क्रॉप कैफेटेरिया मॉडल से बढ़ेगी किसानों की आमदनी, जालौन KVK में 45 उन्नत वैरायटी का प्रदर्शन

क्रॉप कैफेटेरिया मॉडल से बढ़ेगी किसानों की आमदनी, जालौन KVK में 45 उन्नत वैरायटी का प्रदर्शन

खेती से अच्छा उत्पादन लेने के लिए किसानों को अच्छी वैरायटी का बीज उपयोग करना जरूरी होता है. ऐसे में कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को क्रॉफ कैफेटेरिया के प्रदर्शन से उन्हें मदद करता है. इसमें हर सीजन में अलग-अलग फसलों की उन्नत किस्मों का प्रदर्शन किया जाता है.

crop cafeteriacrop cafeteria
धर्मेंद्र सिंह
  • Jalaun,
  • Feb 18, 2026,
  • Updated Feb 18, 2026, 1:02 PM IST

किसानों की आमदनी बढ़ाने में फसलों की उन्नत किस्मों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है. इसके बावजूद आज भी बड़ी संख्या में किसान परंपरागत बीजों पर निर्भर हैं. वहीं, जो किसान वैज्ञानिक सिफारिशों के अनुसार उन्नत वैरायटी अपनाते हैं, वे कम समय में अधिक उत्पादन लेकर अपनी आय दो से तीन गुना तक बढ़ाने में सफल हो रहे हैं

इसी उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, जालौन में ‘क्रॉप कैफेटेरिया’ का विशेष प्रदर्शन आयोजित किया गया. इस प्रदर्शन में कुल 45 प्रकार की फसलों और उनकी उन्नत किस्मों को शामिल किया गया है, ताकि किसान एक ही स्थान पर विभिन्न विकल्पों को देख-समझ सकें.

45 फसलों का एक साथ प्रदर्शन

क्रॉप कैफेटेरिया में मटर, मसूर, तिलहन, अलसी समेत कई रबी फसलों की उन्नत वैरायटी प्रदर्शित की गई हैं. विशेष रूप से गेहूं की 12 से 13 उन्नत किस्मों को शामिल किया गया है, ताकि किसान अपनी भूमि की स्थिति, सिंचाई सुविधा और बाजार की मांग के अनुसार सही चयन कर सकें.

मटर की उन्नत किस्मों पर विशेष फोकस

मटर की किस्मों में ‘काशी अगेती’ प्रमुख है, जो कम अवधि में तैयार होने वाली वैरायटी है. इसके अलावा भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित ‘काशी उदय’, ‘काशी मुक्ति’, ‘काशी समृद्धि’ और ‘काशी नंदिनी’ जैसी उन्नत किस्मों को भी प्रदर्शित किया गया है.

इन किस्मों की खासियत है कि ये लगभग 100 से 110 दिनों में तैयार हो जाती हैं और उच्च उत्पादन क्षमता रखती हैं, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिल सकता है.

गेहूं की उन्नत वैरायटी से बढ़ेगा उत्पादन

क्रॉप कैफेटेरिया में गेहूं की DW-187, DW-303, K-17, K-1616 और राज जैसी उन्नत किस्मों का प्रदर्शन किया गया है. वहीं, सूखे की स्थिति के लिए K-1317 वैरायटी को बेहतर विकल्प बताया गया है. इन किस्मों के प्रदर्शन से न सिर्फ उत्पादन में वृद्धि संभव है, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय इजाफा हो सकता है.

अलसी की JLS-79: सूखे का बेहतर विकल्प

अलसी की JLS-79 वैरायटी को विशेष रूप से सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बताया गया है. यह किस्म लगभग 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने में सक्षम है. अलसी के बीजों में मौजूद पोषक तत्वों और स्वास्थ्य लाभ के कारण बाजार में इसकी मांग और कीमत दोनों बेहतर मिलती हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिल रहा है.

सिंचाई से उत्पादन तक पूरी जानकारी

इस प्रदर्शन की खास बात यह है कि प्रत्येक वैरायटी के साथ उसकी विशेषताओं, आवश्यक सिंचाई, फसल अवधि और संभावित उत्पादन की विस्तृत जानकारी भी दी गई है. इससे किसान केवल बीज चयन ही नहीं, बल्कि पूरी फसल प्रबंधन तकनीक को भी समझ पा रहे हैं.

कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मुस्तफा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि फसल चयन करते समय जमीन की बनावट, पानी की उपलब्धता और बाजार की मांग का विशेष ध्यान रखना चाहिए. सही वैरायटी और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

‘क्रॉप कैफेटेरिया’ का यह प्रयास किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

MORE NEWS

Read more!