Sugar Production: चीनी की बढ़ती मांग ने बढ़ाई टेंशन, क्‍या निर्यात और इथेनॉल पर लगेगी लगाम?

Sugar Production: चीनी की बढ़ती मांग ने बढ़ाई टेंशन, क्‍या निर्यात और इथेनॉल पर लगेगी लगाम?

देश में 2026-27 के लिए गन्‍ना रकबा लगभग पिछले साल के बराबर रहने का अनुमान है, लेकिन चीनी की बढ़ती खपत और घटते समापन भंडार ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे संकेत हैं कि घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए निर्यात और इथेनॉल डायवर्जन पर सख्त नजर रखी जा सकती है.

Sugar Production and consumption India Sugar Production and consumption India
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 09, 2026,
  • Updated Jun 09, 2026, 12:41 PM IST

देश में 2026-27 सीजन के लिए गन्‍ने की बुवाई अंतिम चरण में पहुंच रही है और शुरुआती संकेत बताते हैं कि कुल रकबा लगभग पिछले साल के स्तर पर ही रहने वाला है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जून के पहले हफ्ते तक देश में करीब 54.1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्‍ना बोया जा चुका है, जो पिछले वर्ष के समान अवधि के मुकाबले मामूली रूप से कम है. वहीं, पूरे सीजन में कुल रकबा करीब 58.5 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने का अनुमान है. इसका मतलब है कि उत्पादन क्षमता में फिलहाल कोई बड़ा विस्तार दिखाई नहीं दे रहा है.

बुवाई में उत्तर प्रदेश सबसे आगे

राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश अब भी देश का सबसे बड़ा गन्‍ना उत्पादक बना हुआ है. यहां बुवाई करीब 28 लाख हेक्टेयर के आसपास बनी हुई है और इसमें पिछले साल की तुलना में खास बदलाव नहीं दिखा. दूसरी तरफ महाराष्ट्र में रकबे में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह करीब 11.8 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा है. वहीं, कर्नाटक में मामूली गिरावट देखने को मिली है और वहां बुवाई लगभग 4.3 लाख हेक्टेयर रही. फिलहाल बड़े उत्पादक राज्यों से ऐसा कोई संकेत नहीं मिल रहा है कि इस बार उत्पादन क्षमता में तेज उछाल आएगा.

चीनी की मांग बढ़ने से स्‍टॉक पर दबाव

वर्तमान में गन्‍ना क्षेत्र स्थिर बना हुआ है, लेकिन चीनी क्षेत्र की बड़ी चिंता डिमांड और उपलब्धता के बीच बढ़ता अंतर है. केंद्र सरकार ने चालू सीजन के शुरुआती छह महीनों के लिए घरेलू बाजार में 133 लाख टन चीनी उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन मिलों से निकासी के आंकड़े बताते हैं कि वास्तविक खपत इससे अधिक रही. अनुमान है कि पूरे सीजन में देश की चीनी खपत 285 से 290 लाख टन तक पहुंच सकती है. दूसरी ओर 2025-26 चक्र में शुद्ध उत्पादन 280 लाख टन से नीचे रहने की संभावना जताई जा रही है.

अगले सीजन के लिए बफर स्टॉक घटने की आशंका

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताब‍िक, उद्योग से जुड़े आकलनों के हिसाब से उत्पादन और खपत के मौजूदा रुझान बने रहे तो अगले सीजन की शुरुआत कम स्‍टॉक के साथ हो सकती है. अनुमान है कि 30 सितंबर तक समापन स्टॉक घटकर करीब 35 से 39 लाख टन रह सकता है, जबकि पिछले साल यह स्तर करीब 49 लाख टन था. ऐसे में बाजार में आपूर्ति संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए चुनौती बन सकता है.

निर्यात और इथेनॉल नीति पर सख्ती संभव

कम होते स्टॉक के बीच सरकार के सामने प्राथमिकता घरेलू बाजार को पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराना होगी. हाल के समय में सरकार ने चीनी निर्यात की अनुमति को सीमित रखा और तय आवंटन के मुकाबले कम मात्रा ही बाहर जा सकी. उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि अगर अगले सीजन में शुरुआती स्टॉक कमजोर रहता है तो निर्यात बढ़ाने की संभावना सीमित रहेगी. साथ ही इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्जन पर भी दबाव रह सकता है.

मॉनसून की चाल तय करेगी आगे का रुख

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के मध्य और पूर्वी हिस्सों के साथ बिहार जैसे क्षेत्रों में गन्‍ना उत्पादन काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर करेगा. अगर बारिश सामान्य से कमजोर रहती है तो उत्पादन अनुमान पर असर पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति, उत्पादन प्रगति और चीनी की मांग तीनों मिलकर सरकार की आगे की नीति तय करेंगे.

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