
दुनियाभर के बाजारों में भारत के बागवानी उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के आम और जम्मू-कश्मीर के प्रीमियम फलों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच बना ली है. उत्तर प्रदेश से आम्रपाली और चौसा आम की खेप ब्रिटेन भेजी गई है, जबकि जम्मू-कश्मीर से पहली बार प्रीमियम अरेको चेरी और सेंटरोज़ प्लम का निर्यात सिंगापुर के लिए किया गया है. इन पहलों कोस साकार करने में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने अहम भूमिका निभाई है.
उत्तर प्रदेश सरकार के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने एक बयान में कहा कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के प्रभावी होने के बाद प्रदेश के आमों के निर्यात को नया अवसर मिला है. शनिवार को लखनऊ से 1200 किलोग्राम आम्रपाली आम की खेप लंदन के लिए रवाना की गई. इससे पहले चौसा आम की खेप भी भेजी जा चुकी है. दो दिनों के अंदर उत्तर प्रदेश से कुल 2400 किलोग्राम चौसा और आम्रपाली आम ब्रिटेन के बाजार के लिए निर्यात किए गए हैं.
उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और बागबानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि और बागवानी उत्पादों के निर्यात को लगातार बढ़ावा दे रही है. प्रदेश के क्वालिटी फलों को दुनियाभर के बाजारों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कोशिश की जा रही है, ताकि उत्पादकों को बेहतर कीमत मिल सके और उत्तर प्रदेश की पहचान अंतरराष्ट्रीय फल बाजार में मजबूत हो.
वहीं, दूसरी ओर APEDA ने जम्मू-कश्मीर के शोपियां और पुलवामा से प्रीमियम अरेको चेरी और सेंटरोज़ प्लम की पहली खेप सिंगापुर भेजने की प्रक्रिया को सफल बनाया. इससे पहले इसी क्षेत्र के ताजे चेरी और प्लम का निर्यात संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी और दुबई तक किया जा चुका है. अब सिंगापुर के बाजार में प्रवेश से कश्मीर के हाई क्वालिटी फलों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और बढ़ने की उम्मीद है.
APEDA ने कहा कि निर्यात के लिए फलों की कटाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और परिवहन वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप किया गया. पूरी सप्लाई चेन में अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पौध स्वच्छता मानकों का पालन करते हुए कोल्ड चेन का इस्तेमाल किया गया, ताकि विदेशी बाजार तक पहुंचने पर फलों की क्वालिटी और ताजगी बनी रहे.
APEDA का अनुमान है कि इस पहल से जम्मू-कश्मीर के फल उत्पादकों को पारंपरिक बिक्री की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक बेहतर प्रतिफल मिल सकता है. साथ ही निर्यात आधारित उत्पादन, आधुनिक कृषि तकनीकों और फसल कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा. इससे नुकसान कम होगा, उत्पाद का मूल्य बढ़ेगा और बागवानी क्षेत्र से जुड़े किसानों के लिए आय के नए अवसर तैयार होंगे.
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के आम और जम्मू-कश्मीर के प्रीमियम फलों का नए विदेशी बाजारों तक पहुंचना भारत के बागवानी निर्यात को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. APEDA और राज्य सरकारों के सहयोग से वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ने पर किसानों और बागबानों को बेहतर कीमत मिलने के साथ भारतीय बागवानी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहचान भी और मजबूत होने की संभावना है.