
गुजरात के राजकोट में किसानों ने बिजली के पोल और बिजली लाइनों के लिए मिलने वाले मुआवजे के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. कांग्रेस की अगुवाई में बड़ी संख्या में किसान राजकोट कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की. किसानों का आरोप है कि राज्य सरकार ने बिजली के पोल लगाने से प्रभावित किसानों को 200 प्रतिशत मुआवजा देने का प्रावधान किया है, लेकिन इसका फायदा केवल कुछ ही किसानों को मिल रहा है. ज्यादातर किसान इस लाभ से वंचित हैं.
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से जारी किए गए परिपत्र में कई ऐसी कमियां हैं, जिनके कारण किसानों को सही मुआवजा नहीं मिल पा रहा है. किसानों के मुताबिक, सरकार ने जिन वैल्यूअर (जमीन की कीमत तय करने वाले विशेषज्ञ) की व्यवस्था बताई है, वे केवल गैर-कृषि यानी एनए जमीन का मूल्यांकन कर सकते हैं. ऐसे वैल्यूअर कृषि भूमि की सही कीमत तय करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं.
किसानों का कहना है कि खेती की जमीन का मूल्यांकन अलग तरीके से होना चाहिए, क्योंकि कृषि भूमि से किसान की रोजी-रोटी जुड़ी होती है. लेकिन सरकार ने अभी तक कृषि भूमि का मूल्यांकन करने के लिए कोई अधिकृत वैल्यूअर नियुक्त नहीं किया है. इसके बावजूद किसानों से वैल्यूअर की रिपोर्ट मांगी जा रही है. किसानों ने सवाल उठाया कि जब सरकार ने कोई अधिकृत व्यवस्था नहीं बनाई है, तो किसान वैल्यूअर कहां से लाएं.
राजकोट कलेक्टर कार्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन में किसानों ने कई पोस्टर और बैनर दिखाए. इनमें सरकार और बिजली कंपनियों के खिलाफ नाराजगी जाहिर की गई. किसानों ने लिखा कि “किसानों की छाती पर बिजली के पोल खड़े करना बंद करो” और “एक बिजली पोल पर किसानों को 2 करोड़ रुपये मुआवजा दो.”
इसके अलावा किसानों ने “परिपत्र का मायाजाल, किसानों के लिए बना काल”, “बिजली कंपनियों की चांदी, किसानों पर भारी मार” और “गांव मेरा, खेत मेरा और फसल मेरी, फिर उसमें तुम्हारी बिजली की लाइन क्यों?” जैसे नारे भी लगाए. किसानों का कहना था कि बिजली कंपनियां बिजली बेचकर कारोबार करती हैं, इसलिए जिन किसानों की जमीन पर बिजली के पोल और लाइनें लगाई जाती हैं, उन्हें भी उचित लाभ मिलना चाहिए.
कांग्रेस किसान नेता पाल आंबलिया ने प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि गुजरात हाईकोर्ट के हालिया फैसले में साफ कहा गया है कि गैर-कृषि जमीन का मूल्य तय करने वाला व्यक्ति कृषि भूमि का मूल्यांकन नहीं कर सकता. इसी तरह कृषि भूमि का मूल्यांकन करने वाला व्यक्ति गैर-कृषि जमीन का मूल्यांकन नहीं कर सकता.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अभी तक कृषि भूमि के लिए एक भी अधिकृत वैल्यूअर घोषित नहीं किया है. इसके बावजूद किसानों को वैल्यूअर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी जा रही है. उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था किसानों के साथ अन्याय है और इसे तुरंत बदला जाना चाहिए.
किसानों ने राजकोट कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर बिजली के पोल के मुआवजे से जुड़े परिपत्र को रद्द करने की मांग की है. किसानों का कहना है कि जब तक सरकार सही प्रक्रिया और कृषि भूमि के लिए उचित मूल्यांकन व्यवस्था नहीं बनाती, तब तक किसानों को न्याय नहीं मिलेगा.
किसानों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे. उनका कहना है कि विकास के नाम पर किसानों की जमीन और फसल का नुकसान नहीं होना चाहिए और उन्हें उनके अधिकार के अनुसार उचित मुआवजा मिलना चाहिए.
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