...ऐसे में तो बंद हो जाएगा खांडसारी उद्योग, ISMA के खिलाफ DGFT जाएंगे चीनी व्यापारी

...ऐसे में तो बंद हो जाएगा खांडसारी उद्योग, ISMA के खिलाफ DGFT जाएंगे चीनी व्यापारी

भारतीय हेरिटेज एसोसिएशन ऑफ खांडसारी और ट्रेडिशनल स्वीटनर्स इंडस्ट्री (भक्ति) ने खांडसारी शुगर इंडस्ट्री के हितों की रक्षा को लेकर अपनी आवाज उठाई है. भक्ति के व्यापारी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के अधिकारियों से मिलने वाले हैं. ये व्यापारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात करेंगे और अपने हितों की रक्षा की मांग उठाएंगे. व्यापारियों का कहना है कि खांडसारी का निर्यात रुक जाएगा तो इसका व्यापार नहीं बचेगा. ऐसे में देश के छोटे गन्ना किसान भी नहीं बचेंगे.

महाराष्ट्र की मिलें चीनी और इथेनॉल एमएसपी में बढ़ोतरी की मांग कर रही हैं.महाराष्ट्र की मिलें चीनी और इथेनॉल एमएसपी में बढ़ोतरी की मांग कर रही हैं.
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Nov 05, 2024,
  • Updated Nov 05, 2024, 1:20 PM IST

खांडसारी का उत्पादन करने वाले व्यापारी अपने बिजनेस को लेकर काफी जूझ रहे हैं. व्यापारियों का कहना है कि उन्हें खांडसारी के उत्पादन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. खांडसारी एक तरह की कच्ची सफेद चीनी होती है जो कि बिना रिफाइन किए बाजार में बिकती है.  व्यापारियों की यह चिंता ऐसे समय में सामने आई है जब चीनी बनाने वाली कंपनियों-मिलों के संघ इस्मा ने खांडसारी के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है. खांडसारी उद्योग इस्मा की प्रतिबंध वाली मांग का विरोध कर रहा है. इसके लिए उद्योग ने डीजीएफटी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की तैयारी की है.

भारतीय हेरिटेज एसोसिएशन ऑफ खांडसारी और ट्रेडिशनल स्वीटनर्स इंडस्ट्री (भक्ति) ने खांडसारी शुगर इंडस्ट्री के हितों की रक्षा को लेकर अपनी आवाज उठाई है. भक्ति के व्यापारी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के अधिकारियों से मिलने वाले हैं. ये व्यापारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात करेंगे और अपने हितों की रक्षा की मांग उठाएंगे. व्यापारियों का कहना है कि खांडसारी का निर्यात रुक जाएगा तो इसका व्यापार नहीं बचेगा. ऐसे में देश के छोटे गन्ना किसान भी नहीं बचेंगे.

खांडसारी उद्योग की शिकायत

ISMA ने हाल ही में DGFT से गन्ना सप्लाई पर चिंताओं का हवाला देते हुए खांडसारी चीनी पर निर्यात बैन लगाने का आग्रह किया. जवाब में भक्ति के महानिदेशक शशिकांत पंढरे ने 'बिजनेसलाइन' को बताया कि खांडसारी मिलें उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के छोटे गन्ना किसानों की आजीविका में बड़ी भूमिका निभाती हैं, जिनमें से कई किसान तत्काल नकदी की जरूरतों के लिए खांडसारी उद्योग पर निर्भर हैं. किसानों की इस मांग को बड़ी मिलें पूरी नहीं कर सकती हैं. पंढरे ने कहा, "खांडसारी एक छोटा उद्योग है जो किसानों की सेवा करता है और इसे बचाया जाना चाहिए," उन्होंने कहा कि ये पारंपरिक मिलें अक्सर किसानों को सरकार की ओर से निर्धारित उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) से अधिक भुगतान करती हैं.

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पंढरे ने एक्सपोर्ट बैन की मांग उठाने के लिए ISMA की आलोचना की और इसे "अनुचित" कहा. पंढेर ने जोर देकर कहा कि भक्ति DGFT अधिकारियों के साथ आगामी बैठकों में अपना रुख स्पष्ट करेंगे. इसके अलावा, एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करने की योजना बना रहा है, क्योंकि देश में सबसे अधिक खांडसारी कंपनियां यहां हैं. 

क्या कहते हैं व्यापारी

भक्ति ने बताया कि ISMA ने 2023-24 के फसल वर्ष में 5 लाख टन चीनी का निर्यात किया, लेकिन अब वह आधे से भी कम मात्रा के खांडसारी निर्यात का विरोध कर रहा है. एसोसिएशन ने ISMA के रुख को गतल बताया और बताया कि वह अतिरिक्त 20 लाख टन चीनी निर्यात करने की अनुमति के लिए पैरवी भी कर रहा है. भक्ति का तर्क है कि खांडसारी गन्ने के उत्पादन का 1 प्रतिशत से भी कम उपयोग करती है, जबकि चीनी मिलें 75 प्रतिशत का उपयोग करती हैं.

अकेले उत्तर प्रदेश में लगभग 270-280 खांडसारी इकाइयां हैं, जिन्हें सालाना 100-110 लाख टन गन्ने की जरूरत होती है, जबकि महाराष्ट्र की 10-15 इकाइयों का छोटा नेटवर्क लगभग 20-25 लाख टन गन्ने का उपयोग करता है. ISMA के अनुसार, गन्ने के इस डायवर्जन ने पहले से चल रही मिलों पर दबाव डाला है, जिससे उन्हें चलाने और उसके लाभ पर असर पड़ा है.

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ISMA ने चिंता जाहिर की कि पिछले चीनी सीजन (अक्टूबर 2023 से अगस्त 2024) के दौरान, खांडसारी इकाइयों ने लगभग 2.4 लाख टन चीनी का निर्यात किया, जबकि अन्य चीनी प्रकारों पर प्रतिबंध लगा दिया गया. एसोसिएशन का दावा है कि खांडसारी उत्पादक अक्सर किसानों को सरकार के FRP से कम भुगतान करते हैं, जिससे किसानों को घाटा होता है.

 

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