Drone technology: फसलों का नया रखवाला, ड्रोन तकनीक से खेती हुई बेहद आसान

Drone technology: फसलों का नया रखवाला, ड्रोन तकनीक से खेती हुई बेहद आसान

आज के बदलते मौसम और मजदूरों की भारी किल्लत के दौर में कृषि ड्रोन खेती के लिए बेहद फायदेमंद बन चुका है.यह आसमान से ही पूरे खेत की पल-पल की जानकारी जुटा लेता है. ड्रोन की मदद से जो छिड़काव घंटों में होता था, वह अब सिर्फ 10 से 15 मिनट में हो जाता है, जिससे मजदूरों की लागत में 70-80% तक की बड़ी बचत होती है। सबसे अच्छी बात यह है कि ड्रोन से खाद और कीटनाशकों का बिल्कुल सटीक छिड़काव होता है, जिससे रसायनों की बर्बादी रुकती है, पर्यावरण सुरक्षित रहता है और जहरीली दवाओं से किसानों की सेहत को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता

ड्रोन से स्मार्ट खेतीड्रोन से स्मार्ट खेती
जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Jun 15, 2026,
  • Updated Jun 15, 2026, 2:25 PM IST

आज के दौर में जब आबादी बढ़ रही है और मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है, ऐसे में पारंपरिक खेती में किसानों को कई बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. मजदूरों की भारी किल्लत  और बढ़ती लागत ने खेती को थोड़ा मुश्किल बना दिया है. इन तमाम परेशानियों का एक शानदार और आधुनिक हल बनकर उभरा है—कृषि ड्रोन। ड्रोन एक ऐसा उड़ने वाला रोबोट या उपकरण है, जिसे रिमोट कंट्रोल या कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से आसमान में उड़ाया जाता है. इसमें बेहतरीन कैमरे, जीपीएस  और खास सेंसर लगे होते हैं, जो सीधे आसमान से पूरे खेत की पल-पल की जानकारी इकट्ठा करते हैं. यह तकनीक हमारी पुरानी खेती के तौर-तरीकों को बदलकर उसे बेहद स्मार्ट और डिजिटल बना रही है. 

बदल रहा खेती का अंदाज़

ग्रामीण इलाकों से मजदूरों का लगातार पलायन हो रहा है, जिससे सही समय पर खेती के कामों के लिए मजदूर मिलना बहुत मुश्किल हो गया है. कृषि विशेषज्ञो के अनुसार ऐसे माहौल में ड्रोन तकनीक किसानों के लिए एक उम्मीद की किरणसाबित हो रही है. जहां एक एकड़ खेत में हाथ से दवा छिड़कने में घंटों लग जाते थे, वहीं एक आधुनिक कृषि ड्रोन सिर्फ 10 से 15 मिनट में पूरे एक एकड़ क्षेत्र में छिड़काव कर देता है. सबसे बड़ी बात यह है कि इससे किसानों की लेबर कॉस्ट में लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक की भारी कमी आती है. इस तरह किसानों का कीमती समय भी बचता है और उनका काम भी बेहद तेज और व्यवस्थित ढंग से पूरा हो जाता है. 

कीटनाशकों का सटीक छिड़काव

कृषि विशेषज्ञो के मुताबिक   पारंपरिक तरीकों से जब खेतों में कीटनाशक या खाद छिड़की जाती थी, तो बहुत सारा केमिकल बर्बाद हो जाता था और वह जमीन या पौधों पर बराबर मात्रा में नहीं गिरता था. इसके साथ ही, केमिकल के सीधे संपर्क में आने से मजदूरों की सेहत पर भी बहुत बुरा और जहरीला असर पड़ता था. लेकिन ड्रोन के इस्तेमाल से अब केमिकल और सूक्ष्म पोषक तत्वों का बिल्कुल सटीक और नियंत्रित छिड़काव मुमकिन हो गया है. पूरे खेत में एक समान दवा गिरने से फसलों की सेहत अच्छी रहती है, केमिकल की बर्बादी रुकती है और पर्यावरण का भी पूरा संरक्षण होता है. 

आसमान में 'डिजिटल आंख'

कृषि ड्रोन को आप सीधे तौर पर खेती के लिए 'आसमान में एक डिजिटल आंख' कह सकते हैं. इसमें लगे मल्टीस्पेक्ट्रल और थर्मल कैमरे जमीन पर लगे पौधों की हरियाली, उनकी ग्रोथ और उनके तनाव  को आसानी से भांप लेते हैं. अगर खेत के किसी हिस्से में कोई कीट-रोग लगा हो या पोषक तत्वों की कमी हो, तो ड्रोन की तस्वीरों से समय रहते उसका पता चल जाता है. इतना ही नहीं, इसके थर्मल सेंसर यह भी बता देते हैं कि खेत के किस हिस्से में पानी की कमी है. इससे किसान सिर्फ उसी जगह सिंचाई करते हैं जहां जरूरत हो, जिससे पानी और बिजली दोनों की बड़ी बचत होती है. इसके 2D और 3D नक्शों से खेत की ढाल और जमीन को समतल करने में भी बड़ी मदद मिलती है. 

कुछ मुश्किलें में सरकारी मदद जरूरत

बेशक ड्रोन तकनीक के फायदे बेमिसाल हैं,लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी खड़ी हैं. सबसे बड़ी दिक्कत इसकी ज्यादा कीमत है, जिसकी वजह से छोटे और गरीब किसानों के लिए इसे सीधे खरीदना थोड़ा मुश्किल होता है. इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की कमी, सीमित बैटरी बैकअप सिर्फ 20 से 60 मिनट की उड़ानऔर इसके संचालन के लिए जरूरी ट्रेनिंग का न होना भी बड़ी रुकावटें हैं. इन मुश्किलों को दूर करने के लिए भारत सरकार कई शानदार नीतियां और सब्सिडी योजनाएं चला रही है. अब गांवों में कस्टम हायरिंग सेंटर्स  और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के जरिए कम किराये पर ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि हर छोटा किसान भी इस तकनीक का फायदा उठा सके. 

ड्रोन दीदियों ने बदली गांव की तकदीर

 इस तकनीक से देश की 'ड्रोन दीदियां' एक नए इंकलाब में बदल रही हैं। इसकी सबसे खूबसूरत मिसाल छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की रहने वाली जागृति दीदी हैं, जो एक साधारण घरेलू महिला से मेहनत के दम पर पहले ' आज ड्रोन पायलट बनकर कृषि को नई दिशा दे रही हैं। इसी तरह जबलपुर की सुनीता दीदी और वाराणसी उत्तर प्रदेश की राधा दीदी  और अयोध्या,की  सबीना खातून जैसी हजारों आत्मनिर्भर महिलाएं आज खेतों में खुद ड्रोन उड़ाकर न सिर्फ शानदार कमाई कर रही हैं, बल्कि पुरानी खेती के तौर-तरीकों को बदलकर उसे बेहद स्मार्ट और डिजिटल बना रही हैं। इन ड्रोन दीदियों की कामयाबी यह साबित करती है कि जब ग्रामीण महिलाओं को सही हुनर और तकनीक मिलती है, तो वे पूरे समाज की तकदीर बदल सकती है.

AI तकनीक से खेती हुई बेहद आसान 

आने वाले वक्त में जब ड्रोन तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा जैसी तकनीकों के साथ पूरी तरह जुड़ जाएगी, तो खेती का पूरा ढांचा ही बदल जाएगा. तब ये ड्रोन खुद-ब-खुद फैसला ले सकेंगे कि किस पौधे को कितनी दवा या पानी चाहिए। फसलों में बीमारी आने से पहले ही चेतावनी मिल जाया करेगी और किसान अपनी उपज का सटीक अंदाजा लगाकर बाजार के हिसाब से अपनी फसल को सही दाम पर बेच सकेंगे. कुल मिलाकर कहें तो, अगर किसानों को सही ट्रेनिंग और सरकारी सहयोग मिलता रहा, तो ड्रोन तकनीक भारतीय कृषि में एक नया क्रांति लेकर आएगी, जिससे खेती घाटे का सौदा न रहकर एक बेहद लाभकारी और स्मार्ट जरिया बन जाएगी.

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