
देश की प्रमुख मंडियों में कई फसलों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चल रहे हैं. 10 जुलाई 2026 के अखिल भारतीय मंडी थोक मूल्य आंकड़ों के अनुसार, गेहूं, मक्का, अरहर, चना, मूंग, बाजरा, रागी, मूंगफली और सूरजमुखी जैसी फसलों के बाजार भाव MSP से कम दर्ज किए गए हैं. इसमें सबसे ज्यादा गिरावट रागी के भाव में देखने को मिली है, जिसका मंडी भाव MSP से करीब 34 फीसदी नीचे रहा.
आंकड़ों के मुताबिक, रागी का MSP 4,886 रुपये प्रति क्विंटल तय है, जबकि मंडी में इसका औसत थोक भाव केवल 3,211 रुपये प्रति क्विंटल रहा. यानी किसानों को MSP के मुकाबले करीब 34 प्रतिशत कम कीमत मिल रही है. इसी तरह मूंग का MSP 8,768 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन मंडी भाव 6,612 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो MSP से करीब 24.58 फीसदी कम है.
मक्का और बाजरा की स्थिति भी किसानों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है. मक्का का MSP 2,400 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि मंडी भाव 1,966 रुपये रहा. वहीं बाजरा का MSP 2,775 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले बाजार भाव 2,342 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया.
गेहूं का MSP 2,585 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन मंडियों में इसका भाव 2,490 रुपये प्रति क्विंटल रहा. यानी गेहूं करीब 3.67 फीसदी नीचे बिक रहा है. अरहर का MSP 8,000 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि मंडी भाव 7,380 रुपये रहा, जो करीब 7.75 फीसदी कम है.
चना (ग्राम होल) का MSP 5,875 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन इसका बाजार भाव 5,595 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. वहीं मूंगफली और सूरजमुखी के भाव भी MSP से नीचे रहे. मूंगफली MSP 7,263 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले 7,128 रुपये और सूरजमुखी MSP 7,721 रुपये के मुकाबले 7,679 रुपये प्रति क्विंटल पर बिका.
मंडी भाव MSP से नीचे रहने का सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ता है. MSP का उद्देश्य किसानों को उनकी फसल का एक न्यूनतम सुरक्षित मूल्य दिलाना है, लेकिन जब बाजार भाव इससे नीचे चला जाता है तो किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ सकती है.
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में कीमतों को स्थिर रखने, सरकारी खरीद बढ़ाने और किसानों को MSP का लाभ दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है. खासकर रागी, मूंग और मक्का जैसी फसलों में बड़ी गिरावट किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है.
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