'शक्ति की सप्तधारा' से मिलेगी कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा, शिवराज ने दिया रोडमैप पर जोर

'शक्ति की सप्तधारा' से मिलेगी कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा, शिवराज ने दिया रोडमैप पर जोर

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘शक्ति की सप्तधारा’ के तहत कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने पर जोर दिया. उन्होंने उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत घटाने, गुणवत्ता सुधारने और किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए राज्य और जिला स्तर पर कृषि रोडमैप तैयार करने की बात कही.

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क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Aug 19, 2026,
  • Updated Aug 19, 2026, 9:03 AM IST

केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि को समृद्ध, आत्मनिर्भर और वैश्विक बाजार से जोड़ना जरूरी है. उन्होंने कृषि उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने, गुणवत्ता सुधारने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र, राज्यों और जिलों के स्तर पर स्पष्ट कृषि रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया. नई दिल्ली के पूसा स्थित सी. सुब्रमण्यम सभागार में मंगलवार को कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के विभागों का संकल्प कार्यक्रम आयोजित किया गया.

कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों, कर्मचारियों, वैज्ञानिकों, किसानों, लखपति दीदियों, फूड प्रोसेसर्स, निर्यातकों और किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों को विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प दिलाया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर ‘शक्ति की सप्तधारा’ के जरिए विकसित भारत के निर्माण की दिशा सामने रखी है. कृषि और खाद्य प्रसंस्करण इस दिशा में महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं और इनसे जुड़े सभी पक्षों को मिलकर काम करना होगा.

खेत से वैश्विक बाजार तक किसानों की उपज

चौहान ने कहा कि भारतीय किसानों के पास मिर्च, मसाले, फल, फूल और कई पारंपरिक कृषि उत्पादों की बड़ी विविधता है. बेहतर गुणवत्ता, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिए इन उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जा सकता है. इससे किसानों की आय बढ़ाने के नए अवसर तैयार होंगे.

उन्होंने कहा कि किसान, वैज्ञानिक, प्रोसेसर, निर्यातक और एफपीओ कृषि मूल्य श्रृंखला के अहम हिस्से हैं. इन सभी के बीच बेहतर समन्वय बनाकर खेत से बाजार तक की पूरी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है.

उत्पादन बढ़े और खेती की लागत घटे

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकता उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के साथ खेती की लागत कम करना और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है. किसानों को मौसम, बाजार और उत्पादन से संबंधित सही जानकारी समय पर उपलब्ध कराना भी जरूरी है.

उन्होंने प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, सिंचाई, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने की जरूरत बताई. चौहान ने कहा कि स्थानीय संसाधनों और क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार कृषि आधारित आय के नए मॉडल विकसित किए जाने चाहिए.

राज्य और जिले के स्तर पर बने कृषि रोडमैप

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में राष्ट्रीय स्तर के साथ हर राज्य और जिले के लिए अलग कृषि रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए. अलग-अलग क्षेत्रों में मिट्टी, पानी, जलवायु और फसलों की परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए स्थानीय जरूरतों के मुताबिक उत्पादन, प्रसंस्करण और मार्केटिंग की योजना बनाना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि बाजार में किस फसल की कितनी मांग है, इसका वैज्ञानिक आकलन किया जाना चाहिए. इसके आधार पर किसानों को उपयुक्त फसलों, बेहतर क्‍वालिटी और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी जा सकती है.

तकनीक और अनुसंधान को खेत तक पहुंचाने पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और कृषि विज्ञान केंद्रों समेत संबंधित संस्थानों को किसानों की जरूरत के मुताबिक तकनीक और वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध कराने पर जोर दिया. उन्होंने बेहतर बीज, मशीनीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक कृषि पद्धतियों का इस्तेमाल बढ़ाने की जरूरत बताई.

चौहान ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ तभी प्रभावी होगा, जब नई तकनीक और जानकारी समय पर किसानों तक पहुंचे. कृषि अनुसंधान संस्थानों और किसानों के बीच बेहतर तालमेल इस दिशा में महत्वपूर्ण है.

छह करोड़ लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य

ग्रामीण विकास के क्षेत्र में शिवराज सिंह चौहान ने लखपति दीदी योजना को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बताया. उन्होंने कहा कि तीन करोड़ ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है और अब छह करोड़ लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य रखा गया है.

उन्होंने कहा कि स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं. ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों की बेहतर बिक्री के लिए ‘शी-मार्ट्स’ और ब्रांडिंग जैसी पहलों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है.

विकसित भारत के लिए विकसित गांव जरूरी

चौहान ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण विकसित गांवों के बिना संभव नहीं है. ग्रामीण क्षेत्रों में आवास, सड़क, जल संरक्षण, रोजगार, आजीविका, महिला सशक्तिकरण और कृषि आधारित गतिविधियों को गति देने की जरूरत है.

उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से योजनाओं की प्रगति का आकलन केवल सरकारी आंकड़ों से नहीं, बल्कि गांवों और लाभार्थियों के स्तर पर करने को कहा. उन्होंने जल सुरक्षा, नदियों के पुनर्जीवन, भूमि संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया.

किसान से लेकर निर्यातक तक साझेदारी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े सभी पक्षों की साझेदारी से ही बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं. किसान, वैज्ञानिक, अधिकारी, प्रोसेसर, निर्यातक, एफपीओ और स्वयं सहायता समूह मिलकर कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान और तकनीकी समाधान किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप होने चाहिए. खेत से बाजार तक मजबूत मूल्य श्रृंखला बनने से किसानों को बेहतर आय और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.

अधिकारियों को दिए काम के चार सूत्र

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों और कर्मचारियों को काम के प्रति समर्पण का संदेश देते हुए सफलता के चार सूत्र बताए. उन्होंने ‘पांव में चक्कर’ को लगातार सक्रिय रहकर क्षेत्र में काम की समीक्षा करने, ‘मुंह में शक्कर’ को सहयोगियों और आम लोगों के साथ मधुर व्यवहार, ‘सीने में आग’ को लक्ष्य हासिल करने के जुनून और ‘माथे पर बर्फ’ को कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने का प्रतीक बताया.

उन्होंने कहा कि किसी प्रयास में पहली बार सफलता नहीं मिलने पर निराश होने के बजाय लगातार प्रयास करते रहना चाहिए. उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से अपने विभागों के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय कर ठोस रोडमैप के साथ काम करने का आह्वान किया.

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