
खाद्यान्न, फल और सब्जियों पर इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों को लेकर लोकसभा में उठाए गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में केवल उन्हीं कीटनाशकों के उपयोग की अनुमति दी जाती है जिन्हें वैज्ञानिक टेस्ट और सुरक्षा नियमों के आधार पर रजिस्ट्रेशन दिया गया हो. सरकार के अनुसार, निर्धारित मात्रा और निर्देशों के अनुरूप उपयोग किए जाने पर ये कीटनाशक मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं होते.
लोकसभा में ईश्वरसामी के. द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि कीटनाशकों को उपयोग की अनुमति देने से पहले कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की रजिस्ट्रेशन कमेटी (RC) उनकी प्रभावशीलता और सुरक्षा का विस्तृत टेस्ट कराती है. यह सुनिश्चित किया जाता है कि इनके प्रयोग से मनुष्यों, पशुओं और पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.
मंत्री ने कहा कि अलग-अलग मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों और संस्थानों में किए गए अध्ययन और फील्ड ट्रायल के आधार पर कीटनाशकों की मात्रा, उपयोग की विधि, सावधानियां और जरूरी उपचार संबंधी जानकारी निर्धारित की जाती है. इन सभी निर्देशों को प्रोडक्ट के लेबल और बुकेलट पर प्रकाशित किया जाता है. यदि किसान इन निर्देशों का पालन करते हैं तो स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी जोखिम नहीं होते.
संसद में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या कीटनाशक युक्त खाद्यान्न खाने और प्रदूषित पानी और हवा के कारण पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियों की संख्या में गिरावट आ रही है. इस पर सरकार ने कहा कि उसके पास ऐसा कोई खास आंकड़ा या जानकारी उपलब्ध नहीं है, जिससे यह साबित हो कि पक्षियों की संख्या में कमी सीधे तौर पर कीटनाशकों से दूषित खाद्यान्न या पानी के कारण हो रही है.
सरकार ने बताया कि रासायनिक कीटनाशकों के बहुत अधिक उपयोग को कम करने के लिए देशभर में किसानों को जैव-कीटनाशकों, बायो स्टिमुलेंट और वैकल्पिक खेती पद्धतियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है. इसके लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सेंट्रल इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट सेंटर (CIPMC), कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और राज्य कृषि विभाग नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं.
साल 2024-25 के दौरान देशभर में 720 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका लाभ 21,271 किसानों को मिला. इन कार्यक्रमों में किसानों को जैविक खेती, मिश्रित खेती और अन्य टिकाऊ कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई.
सरकार ने बताया कि कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management - IPM) रणनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस प्रणाली में पारंपरिक और जैविक उपायों के माध्यम से कीट नियंत्रण किया जाता है, जिससे रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग की जरूरत कम होती है और कृषि उत्पादन भी सुरक्षित बना रहता है.
सरकार का मानना है कि किसानों को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों से जोड़कर उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है.