पानी पीने को तरसा बीड, तालाबों में गड्ढे खोदने को मजबूर लोग, 81 जलाशय सूखे

पानी पीने को तरसा बीड, तालाबों में गड्ढे खोदने को मजबूर लोग, 81 जलाशय सूखे

महाराष्ट्र के बीड जिले में अल नीनो और कमजोर मॉनसून के कारण भीषण जल संकट गहरा गया है. जिले के 81 जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि कई परियोजनाएं डेड स्टोरेज में पहुंच गई हैं. ग्रामीणों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. प्रशासन टैंकरों और निजी कुओं के सहारे राहत पहुंचाने में जुटा है.

बीड में पानी को लेकर हाहाकारबीड में पानी को लेकर हाहाकार
रोहिदास हातागले
  • Beed,
  • Jun 22, 2026,
  • Updated Jun 22, 2026, 9:27 AM IST

महाराष्ट्र के बीड जिले में इस समय भीषण जल संकट देखने को मिल रहा है. जून का आधा महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक अच्छी बारिश नहीं हुई है. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो (El Niño) के प्रभाव और मॉनसून की धीमी रफ्तार के कारण जिले में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है. इसका सीधा असर जलाशयों, किसानों और आम लोगों पर पड़ रहा है. खेत सूख रहे हैं और पीने के पानी की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है.

जल परियोजनाओं में तेजी से घट रहा पानी

बीड जिले में कुल 173 मध्यम और लघु जल परियोजनाएं हैं. इनमें अब केवल 16.11 प्रतिशत उपयोगी जल भंडार ही बचा है. यह स्थिति प्रशासन और ग्रामीणों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है. सबसे गंभीर बात यह है कि जिले की 79 लघु जल परियोजनाएं डेड स्टोरेज यानी मृत जल भंडार की स्थिति में पहुंच चुकी हैं. वहीं 81 जलाशय पूरी तरह सूख गए हैं. सिर्फ 13 परियोजनाओं में ही थोड़ा बहुत पानी बचा हुआ है.

जलाशयों में पानी का स्तर लगातार गिर रहा है. कुंडलीका जलाशय में 33.51 प्रतिशत पानी बचा है, जबकि सरस्वती में 29.82 प्रतिशत और वाण परियोजना में 27.34 प्रतिशत जल भंडार मौजूद है. वहीं तलवार और रूटी जैसे जलाशयों में पानी लगभग समाप्त हो चुका है और वहां क्रमशः केवल 0.61 प्रतिशत और 0.31 प्रतिशत पानी ही बचा है.

पानी के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीण

जिले के कई गांवों में हालात बेहद खराब हो चुके हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग सूखे तालाबों के बीच गड्ढे खोदकर पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं. कई क्षेत्रों में महिलाओं और बुजुर्गों को पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है. किसानों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है क्योंकि खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है.

प्रशासन ने शुरू किए राहत कार्य

जल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं. वर्तमान में 12 गांवों और 14 बस्तियों में 19 टैंकरों के माध्यम से पीने के पानी की आपूर्ति की जा रही है. इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 109 गांवों में 221 निजी कुओं का अधिग्रहण किया गया है. प्रशासन का कहना है कि लोगों को किसी भी स्थिति में पीने के पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी.

पानी चोरी करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

बीड के जिलाधिकारी ने जल संकट को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने कहा है कि जिले के कई जलाशय डेड स्टोरेज की स्थिति में पहुंच चुके हैं, इसलिए पानी की हर बूंद बेहद कीमती है. प्रशासन ने जल संरक्षण विभाग, बिजली विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ कई बैठकें की हैं. अवैध रूप से पानी चोरी रोकने के लिए संबंधित क्षेत्रों की बिजली काटने के निर्देश भी दिए गए हैं. यदि कोई व्यक्ति पानी की चोरी करते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी.

अच्छी बारिश ही बन सकती है समाधान

बीड जिले में बढ़ता जल संकट अब गंभीर रूप ले चुका है. यदि जल्द ही अच्छी और लगातार बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी खराब हो सकती है. किसानों की उम्मीदें आसमान की ओर टिकी हैं और आम नागरिक भी मॉनसून के सक्रिय होने का इंतजार कर रहे हैं. फिलहाल जिले को इस संकट से बाहर निकालने का सबसे बड़ा और प्रभावी समाधान अच्छी बारिश ही मानी जा रही है.

ये भी पढ़ें: 

PMFME Yojana: 27 लाख के लोन से जयप्रकाश ने खड़ी की ‘दूध गंगा डेयरी’, 20 युवाओं को मिला रोजगार
UP: भीषण गर्मी के बीच जल संकट से निपटने के लिए CM योगी ने बुलाई हाईलेवल मीटिंग, दिए ये निर्देश

MORE NEWS

Read more!