
नई दिल्ली में राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के तहत गठित राष्ट्रीय स्तरीय नीति कार्यान्वयन और निगरानी समिति की पहली बैठक आयोजित की गई. बैठक में नीति को देशभर में प्रभावी तरीके से लागू करने और सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा हुई. बैठक की अध्यक्षता सहकारिता मंत्रालय के सचिव एवं समिति के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने की. बैठक में राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय मंत्रालयों, राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया.
बैठक के दौरान राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए संस्थागत मजबूती, डिजिटल बदलाव, क्षमता निर्माण, सदस्यता विस्तार और समावेशी आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई. सरकार का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, व्यावसायिक रूप से प्रबंधित और सदस्य-केंद्रित बनाना है.
डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि मजबूत, पारदर्शी और आधुनिक सहकारी संस्थाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देंगी और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी. उन्होंने सभी हितधारकों से मिलकर नीति को सफल बनाने का आह्वान किया.
बैठक में राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के छह प्रमुख रणनीतिक स्तंभों पर विस्तार से चर्चा हुई. इनमें सहकारी क्षेत्र की बुनियाद मजबूत करना, संस्थाओं को प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार बनाना, नए क्षेत्रों में विस्तार करना, समावेशिता बढ़ाना और युवाओं को सहकारिता से जोड़ना शामिल रहा.
इसके साथ ही विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वित कार्ययोजना पर भी विचार किया गया. प्रमुख पहलों में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को बहुउद्देश्यीय सेवा केंद्रों के रूप में विकसित करना, हर जिले में मॉडल सहकारी गांव तैयार करना, पंचायत स्तर तक सहकारिता पहुंचाना, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों का विस्तार तथा डेटा आधारित प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना शामिल रहा.
बैठक में राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के कंप्यूटरीकरण, “त्रिभुवन” सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना और नई राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई. सरकार ने वर्ष 2035 तक सहकारी सदस्यता को 50 करोड़ तक पहुंचाने और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में सहकारी क्षेत्र के योगदान को तीन गुना बढ़ाने के लक्ष्य पर भी जोर दिया. इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, साइबर सुरक्षा, कौशल विकास, नवाचार और युवाओं की भागीदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करने की बात कही गई.