
देश में हर साल बाढ़ और भारी बारिश के कारण किसानों की लाखों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो जाती है. कई बार खेतों में इतना पानी भर जाता है कि किसानों को समय रहते इसकी जानकारी भी नहीं मिल पाती. लेकिन अब इस समस्या का समाधान तकनीक के जरिए संभव हो सकता है. झारखंड के धनबाद स्थित DAV कोयला नगर के छात्रों ने एक ऐसा AI और IoT आधारित Smart Crop Survival System तैयार किया है, जो खेत में जरूरत से ज्यादा पानी जमा होने पर खुद पहचान करेगा और अतिरिक्त पानी निकालने के लिए पंप अपने आप चालू कर देगा. इस तकनीक से किसानों को जलभराव से फसल बचाने में बड़ी मदद मिल सकती है.
इस अनोखे प्रोजेक्ट को DAV कोयला नगर की कक्षा 10 की छात्रा अंकिता श्रीवास्तव और कक्षा 9 के छात्र रौनक कुमार व अनन्या कुमारी ने मिलकर तैयार किया है. इस प्रोजेक्ट में अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी शिक्षक बीके सिंह ने उनका मार्गदर्शन किया. छात्रों का कहना है कि पिछले साल कई राज्यों में बारिश और जलभराव से फसल खराब होने की खबरों को देखकर उनके मन में यह विचार आया. इसके बाद उन्होंने इस समस्या का तकनीकी समाधान खोजने के लिए रिसर्च शुरू की और करीब एक महीने की मेहनत के बाद यह सिस्टम तैयार किया.
इस सिस्टम में पूरे खेत को चार हिस्सों यानी चार जोन में बांटा गया है. हर जोन में Soil Moisture Sensor लगाया गया है, जो लगातार मिट्टी में पानी की मात्रा पर नजर रखता है. जैसे ही किसी हिस्से में पानी तय सीमा से अधिक हो जाता है, सिस्टम तुरंत अलर्ट भेजता है और उसी क्षेत्र का पंप अपने आप चालू होकर अतिरिक्त पानी बाहर निकाल देता है.
अगर पूरे खेत में बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है, तो चारों पंप एक साथ चालू हो जाते हैं. इससे खेत में पानी लंबे समय तक जमा नहीं रहता और फसल को नुकसान होने की संभावना काफी कम हो जाती है.
इस स्मार्ट सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान खेत पर मौजूद रहे बिना भी उसकी पूरी जानकारी अपने मोबाइल पर देख सकता है. इसमें Arduino Uno मुख्य कंट्रोलर के रूप में काम करता है, जबकि NodeMCU Gateway इंटरनेट के जरिए डेटा को क्लाउड और मोबाइल ऐप तक पहुंचाता है.
सिस्टम में ESP32 Camera भी लगाया गया है, जिसकी मदद से किसान मोबाइल पर खेत की लाइव तस्वीर देख सकता है. यदि जरूरत हो तो किसान मोबाइल से ही पंप को चालू या बंद भी कर सकता है. इससे समय की बचत होगी और हर समय खेत पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास तकनीक Digital Twin Technology है. इसका मतलब है कि खेत का एक डिजिटल मॉडल तैयार किया गया है, जो वास्तविक खेत से मिलने वाले डेटा के अनुसार लगातार अपडेट होता रहता है.
सिस्टम में मल्टी-लेयर इंटेलिजेंट लॉजिक भी लगाया गया है. पहले यह चेतावनी देता है और यदि पानी का खतरा 80 प्रतिशत से अधिक हो जाता है तो सिस्टम अपने आप Emergency Mode में चला जाता है और तुरंत पानी निकालने की प्रक्रिया शुरू कर देता है.
छात्रा अंकिता श्रीवास्तव ने बताया कि इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसका टू-वे वेरिफिकेशन सिस्टम है. केवल सेंसर के आधार पर फैसला नहीं लिया जाता, बल्कि खेत में लगे कैमरे से मिलने वाली तस्वीरों की भी जांच की जाती है. जब दोनों से यह पुष्टि हो जाती है कि खेत में जरूरत से ज्यादा पानी है, तभी सिस्टम पंप चालू करता है.
उन्होंने बताया कि भविष्य में इस तकनीक के जरिए अतिरिक्त पानी को दूसरे खेतों या उन क्षेत्रों में भेजा जा सकेगा, जहां पानी की जरूरत होगी. इससे पानी की बर्बादी भी रुकेगी और उसका बेहतर उपयोग हो सकेगा.
छात्रा अनन्या कुमारी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में लगभग 15 हजार रुपये का खर्च आया है. उनका कहना है कि यह सिस्टम ज्यादा महंगा नहीं है और भविष्य में बड़े स्तर पर तैयार होने के बाद इसकी लागत और कम हो सकती है. इसमें Rain Sensor भी लगाया गया है, जो बारिश की मात्रा और तीव्रता को मापता है. उसी के आधार पर सिस्टम तय करता है कि पंप कब चलाना है.
उनके अनुसार इस तकनीक का फायदा सिर्फ किसानों को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को मिलेगा क्योंकि फसल सुरक्षित रहेगी और खाद्यान्न उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा.
रौनक कुमार ने बताया कि इस सिस्टम में Arduino Uno, ESP8266 Wi-Fi Module, Rain Sensor, Soil Moisture Sensor, ESP32 Camera और Matrix Display जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है.
अगर किसी कारण से इंटरनेट बंद हो जाए, तब भी किसान Matrix Display पर खेत की जरूरी जानकारी देख सकता है. यानी इंटरनेट न होने की स्थिति में भी सिस्टम काम करता रहेगा और किसान खेत की स्थिति जान सकेगा.
छात्रों का कहना है कि आने वाले समय में इस सिस्टम को AI आधारित मौसम पूर्वानुमान, सोलर एनर्जी, LoRaWAN नेटवर्क, ड्रोन और सैटेलाइट डेटा से भी जोड़ा जा सकता है. इससे यह पहले से अधिक सटीक तरीके से मौसम और जलभराव का अनुमान लगाकर किसानों को समय रहते चेतावनी दे सकेगा.
अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी शिक्षक बीके सिंह का कहना है कि इस डिवाइस का उद्देश्य किसानों की फसल को जलभराव से बचाना है. सिस्टम लगातार खेत की निगरानी करता रहेगा, किसान को मोबाइल पर सूचना भेजेगा और जरूरत पड़ने पर अपने आप अतिरिक्त पानी बाहर निकाल देगा. इससे किसानों को हर समय खेत पर जाकर पानी की जांच नहीं करनी पड़ेगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की तकनीक बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचती है, तो बाढ़ और अनियमित बारिश से होने वाले फसल नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. यह इनोवेशन केवल एक स्कूल प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भविष्य की स्मार्ट खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. (सिथुन मोदक की रिपोर्ट)
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