
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में 25 गिद्धों की मौत का मामला अब साफ हो गया है. जांच में पता चला है कि इन गिद्धों की मौत बेहद जहरीले कीटनाशक “कार्बोफ्यूरान” की वजह से हुई. यह जानकारी भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली की लैब रिपोर्ट में सामने आई है.
यह घटना 7 अप्रैल को सामने आई थी, जब दुधवा रिजर्व के भीरा रेंज के सेमरई गांव के पास खेतों में कई गिद्धों और कुछ कुत्तों के शव मिले थे. इस घटना के बाद वन विभाग और वैज्ञानिकों में हड़कंप मच गया था.
IVRI के वैज्ञानिकों ने मृत गिद्धों और कुत्तों के शरीर के नमूनों की जांच की. इसके साथ ही घटनास्थल से मिले चावल के नमूनों की भी जांच की गई. रिपोर्ट में पाया गया कि सभी नमूनों में “कार्बोफ्यूरान” नामक कीटनाशक बहुत अधिक मात्रा में मौजूद था.
यह कीटनाशक “फ्यूराडान” नाम से भी जाना जाता है और इसे बेहद खतरनाक माना जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी थोड़ी मात्रा भी जानलेवा हो सकती है.
दुधवा बफर जोन की उप निदेशक कीर्ति चौधरी ने बताया कि शुरुआत में ही उन्हें शक था कि गिद्धों की मौत जहर फैलने के कारण हुई है. अब लैब रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी है.
वन विभाग के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर ने बताया कि जांच में किसी बीमारी के लक्षण नहीं मिले. यानी गिद्धों और कुत्तों की मौत किसी वायरस या संक्रमण से नहीं हुई, बल्कि जहरीले कीटनाशक की वजह से हुई.
मरे हुए गिद्ध हिमालयन ग्रिफॉन प्रजाति के थे, जो वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित पक्षी माने जाते हैं. गिद्धों की संख्या पहले ही तेजी से कम हो रही है, ऐसे में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मौत होना बेहद गंभीर मामला माना जा रहा है.
गिद्ध पर्यावरण के लिए बहुत जरूरी होते हैं क्योंकि वे मृत जानवरों को खाकर वातावरण को साफ रखने में मदद करते हैं. उनकी कमी से बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ सकता है.
घटना के बाद वन विभाग की एक उच्च स्तरीय टीम ने इलाके का दौरा किया. अधिकारियों ने गांव वालों से बातचीत की और कीटनाशक बेचने वालों से भी पूछताछ की. शुरुआती जांच में ही जहरीले कीटनाशक के इस्तेमाल की आशंका जताई गई थी.
अब रिपोर्ट आने के बाद वन विभाग आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है. इस घटना ने एक बार फिर खतरनाक कीटनाशकों के इस्तेमाल और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
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