
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के संयुक्त प्रयास से 'किसान तक' द्वारा संचालित किसान कारवां आज जालौन जिले के मंडोरी गांव पहुंचा. 75 जिलों की व्यापक कवरेज के तहत यह किसान कारवां का 17वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से सीधा संवाद कर खेती से जुड़ी अहम जानकारियां प्राप्त की. कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों ने किसानों को उन्नत खेती, आधुनिक तकनीक, बीज चयन, फसल प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी. किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं, जिनका मौके पर ही समाधान भी बताया गया.
जालौन जिला विशेष रूप से चना और मटर की खेती के लिए जाना जाता है. वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से यहां के किसानों का उत्पादन पहले की तुलना में काफी बढ़ा है, जिससे उनकी आय में भी काफी बढ़ोतरी हुआ है.
किसान कारवां के पहले चरण में पशुपालन विभाग के चिकित्सक डॉ. पवन कुमार ने किसानों को सरकारी पशुपालन योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने सेक्स सॉर्टेड सीमेन के फायदे बताए और सहभागिता योजना के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि गौशाला से चार पशु लेने पर सरकार की ओर से 50 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु की दर से राशि किसानों के खाते में भेजी जाती है.
दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र जालौन की वैज्ञानिक डॉ. राजकुमारी ने मिलेट्स की खेती को बुंदेलखंड की धरती के लिए वरदान बताया. उन्होंने कहा कि मिलेट्स में कम पानी और कम रासायनिक उर्वरक की जरूरत होती है, जबकि उत्पादन भरपूर मिलता है. साथ ही उन्होंने पोषण वाटिका लगाने के फायदे बताते हुए कहा कि इससे प्रति व्यक्ति 300 ग्राम सब्जी की दैनिक जरूरत पूरी की जा सकती है.
तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र जालौन के प्रभारी और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद मुस्तफा ने भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित काशी नंदिनी और काशी शिखा जैसी उन्नत किस्मों की जानकारी दी. उन्होंने मटर की खेती से अधिक लाभ लेने के तरीके बताए और 'वन ड्रॉप मोर क्रॉप' योजना के तहत ड्रिप सिंचाई के फायदे भी गिनाए.
चौथे चरण में जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज अवस्थी ने कहा कि आज सरकार किसानों और पशुपालकों के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने पशुपालन को पोषण और आय का मजबूत आधार बताया. साथ ही मिट्टी जांच के फायदे भी किसानों को समझाए.
पांचवें चरण में उद्यान विभाग के अधिकारी विवेक कुमार ने बुंदेलखंड के लिए संचालित विंध्य योजना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि एक हेक्टेयर में फलदार बागवानी लगाने पर 1,08,000 रुपये की सब्सिडी दी जाती है.जिसमें प्रति वर्ष 36,000 रुपये की सहायता राशि मिलती है. इसके अलावा ट्रैक्टर और पावर टिलर की खरीद पर 1,00,000 रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है.
छठवें चरण में जादूगर सलमान ने अपने जादू के माध्यम से किसानों को मिल-जुलकर खेती करने और आपसी सलाह से खेती के फायदे बताए. जादूगर सलमान ने कहा कि एकता से न सिर्फ बेहतर दाम मिलते हैं, बल्कि कृषि नुकसान से भी बचा जा सकता है.
सातवें चरण में कार्यक्रम के सातवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार दिए गए. वहीं, प्रथम पुरस्कार 3000 रुपये रोहित को मिले, जबकि द्वितीय पुरस्कार 2000 रुपये शमशाद खान ने जीता.
किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा. यहां खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी, सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और उन सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा होगी, जो आज के समय में किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी हैं.
हमारे इस किसान कारवां में हर पड़ाव पर होंगे विशेषज्ञों के व्याख्यान, आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की प्रदर्शनियां, प्रशिक्षण सत्र और किसान गोष्ठियां. साथ ही, उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचार, मेहनत और समझदारी से खेती को एक नई दिशा दी है. किसानों के लिए यह मंच अनुभव साझा करने का भी होगा और सीखने का भी.
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.
2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.
3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.
4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.
5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.
6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.
7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.
8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर