प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा, सरकार बनाएगी सर्टिफिकेशन लैब

प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा, सरकार बनाएगी सर्टिफिकेशन लैब

PM मोदी ने बजट के बाद ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ विषय पर आयोजित एक वेबिनार को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार 'प्राकृतिक खेती' से तैयार होने वाले कृषि उत्पादों को सर्टिफिकेशन करने के लिए लैब बनाने पर विचार कर रही है.

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा (AI तस्वीर)प्राकृतिक खेती को बढ़ावा (AI तस्वीर)
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 07, 2026,
  • Updated Mar 07, 2026, 12:44 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार 'प्राकृतिक खेती' से तैयार होने वाले कृषि उत्पादों को सर्टिफिकेशन करने के लिए लैब बनाने पर विचार कर रही है. इसका उद्देश्य ऐसे उत्पादों को सर्टिफिकेशन करके उन्हें दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने में मदद करना है. उन्होंने बताया कि अभी भारत में प्रमाणन की सुविधा केवल जैविक उत्पादों के लिए ही उपलब्ध है. जैविक उत्पाद वे होते हैं जिन्हें बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के उगाया जाता है और उन्हें ‘ऑर्गेनिक’ कहलाने के लिए कुछ तय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है. लेकिन सरकार अब इस बात पर विचार कर रही है कि प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलों के लिए भी अलग से प्रमाणन व्यवस्था बनाई जाए, ताकि किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने उत्पाद बेचने में आसानी हो सके.

प्राकृतिक खेती पर दें ज्यादा ध्यान

बजट के बाद ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ विषय पर आयोजित एक वेबिनार को संबोधित करते हुए PM मोदी ने कहा कि आजकल लोग समग्र स्वास्थ्य देखभाल (होलिस्टिक हेल्थ) में ज्यादा रुचि ले रहे हैं. इसी वजह से जैविक आहार और ऑर्गेनिक भोजन की मांग भी लगातार बढ़ रही है.उन्होंने कहा कि भारत को रसायन मुक्त खेती और प्राकृतिक खेती पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. प्राकृतिक खेती से उगाए गए उत्पाद पूरी तरह रसायन मुक्त होते हैं, इसलिए इनके जरिए भारत के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के बड़े अवसर मिल सकते हैं.

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों के लिए प्रमाणन व्यवस्था और प्रयोगशालाएं बनाने पर विचार कर रही है, ताकि इन उत्पादों की क्वालिटी प्रमाणित की जा सके. साथ ही उन्होंने वेबिनार में शामिल लोगों से कहा कि इस योजना को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव और विचार जरूर साझा करें.

सर्टिफिकेशन पर ध्यान केंद्रित करें

ईरान के खिलाफ मौजूदा युद्ध के बीच प्राकृतिक खेती और जैविक उत्पादों पर जोर देना भी सरकार के फोकस को रेखांकित करता है, क्योंकि पिछले 12 वर्षों में समय-समय पर घोषित योजनाओं के बावजूद रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग में लगातार वृद्धि हुई है.

उर्वरक की मांग में हो रही बढ़ोतरी

फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-दिसंबर 2025-26 के दौरान यूरिया की बिक्री पिछले वर्ष की इसी अवधि के 30.02 मिलियन टन की तुलना में 3.8 प्रतिशत बढ़कर 31.16 मिलियन टन हो गई. हालांकि, इसी अवधि में घरेलू यूरिया उत्पादन 3 प्रतिशत घटकर 22.44 मिलियन टन रह गया, जबकि आयात 85.3 प्रतिशत बढ़कर 8 मिलियन टन हो गया. यूरिया का आयात, जो पूरी तरह से सरकार द्वारा नियंत्रित है, 2023-24 में 7.04 मिलियन टन से घटकर 20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2024-25 में 5.65 मिलियन टन रह गया.

कृषि निर्यात को बढ़ावा दें: PM मोदी 

PM मोदी ने वैश्विक गुणवत्ता और ब्रांडिंग मानकों को पूरा करने के लिए "विशेषज्ञों, उद्योग और किसानों को शामिल करते हुए एक एकीकृत दृष्टिकोण" अपनाने का भी आह्वान किया और हितधारकों से स्थानीय किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने की अपील की. उन्होंने कहा कि आज वैश्विक बाजार खुल रहे हैं और वैश्विक मांग में बदलाव आ रहा है. इस वेबिनार में कृषि को निर्यात-उन्मुख बनाने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए. हमारे यहां विविध जलवायु है और कृषि-जलवायु क्षेत्रों की प्रचुरता है; हमें इसका पूरा लाभ उठाना चाहिए. जोखिमों को कम करने के लिए, प्रधानमंत्री ने फसल विविधीकरण की वकालत की और कहा कि राज्यों को अपने बजटीय दायित्वों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए.

उच्च मूल्य वाली फसलों पर ध्यान केंद्रित

बजट प्रस्तावों पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इन योजनाओं से कृषि क्षेत्र में कई नए अवसर पैदा होंगे. इससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और निर्यात को भी मजबूती मिलेगी. उन्होंने बताया कि सरकार ने उच्च मूल्य वाली खेती पर खास ध्यान दिया है. इसके तहत नारियल, काजू, कोको और चंदन जैसे उत्पादों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि दक्षिण भारत के राज्य, खासकर केरल और तमिलनाडु में नारियल का उत्पादन काफी होता है, लेकिन वहां कई नारियल के पेड़ अब बहुत पुराने हो गए हैं, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता कम हो गई है. ऐसे में बजट में नारियल पर दिए गए विशेष जोर से इन राज्यों के किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है.

उन्होंने यह भी कहा कि 2026-27 के बजट में काजू, कोको और चंदन जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने पर खास ध्यान दिया गया है. इसके साथ ही खाद्य तेल और दालों के लिए राष्ट्रीय मिशन और प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन भी कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने में मदद कर रहे हैं. प्रधानमंत्री ने बताया कि बजट में पूर्वोत्तर भारत में अगरवुड और हिमालयी राज्यों में ठंडे मौसम में उगने वाले मेवों को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव है. उन्होंने कहा कि अगर सभी मिलकर उच्च मूल्य वाली खेती को बढ़ावा दें, तो भारत का कृषि क्षेत्र वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकता है. 

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