सरगुजा सहकारी समिति में 1.92 करोड़ का फर्जी लोन घोटाला, 127 किसानों के नाम पर निकाली गई राशि

सरगुजा सहकारी समिति में 1.92 करोड़ का फर्जी लोन घोटाला, 127 किसानों के नाम पर निकाली गई राशि

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में 127 किसानों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1.92 करोड़ रुपये की अवैध ऋण निकासी का खुलासा हुआ है. संयुक्त जांच में आठ अधिकारी दोषी पाए गए. कलेक्टर के निर्देश पर सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है. मामला सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का माना जा रहा है.

सरगुजा में किसानों के नाम पर ऋण घोटालासरगुजा में किसानों के नाम पर ऋण घोटाला
क‍िसान तक
  • Ambikapur,
  • Mar 03, 2026,
  • Updated Mar 03, 2026, 2:08 PM IST

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र की आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित केरजू में एक बड़ा फर्जी ऋण घोटाला सामने आया है. जांच में पता चला कि 127 किसानों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1 करोड़ 92 लाख 82 हजार 6 रुपये की राशि अवैध रूप से निकाल ली गई. प्रारंभिक जांच के अनुसार इसे सुनियोजित वित्तीय अनियमितता माना गया है. इस मामले ने स्थानीय प्रशासन और किसानों के बीच चिंता और नाराजगी पैदा कर दी है.

संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट

इस मामले की जांच अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सीतापुर की अध्यक्षता में गठित संयुक्त जांच दल द्वारा की गई. जांच में पाया गया कि किसानों को वास्तविक जानकारी दिए बिना उनके नाम पर ऋण स्वीकृत दिखाया गया और राशि का आहरण कर लिया गया. कई किसानों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने न तो ऋण के लिए आवेदन किया और न ही किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए. इस तरह की धोखाधड़ी ने किसानों को गंभीर आर्थिक और मानसिक नुकसान पहुँचाया.

दोषी अधिकारी और कर्मचारियों की पहचान

जांच के दौरान तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारी मदन सिंह, जोगी राम, सैनाथ केरकेट्टा (वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक एवं प्राधिकृत अधिकारी), तात्कालिक शाखा प्रबंधक भूपेन्द्र सिंह परिहार, सहायक लेखापाल शिवशंकर सोनी, कैशियर ललिता सिन्हा, सामान्य सहायक सुमित कुमार और कम्प्यूटर ऑपरेटर दीपक कुमार चक्रधारी को दोषी पाया गया. रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से यह घोटाला संभव हुआ.

प्रशासन की कड़ी कार्रवाई

सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित थाना में आठों दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस कदम से अन्य संस्थाओं और कर्मचारियों को भी चेतावनी मिली है कि वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता का पालन अनिवार्य है.

किसानों और स्थानीय समुदाय पर असर

इस फर्जी ऋण घोटाले से प्रभावित किसान काफी परेशान हैं. उन्होंने न केवल आर्थिक नुकसान झेला है, बल्कि उनकी मेहनत और भरोसे का भी दुरुपयोग हुआ है. स्थानीय समुदाय में भी इस मामले ने चिंता बढ़ा दी है क्योंकि सहकारी समितियों पर लोगों का विश्वास घटता जा रहा है. किसानों का कहना है कि ऐसे मामलों को जल्द से जल्द सुलझाया जाना चाहिए ताकि उन्हें न्याय और उचित सहायता मिल सके.

सरगुजा के सीतापुर क्षेत्र में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में 127 किसानों के नाम पर फर्जी ऋण निकालना गंभीर वित्तीय अपराध है. संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट ने घोटाले की सटीक जानकारी दी और दोषियों की पहचान की. कलेक्टर अजीत वसंत की कड़ी कार्रवाई से किसानों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है. इस मामले ने स्पष्ट कर दिया कि सहकारी समितियों में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन कितना महत्वपूर्ण है, और प्रशासन इसे सुनिश्चित करने के लिए सतर्क है. (सुमित सिंह का इनपुट)

ये भी पढ़ें: 

Animal Vaccination: पशुओं को टीका लगवाने का ये है सही तरीका, इन 12 बातों का रखें खास ख्याल 
US-Iran Conflict: युद्ध के असर से भारत के खाद्य तेल और उर्वरक आयात पर संकट! कृषि निर्यात पर भी पड़ेगा बुरा असर

MORE NEWS

Read more!