MSP की लीगल गारंटी नहीं बल्कि बीच का रास्ता निकालने की तैयारी में कमेटी, सदस्यों ने बनाया दबाव

MSP की लीगल गारंटी नहीं बल्कि बीच का रास्ता निकालने की तैयारी में कमेटी, सदस्यों ने बनाया दबाव

एमएसपी की लीगल गारंटी पर बनी कमेटी अब सीधे कानून की बजाय बीच का रास्ता तलाशती दिख रही है. मंडी के अंदर और बाहर दोनों जगह एमएसपी देने की व्यवस्था पर चर्चा तेज हुई. जानिए पूरी बातचीत का सार...

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ओम प्रकाश
  • Noida,
  • Feb 18, 2026,
  • Updated Feb 18, 2026, 10:11 PM IST

केंद्र सरकार की बनाई गई एमएसपी कमेटी के कई सदस्यों ने ऐसी व्यवस्था करने की वकालत की है, जिसमें मंडी के अंदर और बाहर दोनों जगह किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिले. अभी अगर फसल की गुणवत्ता तय मानकों पर खरी उतरती है तब सरकारी और सहकारी खरीद एजेंसियां मंडियों में फसलों की एमएसपी पर खरीद करती हैं, लेकिन मंडी के बाहर यानी निजी क्षेत्र के लिए यह व्यवस्था लागू नहीं है. कमेटी के सदस्य एमएसपी की लीगल गारंटी जैसी किसी व्यवस्था की बजाय बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में जुटे हुए हैं, ताकि किसानों के बीच उनकी इमेज खराब न हो. बुधवार को नई दिल्ली में हुई कमेटी की बैठक में यह बात निकल कर सामने आई है.

अब तक बेनतीजा रही सभी बैठकें

कमेटी के गठन 22 जुलाई 2022 से अब तक 7 बैठकें हो चुकी हैं. इसके अतिरिक्त, कमेटी की उप-समितियों की 35 बैठकें हुई हैं. लेकिन अभी इसके सदस्य किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं. साल 2024 में केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद कमेटी ने पहली बार बैठक की है. अगली बैठक मार्च में होगी.

किसान संगठनों की ओर से बनाए गए इसके सदस्य जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार करके सरकार को सौंपना चाहते हैं. क्योंकि कमेटी को बने काफी वक्त हो चुका है. उधर, एमएसपी की लीगल गारंटी की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा-गैर राजनीतिक की किसान जागृति यात्रा चल रही है.

एमएसपी पर बढ़ा दबाव

बहरहाल, लंबे समय बाद हुई कमेटी की बैठक हंगामेदार रही. क्योंकि इसमें शामिल ज्यादातर नौकरशाह नहीं चाहते कि मंडी के बाहर भी एमएसपी की व्यवस्था कायम की जाए. दरअसल अधिकारियों को तो किसानों के बीच जाकर जवाब नहीं देना है, लेकिन किसान नेताओं को किसानों के बीच में जाना है. जनता के बीच में जाना है.

इसलिए वह कोई ऐसा काम नहीं करना चाहते जिससे किसानों में या आम लोगों में उनकी आलोचना हो. इसलिए वह एमएसपी के मुद्दे पर बहुत सतर्क हैं. क्योंकि यह किसानों के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा है. दिन भर चली इस मीटिंग में नेचुरल फार्मिंग और क्रॉप डायवर्सिफिकेशन पर भी चर्चा हुई लेकिन एमएसपी का मुद्दा छाया रहा. 

कमेटी के जिन पांच सदस्यों ने पिछले दिनों फसलों का रिजर्व प्राइस घोषित करने के लिए अध्यक्ष पर दबाव बनाया था, वह इस बार भी इसी मुद्दे पर कायम रहे. सदस्यों ने कहा कि सरकार जो एमएसपी खुद तय करती है वह किसानों को मंडी के अंदर भी मिले और बाहर भी. देखना यह है कि कमेटी के अध्यक्ष सदस्यों की बात को मानते हैं या फिर वह कोई और रुख अपनाते हैं.

कब और क्यों बनी थी कमेटी

एमएसपी को लेकर कमेटी बनाने की घोषणा 19 नवंबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने के साथ ही हो गई थी. लेक‍िन  दिल्ली बॉर्डर पर बैठे आंदोलनकारी कुछ ल‍िख‍ित चाहते थे. इसके बाद 9 द‍िसंबर 2021 को तत्कालीन कृष‍ि सच‍िव संजय अग्रवाल ने क‍िसान संगठनों को एक पत्र जारी क‍िया, तब जाकर आंदोलनकारी क‍िसान द‍िल्ली बॉर्डर से वापस अपने घरों को गए थे. 

इस घोषणा के करीब आठ महीने बाद 12 जुलाई, 2022 को कमेटी के गठन का नोट‍िफ‍िकेशन आया. हालांक‍ि, सरकार ने इस कमेटी का चेयरमैन उन्हीं संजय अग्रवाल को बना द‍िया, ज‍िनके केंद्रीय कृष‍ि सच‍िव रहते तीन कृषि कानून लाए गए थे और 13 महीने लंबा क‍िसान आंदोलन चला था.

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