पराली जलाने की घटनाएं घटीं, फिर भी दिल्ली की हवा में सुधार नहीं, AQI पिछले साल के बराबर

पराली जलाने की घटनाएं घटीं, फिर भी दिल्ली की हवा में सुधार नहीं, AQI पिछले साल के बराबर

दिल्ली के आसपास पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं इस साल 2019 के बाद सबसे कम दर्ज की गई हैं. 15 सितंबर से 15 अक्टूबर के बीच 327 आग की घटनाएं सामने आईं, जो पिछले साल की तुलना में काफी कम हैं. इसके बावजूद दिल्ली की एयर क्वालिटी में कोई खास सुधार नहीं देखा गया है और औसत AQI पिछले वर्ष के लगभग समान बना हुआ है. आंकड़े बताते हैं कि केवल पराली जलाने की घटनाओं में कमी से राजधानी के प्रदूषण स्तर पर तत्काल बड़ा असर नहीं पड़ा है.

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क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Oct 16, 2026,
  • Updated Oct 16, 2026, 6:16 PM IST

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के आसपास खेतों में आग लगने की घटनाएं साल के इस समय के लिए 2019 के बाद से सबसे कम हैं. लेकिन शहर की हवा की स्थिति पिछले साल जैसी ही है.

ये आग पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में लगी हैं. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के अनुसार, 15 सितंबर से 15 अक्टूबर के बीच सैटेलाइट से ऐसी 327 घटनाएं देखी गईं. पिछले साल इन्हीं तारीखों पर यह संख्या 475 थी.

दिल्ली की हवा में कोई खास बदलाव नहीं आया है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, इन 31 दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) का औसत 133 रहा. पिछले साल यह 135 था.

संख्या जितनी ज्यादा होगी, हवा उतनी ही अधिक प्रदूषित होगी.

आग कहां लगी है

IARI के आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में पंजाब में 185 जगहों पर आग लगी. यह पिछले साल की 178 घटनाओं से थोड़ी ज्यादा है.

उत्तर प्रदेश में 134 घटनाएं हुईं, जो पिछले साल की 271 घटनाओं का लगभग आधा है. हरियाणा में 8 घटनाएं हुईं, जो पिछले साल की 26 घटनाओं से कम हैं.

ज्यादातर दिन शांत रहे. IARI के आंकड़ों के अनुसार, 31 में से 20 दिन ऐसे रहे जब सैटेलाइट से 10 से भी कम आग की घटनाएं देखी गईं. सबसे खराब दिन 13 अक्टूबर रहा, जब 55 जगहों पर आग लगी. इनमें से 51 घटनाएं पंजाब में थीं.

दिल्ली की हवा

CPCB के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में दिल्ली में एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब हवा की स्थिति 'मध्यम' (Moderate) से ज्यादा खराब हुई हो. 'मॉडरेट' (सामान्य) का मतलब है 101 से 200 के बीच का इंडेक्स.

सबसे खराब दिन 4 अक्टूबर था, जब इंडेक्स 187 तक पहुंच गया था. 15 अक्टूबर को यह 149 था.

कुछ वर्षों में आग की घटनाएं अधिक थीं, फिर भी हवा साफ थी. IARI और CPCB के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में इन्हीं तारीखों के दौरान सैटेलाइट ने 3,256 आग की घटनाएं देखीं, और दिल्ली का औसत इंडेक्स 112 रहा. 2022 में आग की 1,497 घटनाएं हुईं और औसत इंडेक्स 111 रहा.

ये आंकड़े क्या नहीं बताते

ये आंकड़े आग की घटनाओं और हवा की क्वालिटी को एक साथ दिखाते हैं. लेकिन ये यह नहीं बताते कि दिल्ली की प्रदूषित हवा में आग की घटनाओं का कितना योगदान है. साथ ही, सैटेलाइट द्वारा देखी गई आग का मतलब हमेशा खेत में लगाई गई आग ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है.

सबसे खराब स्थिति अभी आनी बाकी है

फसल कटाई का पहला महीना अपेक्षाकृत शांत होता है. IARI के आंकड़ों के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच, आग की कम से कम 87 प्रतिशत घटनाएं 15 अक्टूबर के बाद हुईं.

पिछले कुछ वर्षों में आग की घटनाओं में काफी कमी आई है. IARI के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच सैटेलाइट ने 82,021 आग की घटनाएं देखीं. 2025 में यह संख्या 13,069 रही, जो कि 84 प्रतिशत कम है.

लेकिन खराब हवा वाले दिनों की संख्या बढ़ गई है. CPCB के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में दिल्ली में 28 दिन ऐसे रहे जब हवा की क्वालिटी 'बहुत खराब' (Very Poor) या 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में थी. 2025 में ऐसे दिनों की संख्या 34 रही.

'बहुत खराब' (Very Poor) का मतलब है 301 या उससे अधिक का इंडेक्स. CPCB के आंकड़ों के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच, हर सीजन में दिल्ली में ऐसे 25 से 38 दिन रहे. इनमें से लगभग सभी घटनाएं अक्टूबर के मध्य के बाद हुईं.

पिछले साल, इस तारीख तक आग लगने की 475 घटनाएं दर्ज की गई थीं. 30 नवंबर तक, यह आंकड़ा 13,069 हो गया था.(दीपू राय की रिपोर्ट)

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