त्योहारों से पहले चीनी के दाम में उछाल: सरकार ने कहा- इथेनॉल नहीं, सप्लाई संकट जिम्मेदार

त्योहारों से पहले चीनी के दाम में उछाल: सरकार ने कहा- इथेनॉल नहीं, सप्लाई संकट जिम्मेदार

त्योहारी सीजन से पहले देश में चीनी की कीमतों में तेजी देखी जा रही है. 20 जुलाई 2026 को 48.18 रुपये प्रति किलो रही चीनी की औसत खुदरा कीमत 20 अगस्त 2026 तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है. बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है. सरकार का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण इथेनॉल उत्पादन नहीं, बल्कि कम उत्पादन, बढ़ती मांग, वैश्विक आपूर्ति संकट और जमाखोरी है. इसके साथ ही चीनी डीलरों पर स्टॉक सीमा लागू कर सट्टेबाजी और कृत्रिम कमी पर भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Aug 21, 2026,
  • Updated Aug 21, 2026, 6:39 PM IST

त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में तेजी देखी जा रही है. सरकार ने कच्ची चीनी के आयात की मंज़ूरी दी है और साथ ही चीनी की बढ़ती कीमतों को रोकने और त्योहारी सीजन के दौरान इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हाल के हफ्तों में चीनी की कीमतें बढ़ी हैं - 20 जुलाई 2026 को 48.18 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 20 अगस्त 2026 को 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं.

सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और उपभोक्ताओं के लिए चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और स्थिर कीमतें सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं. हालांकि, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इस बात से इनकार किया है कि इथेनॉल का उत्पादन चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण है. सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन (दूसरी तरफ इस्तेमाल) से जोड़ना गलत है.

इथेनॉल पर सरकार की सफाई

असल में, इथेनॉल के लिए डायवर्ट की गई चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% हो गया है. इसके अलावा, देश में बनने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्के से आता है.

चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई कारणों से हुई है, जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन, त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी हुई मांग, मौसम के कारण गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग के कुछ वर्गों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं.

चीनी का उत्पादन शुरुआती अनुमानों से कम - मौजूदा सीजन के दौरान चीनी का उत्पादन लगभग 306 LMT होने की उम्मीद है, जबकि गन्ना उगाने वाले राज्यों का शुरुआती अनुमान लगभग 343 LMT था. गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी के साथ-साथ ज्यादा बारिश के कारण जलभराव से भी उत्पादन प्रभावित हुआ है.

अनुमान से कम उत्पादन के बावजूद, अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.

वैश्विक स्तर पर भी चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं - चीनी की आपूर्ति में कमी एक वैश्विक घटना है और यह केवल भारत तक सीमित नहीं है. 2026-27 के लिए वैश्विक चीनी की कमी का अनुमान लगभग 33 LMT है. मौसम की स्थितियों को लेकर चिंता ने वैश्विक परिदृश्य को और प्रभावित किया है. नतीजतन, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी की कीमतें 30 जून 2026 को $474 प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त 2026 को $552 प्रति टन हो गई हैं, जो दो महीने से भी कम समय में 16% से ज्यादा की बढ़ोतरी है.

इथेनॉल से किसानों की मदद

इथेनॉल प्रोग्राम ने किसानों की मदद की है और चीनी मिलों को मजबूत किया है. भारत में आम तौर पर हर साल लगभग 320-340 LMT चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत लगभग 280-290 LMT है. ज्यादा उत्पादन वाले सालों में, अतिरिक्त स्टॉक चीनी मिलों के फंड को रोक देता है और गन्ना किसानों को भुगतान में देरी हो सकती है.

अतिरिक्त चीनी को इथेनॉल की ओर मोड़ने से इस समस्या को हल करने में मदद मिली है और चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है. इसके नतीजे दिखाई दे रहे हैं. 20 अगस्त 2026 तक, 2025-26 चीनी सीजन के लिए गन्ना बकाया का 97% हिस्सा किसानों को पहले ही चुकाया जा चुका है.

चीनी मिलों की बेहतर वित्तीय स्थिति ने सरकारी मदद पर उनकी निर्भरता भी कम कर दी है. जहां 2014 और 2021 के बीच चीनी उद्योग को लगभग 14,600 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई थी, वहीं 2021-22 के बाद से ऐसी कोई सब्सिडी घोषित नहीं की गई है.

साथ ही, लंबे समय में उपभोक्ताओं के लिए चीनी की कीमतें काफी हद तक स्थिर रही हैं, अगस्त 2024 और जुलाई 2026 के बीच इनमें सालाना केवल 3% के आसपास बढ़ोतरी हुई है.

जमाखोरी के खिलाफ सरकारी कदम

सरकार ने देखा है कि कुछ चीनी मिलों और व्यापारियों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी ने भी हाल ही में कीमतों में बढ़ोतरी की. इसके खिलाफ कई कदम उठाए गए हैं.

  • 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक देश भर में चीनी डीलरों पर 400 टन की स्टॉक सीमा लगाई गई है. 
  • 1 सितंबर से, थोक उपभोक्ताओं को 15 दिनों की खपत से ज्यादा चीनी स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी.
  • केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की संयुक्त टीमें जमाखोरी और कृत्रिम कमी की जांच के लिए मिलों में चीनी स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन कर रही हैं.
  • एहतियाती उपाय के तौर पर, सरकार ने घरेलू उपलब्धता को और बढ़ाने के लिए 10 LMT कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने का फैसला किया है.
  • राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से गन्ने की पेराई शुरू करने की सलाह दी गई है. इससे अक्टूबर में चीनी का उत्पादन सामान्य 3-4 LMT से बढ़कर 10 LMT से ज्यादा होने की उम्मीद है, जिससे त्योहारों के मौसम में चीनी की उपलब्धता और बेहतर होगी.

सरकार ने कहा है कि वह उपभोक्ताओं और गन्ना किसानों, दोनों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. वह चीनी के स्टॉक, कीमतों और बाज़ार के तौर-तरीकों पर बारीकी से नजर रखेगी और जमाखोरी और कीमतों में बेवजह बढ़ोतरी को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी. साथ ही यह भी सुनिश्चित करेगी कि किसानों को उनका बकाया समय पर मिले.

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