
सिगरेट पर हाल में बढ़ाए गए उत्पाद शुल्क को लेकर तंबाकू बोर्ड ने केंद्र सरकार से पुनर्विचार की मांग की है. बोर्ड ने कहा है कि इस फैसले से न केवल उद्योग पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि लाखों तंबाकू किसानों, मजदूरों और छोटे कारोबारियों की आजीविका पर भी सीधा असर पड़ेगा. तंबाकू बोर्ड के अध्यक्ष और सीनियर बीजेपी नेता यशवंत कुमार ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर बताया कि 1 फरवरी से लागू हुई एक्साइज ड्यूटी बढ़ोतरी के बाद सिगरेट की कीमतों में वास्तविक रूप से 60 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई है.
यशवंत कुमार ने कहा कि इतनी तेज बढ़ोतरी से अवैध सिगरेट कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है, जो पहले से ही कई देशों में गंभीर आर्थिक और प्रशासनिक चुनौती बन चुका है. बोर्ड ने चेतावनी दी है कि ऊंचे टैक्स और कीमतों के अंतर से तस्करी को बढ़ावा मिलता है.
कमजोर सीमा निगरानी, बिखरी हुई निगरानी व्यवस्था और प्रभावी ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम की कमी का फायदा उठाकर अवैध कारोबारी बाजार में जगह बना लेते हैं. इससे सरकार को मिलने वाला टैक्स कम होता है, संगठित अपराध को बढ़ावा मिलता है और उपभोक्ताओं तक बिना रेगुलेशन वाले उत्पाद पहुंचते हैं.
पत्र में कहा गया है कि अवैध सिगरेट का नेटवर्क अक्सर नकली उत्पाद, अवैध वेप और निकोटीन पाउच जैसे अन्य गैरकानूनी सामानों से भी जुड़ा होता है. इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों पर खतरा बढ़ जाता है, जबकि वैध कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी घटती है, नौकरियां कम होती हैं और कारखानों पर ताले लगने का खतरा पैदा होता है.
तंबाकू बोर्ड ने विशेष तौर पर एफसीवी तंबाकू किसानों की चिंता जताई है. बोर्ड के अनुसार, कानूनी सिगरेट उद्योग ही एफसीवी तंबाकू का मुख्य खरीदार है और टैक्स बढ़ने से उद्योग अपनी खरीद कम कर सकता है. इससे किसानों को लागत भी नहीं निकल पाएगी. मौजूदा समय में खेती की लागत लगभग 200 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई है.
बोर्ड ने आशंका जताई है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो बाजार में तंबाकू के दाम गिर सकते हैं और किसान गहरे कर्ज में फंस सकते हैं. उदाहरण देते हुए कहा गया है कि 2014 में 22 प्रतिशत टैक्स बढ़ने के बाद तंबाकू के दाम 20 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर गए थे.
तंबाकू बोर्ड ने सरकार से अपील की है कि उद्योग, किसानों और मजदूरों के हितों को ध्यान में रखते हुए टैक्स ढांचे की समीक्षा की जाए और संतुलित नीति अपनाई जाए. साथ ही अवैध सिगरेट कारोबार पर लगाम लगाने के लिए सख्त प्रवर्तन, प्रभावी ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की भी जरूरत बताई गई है. (पीटीआई)