549 बाढ़ सुरक्षा परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं. इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य बाढ़ के पानी से होने वाले नुकसान को कम करना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन को मिली सुरक्षा

बाढ़ आने पर किसानों की सबसे बड़ी चिंता उनकी फसल और खेतों को लेकर होती है. खेतों में पानी भरने से फसल खराब हो सकती है. कई बार जमीन की ऊपरी उपजाऊ परत को भी नुकसान पहुंचता है. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अनुसार, प्रदेश में पूरी की गई बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं से 25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन को सुरक्षित रखने में मदद मिली है. यह खेती-किसानी के लिहाज से अहम है, क्योंकि कृषि भूमि की सुरक्षा से किसानों की आजीविका जुड़ी होती है. बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए किए गए ये काम खेती और ग्रामीण क्षेत्रों को होने वाले नुकसान को घटाने में मदद कर सकते हैं.

2.21 करोड़ से अधिक लोगों को मिला फायदा

बाढ़ का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहता. इससे गांवों में रहने वाले परिवारों, घरों और आने-जाने के रास्तों को भी नुकसान पहुंच सकता है. कई बार बाढ़ के कारण लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ता है. योगी सरकार के मुताबिक, प्रदेश में पूरी की गई बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं से 2.21 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिला है. इन कार्यों का उद्देश्य बाढ़ के खतरे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को मजबूत करना है. इसके साथ ही गांवों में जनजीवन को सामान्य बनाए रखने और बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है.

यूपी में 1,300 सिंचाई परियोजनाएं भी पूरी

बाढ़ से बचाव के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने पर भी काम किया गया है. सरकार के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक प्रदेश में कुल 1,300 सिंचाई परियोजनाएं पूरी की गई हैं. इन परियोजनाओं के माध्यम से 24.11 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता तैयार की गई है. इससे 1.90 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ पहुंचने की बात कही गई है. सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होने से खेतों तक पानी पहुंचाने में मदद मिलती है. इससे किसानों को फसलों की जरूरत के अनुसार सिंचाई करने की सुविधा मिल सकती है.

खेती में समय पर पानी मिलना जरूरी होता है. अगर फसल को जरूरत के समय पानी नहीं मिलता, तो उसकी पैदावार पर असर पड़ सकता है. ऐसे में सिंचाई परियोजनाएं किसानों के लिए महत्वपूर्ण हैं. हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ क्षेत्र में पानी की उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था के सही संचालन पर भी निर्भर करता है.

75 जिलों में नहरों और नलकूपों का बड़ा नेटवर्क

उत्तर प्रदेश में किसानों तक सिंचाई की सुविधा पहुंचाने के लिए नहरों, जलाशयों और नलकूपों का व्यापक नेटवर्क मौजूद है. सरकारी जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुल 76,527 किलोमीटर लंबी नहरें हैं. इसके अलावा, सिंचाई व्यवस्था में 71 जलाशय और 36,342 नलकूप भी शामिल हैं. इस नेटवर्क के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाने और कृषि कार्यों में मदद करने का प्रयास किया जा रहा है. नहरों और नलकूपों की सुविधा किसानों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि खेती में पानी की जरूरत अलग-अलग मौसम और फसलों के अनुसार बदलती रहती है.

किसानों और ग्रामीण आबादी की सुरक्षा पर जोर

उत्तर प्रदेश में बाढ़ से बचाव और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार खेती-किसानी के लिए महत्वपूर्ण है. एक ओर बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं का उद्देश्य खेतों, घरों और ग्रामीण आबादी को नुकसान से बचाना है, वहीं दूसरी ओर सिंचाई परियोजनाएं किसानों को खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद करती हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ सुरक्षा और सिंचाई से जुड़े इन कार्यों से प्रदेश में बड़ी संख्या में लोगों और किसानों को लाभ पहुंचा है. इन सुविधाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए समय पर रखरखाव और प्रभावी संचालन भी जरूरी है, ताकि किसानों और ग्रामीण परिवारों को लंबे समय तक इनका फायदा मिल सके.

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