
देश में चीनी उत्पादन को लेकर उद्योग जगत के अनुमान में बड़ा संशोधन सामने आया है. ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) ने 2025-26 चीनी सीजन (अक्टूबर-सितंबर) के लिए अपना अनुमान घटाकर 283 लाख टन कर दिया है. इससे पहले 28 जनवरी को जारी पहले अनुमान में उत्पादन 296 लाख टन बताया गया था. करीब एक महीने के भीतर किए गए इस संशोधन ने वैश्विक बाजार की उस धारणा को झटका दिया है, जिसमें भारत से रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही थी.
एसोसिएशन ने कहा कि कुल चीनी उत्पादन लगभग 315 लाख टन रहने का अनुमान है, लेकिन इसमें से करीब 32 लाख टन गन्ना इथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट किया जा सकता है. यही वजह है कि वास्तविक उपलब्ध चीनी का अनुमान कम होकर 283 लाख टन तक सीमित रहने की संभावना जताई गई है.
AISTA की क्रॉप कमेटी ने कहा कि इस सीजन में कई प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों को असामान्य मौसम का सामना करना पड़ा. महाराष्ट्र और कर्नाटक में लगातार बारिश और लंबे समय तक छाए बादलों ने गन्ने की बढ़वार और पकने की प्रक्रिया को प्रभावित किया है. विशेष रूप से महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में अक्टूबर के दौरान हुई भारी बारिश से खेतों में जलभराव की स्थिति बनी, जिससे खेत प्रबंधन और कटाई से जुड़े कार्य प्रभावित हुए.
मौसम की इस अनिश्चितता का असर गन्ने की उत्पादकता पर भी पड़ा. कई इलाकों में रैटून फसल में समय से पहले फूल आने की समस्या देखी गई, जिससे उत्पादन क्षमता में कमी आई. राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक महाराष्ट्र का उत्पादन अब 99.7 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पहले 108.1 लाख टन आंका गया था.
हालांकि, यह पिछले सीजन के 81 लाख टन से अभी भी अधिक है. वहीं, उत्तर प्रदेश के उत्पादन अनुमान को भी घटाकर 91 लाख टन कर दिया गया है, जो पहले 94.1 लाख टन था और पिछले वर्ष के 93 लाख टन से भी थोड़ा कम है.
इधर, कर्नाटक में भी उत्पादन अनुमान मामूली घटकर 48 लाख टन रह गया है, जबकि पहले यह 49.1 लाख टन आंका गया था. हालांकि, यह आंकड़ा पिछले वर्ष के 43 लाख टन से बेहतर माना जा रहा है.
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक मिलकर देश के कुल चीनी उत्पादन का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा देते हैं. इस बीच इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन ने भी 2025-26 सीजन के लिए अपना अनुमान घटाकर 292.9 लाख टन कर दिया है.