नीलगाय का आतंक आए दिन देश के कई राज्यों में बढ़ता जा रहा है. इससे किसान काफी परेशान हो गए हैं क्योंकि खेतों में नीलगाय के आतंक से फसलों का बहुत नुकसान होता है. वहीं, किसानों की अक्सर शिकायत रहती है कि उनकी फसलें नीलगाय खराब कर देती हैं, जिससे उनका आर्थिक तौर पर बेहद नुकसान हो जाता है, जिसे लेकर वो काफी चिंतित रहते हैं. कई किसान नुकसान से बचाव के लिए अपने खेतों में तारबंदी करते हैं. तो कई किसान फसल की रखवाली करने के लिए रात में खेत पर पहरा भी देते हैं. इसके बावजूद नीलगाय फसलों को बर्बाद कर देती हैं. ऐसे में आप अलग-अलग टिप्स को अपनाकर फसलों को नुकसान से बचा सकते हैं. इसके अलावा आज हम आपको नीलगाय के बारे में कुछ खास बातें बताने वाले हैं.
नीलगाय इन दिनों सुर्खियों में है. दरअसल नीलगाय एक ऐसा जानवर है जो भारत के कई हिस्सों में पाया जाता है. नर गाय का रंग नीला होता है इसलिए इसे नीलगाय कहते हैं. घोड़े की तरह दिखने वाला नीलगाय (नर) एक बड़ा ताकतवर जानवर है. इसेक शरीर की बनावट भले ही घोड़े के समान हो, लेकिन शरीर घोड़े की तरह तराशा हुआ नहीं होता. यानी घोड़े की तरह ये सुंदर नहीं दिखते हैं. आपको बता दें कि घोड़े को जहां भागते देखना बहुत सुंदर लगता है. वहीं, नर नीलगाय भागते समय अटपटा सा लगता है और रफ्तार भी कम होती है. इसकी वजह ये है कि इसके शरीर का पिछला हिस्सा अगले हिस्से से कम ऊंचा होता है.
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मोटा शरीर होने की वजह से नीलगाय बाघ और तेंदुए का आसानी शिकार बन जाते हैं. हालांकि बड़ा नर नीलगाय बाघ के भी छक्के छुड़ा देता है. इसके अलावा इसकी सबसे बड़ी खासियत ये होती है कि ऊंट की तरह नर नीलगाय भी बिना पानी पिए बहुत दिनों तक रह सकता है. इसके अलावा नीलगाय के आगे के पैर पिछले पैरों की तुलना में अधिक लंबे और मजबूत होते हैं. साथ ही नीलगाय की सूंघने और देखने की शक्ति तो अच्छी होती है, लेकिन उन्हें सुनाई कम देती है. मादा नीलगाय बहुत कम आवाज करती है और यह कभी-कभी भैंस के समान रंभाती है.
नीलगाय से फसलों को बचाने के लिए आप अपनी खेतों में पुरानी साड़ी का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा खेत की मेड़ों पर सुगंधित और आयुर्वेदिक पौधों को भी लगा सकते हैं. इसके साथ ही किसान मशीनों का भी उपयोग करके नीलगाय को अपने खेत से दूर रख सकते हैं. साथ ही अलग-अलग प्रकार का घोल बनाकर भी फसलों पर छिड़काव करके नीलगाय के आतंक से फसलों को बचा सकते हैं.