
Economic Survey 2025-26: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में तेलंगाना की कृषि प्रगति को देश के लिए एक अहम उदाहरण के रूप में पेश किया गया है. सर्वे के मुताबिक वर्ष 2014 से 2023 के बीच राज्य में खेती का रकबा करीब 90 लाख एकड़ बढ़ा है, जो सिंचाई ढांचे में किए गए बड़े निवेश का नतीजा माना जा रहा है. इस अवधि में तेलंगाना का कुल कृषि क्षेत्र 1.31 करोड़ एकड़ से बढ़कर 2.2 करोड़ एकड़ तक पहुंच गया.
सर्वे में कहा गया कि कलेश्वरम लिफ्ट इरिगेशन परियोजना और मिशन काकतीय जैसी योजनाओं ने खेती के विस्तार में निर्णायक भूमिका निभाई है. कलेश्वरम परियोजना ने सूखे और अर्ध-सूखे इलाकों तक सिंचाई का पानी पहुंचाया, जबकि मिशन काकतीय के तहत पारंपरिक टैंकों और जल संरचनाओं के पुनर्जीवन से भूजल स्तर में सुधार हुआ. इन दोनों पहलों ने बारिश पर निर्भर खेती को काफी हद तक सुरक्षित बनाया.
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, सिर्फ रकबा बढ़ना ही काफी नहीं है, बल्कि उत्पादकता बढ़ाने के लिए सिंचाई तक स्थायी पहुंच, स्थानीय संसाधनों के अनुरूप फसल चयन और जलवायु सहनशील उन्नत बीजों का इस्तेमाल जरूरी है. सर्वे में यह भी संकेत दिया गया है कि आने वाले वर्षों में कृषि नीति को जल, भूमि और मौसम के संतुलन के साथ आगे बढ़ाना होगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, धान उत्पादन के मोर्चे पर भी तेलंगाना ने नया रिकॉर्ड बनाया है. राज्य सरकार के अनुसार 2025-26 के खरीफ सीजन में किसानों से 70.82 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है. सिंचाई और सरकारी खरीद तंत्र ने किसानों का भरोसा बढ़ाया है.
सर्वे रिपोर्ट में तेलंगाना को सेवा क्षेत्र की वृद्धि के संदर्भ में भी अहम राज्य बताया गया है. कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना मिलकर देश के करीब 40 प्रतिशत सेवा उत्पादन में योगदान दे रहे हैं. आईटी, वित्त और प्रोफेशनल सर्विसेज जैसे उच्च उत्पादकता वाले सेक्टरों की वजह से यह योगदान तेजी से बढ़ा है, जिससे दक्षिण भारत के शहरी राज्यों में आर्थिक गतिविधियों का संकेंद्रण हुआ है.
श्रम सुधारों के मोर्चे पर भी तेलंगाना का नाम उन राज्यों में शामिल है, जिन्होंने महिलाओं के लिए उद्योगों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में काम के अवसरों का दायरा बढ़ाया है. इससे श्रम बाजार में भागीदारी बढ़ने और आर्थिक समावेशन को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई है.
शहरी विकास को लेकर भी सर्वे में कहा गया है कि हैदराबाद जैसे शहरों में घनी आबादी वाले क्षेत्रों का तेजी से विस्तार हुआ है. इसके साथ ही शहर का फैलाव अर्ध-शहरी और परि-शहरी इलाकों तक भी देखा गया है, जो भविष्य की बुनियादी ढांचा योजना के लिए अहम संकेत है. (पीटीआई)