Agri Export में भारत के पास बड़ा मौका, 4 साल में 100 अरब डॉलर का लक्ष्‍य, Economic Survey की बड़ी बातें

Agri Export में भारत के पास बड़ा मौका, 4 साल में 100 अरब डॉलर का लक्ष्‍य, Economic Survey की बड़ी बातें

आर्थिक सर्वेक्षण ने कृषि निर्यात को भारत की बड़ी ताकत बताया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बार-बार नियम बदलने से विदेशी बाजार छिन सकते हैं. भारत उत्पादन में आगे है, लेकिन निर्यात में पीछे. सही नीतियों से खेती देश को 100 अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचा सकती है.

agri export economic surveyagri export economic survey
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jan 30, 2026,
  • Updated Jan 30, 2026, 2:35 PM IST

पूरी दुनिया अब भारत की खेती-किसानी का लोहा मान रही है. दुनियाभर में भारत के कृषि उत्‍पादों की मांग बढ़ रही है. इस बीच, आर्थ‍िक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025-26 में भारत के कृषि निर्यात को लेकर अहम अनुमान और सुझाव सामने आए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की खेती सिर्फ देश की जरूरतें पूरी करने तक सीमित न रहे, बल्कि दुनिया के बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बनाए, इसके लिए नीतियों में स्थिरता जरूरी है. बार-बार निर्यात से जुड़े नियम बदलने से भारत को नुकसान उठाना पड़ता है. इससे न सिर्फ किसानों को झटका लगता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की भरोसेमंद छवि भी कमजोर होती है.

पिछले वित्‍त वर्ष में 51.1 अरब डॉलर रहा कृषि निर्यात

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास कृषि निर्यात बढ़ाने का बड़ा मौका है. सरकार का लक्ष्य है कि अगले चार साल में कृषि, समुद्री उत्पाद और खाद्य व पेय पदार्थों का संयुक्त निर्यात 100 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए. फिलहाल वित्त वर्ष 2024-25 में कृषि निर्यात 51.1 अरब डॉलर रहा है. भारत उत्पादन के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कृषि उत्पादक देश है, लेकिन इसके बावजूद वैश्विक कृषि निर्यात में उसकी हिस्सेदारी सिर्फ 2.2 प्रतिशत है. साल 2000 में यह आंकड़ा 1.1 प्रतिशत था. यानी बीते वर्षों में बढ़त तो हुई है, लेकिन क्षमता के हिसाब से यह अब भी काफी कम है.

अर्थव्‍यवस्‍था को नई गति दे सकता है कृषि निर्यात

सर्वे में कहा गया है कि यही अंतर भारत के लिए बड़ा अवसर है. अगर सही फैसले लिए जाएं तो खेती देश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकती है. निर्यात बढ़ने से किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं और वे नई तकनीक और बेहतर तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं. इससे खेती की गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों में सुधार होता है.

आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच भारत के कृषि निर्यात में औसतन 8.2 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी हुई है. इसी दौरान देश के कुल वस्तु निर्यात की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रही. इसका मतलब यह है कि कृषि निर्यात की रफ्तार बाकी निर्यात से बेहतर रही.

दो वित्‍त वर्षों में निर्यात में आया ठहराव

इसके बावजूद चिंता की बात यह है कि वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच कृषि निर्यात लगभग ठहर सा गया. दूसरी ओर, दुनिया भर में कृषि उत्पादों का व्यापार लगातार बढ़ता रहा और वर्ष 2024 में यह 2.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया. आर्थिक सर्वेक्षण ने इस स्थिति के लिए घरेलू स्तर पर लिए जाने वाले अचानक फैसलों को जिम्मेदार माना है.

निर्यात पर रोक और MEP लगाना खतरनाक!

कई बार महंगाई या कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार कुछ कृषि उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा देती है या न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) तय कर देती है. ऐसे कदमों से घरेलू बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिलती है, लेकिन इसका असर लंबे समय तक रहता है. विदेशी खरीदार अनिश्चितता के कारण दूसरे देशों से माल खरीदने लगते हैं. एक बार बाजार हाथ से निकल गया तो उसे दोबारा पाना आसान नहीं होता.

दूसरे उपायों को अपनाने की जरूरत

सर्वेक्षण ने सुझाव दिया है कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल निर्यात रोकना ही समाधान नहीं है. सरकार सस्ती दरों पर खाद्यान्न वितरण, बफर स्टॉक का बेहतर इस्तेमाल, बाजार में सीधी दखल और जमाखोरी पर सख्ती जैसे उपायों पर ज्यादा ध्यान दे सकती है. इससे आम लोगों को भी राहत मिलेगी और किसानों को विदेशी बाजारों में बेचने का मौका भी मिलता रहेगा.

आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेगी, आयात अपने आप बढ़ेगा. ऐसे में जरूरी है कि भारत अपने निर्यात को भी तेजी से बढ़ाए, ताकि बढ़ते आयात का बोझ संभाला जा सके. खेती इस दिशा में सबसे आसान और मजबूत विकल्प बन सकती है.

MORE NEWS

Read more!