गांवों में कमाई घटी, निवेश भी कमजोर... NABARD सर्वे में कर्ज से लेकर इंफ्रास्‍टक्‍चर तक पर ये जानकारी आई सामने

गांवों में कमाई घटी, निवेश भी कमजोर... NABARD सर्वे में कर्ज से लेकर इंफ्रास्‍टक्‍चर तक पर ये जानकारी आई सामने

NABARD सर्वे के मुताबिक गांवों में आय वृद्धि घटकर 32% के निचले स्तर पर आ गई है और निवेश भी कमजोर हुआ है. खर्च में हल्की तेजी दिखी है लेकिन बचत दबाव में है. अल्पकालिक उम्मीद कमजोर हुई है, जबकि महंगाई में राहत और लंबी अवधि की उम्मीद बनी हुई है.

Nabard Rural SurveyNabard Rural Survey
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 28, 2026,
  • Updated Mar 28, 2026, 9:12 PM IST

देश के गांवों में आर्थिक सुस्ती का असर साफ दिखाई दे रहा है. यह जानकारी नाबार्ड (NABARD) की Rural Economic Conditions and Sentiments Survey के दसवें दौर (मार्च 2026) में सामने आई है. यह सर्वे फरवरी के आखिरी दिनों और मार्च के पहले हफ्ते में किया गया था. सर्वे के मुताबिक, पिछले एक साल में केवल 32 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ी, जो इस सर्वे की शुरुआत के बाद का सबसे निचला स्तर है.वहीं, आय के साथ निवेश में भी गिरावट दर्ज की गई है. पश्चिम एशिया में 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए संघर्ष और कृषि क्षेत्र में मंदी ने ग्रामीण भावनाओं को प्रभावित किया है. 

आय की रफ्तार थमी

सरकार के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, कृषि और संबद्ध क्षेत्र की वास्तविक GVA वृद्धि 2024-25 के 4.9 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 2.4 प्रतिशत रह गई. nominal GVA वृद्धि 9 प्रतिशत से घटकर 0.6 प्रतिशत पर आ गई. इसका सीधा असर ग्रामीण आय पर पड़ा. जिन परिवारों की आय बढ़ी, उनकी औसत बढ़ोतरी भी घटकर 10.9 प्रतिशत रह गई, जो सितंबर 2024 में 13.9 प्रतिशत थी. NielsenIQ के आंकड़े भी बताते हैं कि Q3:2025-26 में ग्रामीण FMCG बिक्री की रफ्तार कमजोर पड़ी.

खर्च में हल्की वापसी दिखी

कमाई की कमजोरी के बावजूद उपभोग में हल्की वापसी दिखी. 76.7 प्रतिशत परिवारों ने खर्च बढ़ने की बात कही, जो जनवरी 2026 के 73 प्रतिशत से अधिक है. मासिक आय का 67.3 प्रतिशत हिस्सा खर्च में जा रहा है. खाने पर खर्च का हिस्सा बढ़कर 56.7 प्रतिशत हो गया, जो घटती खाद्य महंगाई का संकेत देता है. इसके साथ बचत पर दबाव बना हुआ है. बचत का नेट रिस्‍पॉन्‍स -9.3 प्रतिशत रहा, यानी बचत बढ़ाने वालों से अधिक घटाने वाले हैं.

निवेश में तेज गिरावट देखी गई

रिपोर्ट के मुताबिक, पूंजी निवेश के मोर्चे पर स्थिति और कमजोर हुई है. निवेश बढ़ाने वाले परिवारों का प्रतिशत 28 से घटकर 24.8 रह गया. वहीं, निवेश घटाने वालों की संख्या बढ़कर 17.1 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो इस सर्वे का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. अनिश्चित माहौल में ग्रामीण परिवार जोखिम लेने से बच रहे हैं.

भविष्य की उम्मीद कमजोर

अगले तीन महीनों को लेकर ग्रामीण परिवारों का भरोसा कमजोर हुआ है. रोजगार में सुधार की उम्मीद रखने वाले परिवार घटकर 41.7 प्रतिशत रह गए. 53.3 प्रतिशत परिवारों को लगता है कि हालात में कोई बदलाव नहीं होगा, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. आय में सुधार की उम्मीद भी 47.3 प्रतिशत से घटकर 46.3 प्रतिशत रह गई.

हालांकि, एक साल की अवधि को लेकर स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है. 69.5 प्रतिशत परिवारों को उम्मीद है कि उनकी आय बढ़ेगी. 5 प्रतिशत से भी कम परिवारों को आय घटने का अंदेशा है.

महंगाई से राहत, कर्ज अभी भी महंगा

महंगाई के मोर्चे पर राहत के संकेत हैं. मौजूदा महंगाई का मीडियन अनुमान घटकर 2.1 प्रतिशत रह गया, जो सर्वे का सबसे निचला स्तर है. 91 प्रतिशत परिवारों को अगली तिमाही में महंगाई 5 प्रतिशत से नीचे रहने की उम्मीद है.

कर्ज के मामले में 51.2 प्रतिशत परिवार केवल औपचारिक स्रोतों से उधार ले रहे हैं. हालांकि यह हिस्सा पहले की तुलना में कुछ कम हुआ है. अनौपचारिक स्रोतों से कर्ज पर ब्याज दर 17-18 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है.

ग्रामीणों ने इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की बात कही

करीब 75.5 प्रतिशत परिवारों ने ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार महसूस किया. सड़कों को 45.5 प्रतिशत परिवारों ने सबसे बेहतर क्षेत्र माना. इसके बाद शिक्षा 12.1 प्रतिशत और बिजली 10.1 प्रतिशत के साथ अगले स्थान पर रहे.

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