
केंद्रीय कैबिनेट ने जम्मू-कश्मीर में सुधमहादेव-ड्रंगा और सिंहपोरा-वैलू सुरंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है. इन दोनों रणनीतिक परियोजनाओं का उद्देश्य ऊंचाई वाले उन रास्तों का विकल्प तैयार करना है, जहां भूस्खलन और बर्फबारी के कारण अक्सर यातायात बाधित हो जाता है. परियोजनाओं के पूरा होने के बाद चेनानी, उधमपुर, डोडा, किश्तवाड़ और कश्मीर घाटी के बीच पूरे वर्ष बेहतर संपर्क सुनिश्चित होने की उम्मीद है. इन सुरंगों के बनने से यात्रा का समय कम होगा और लोगों को सुरक्षित और सुगम आवाजाही का फायदा मिलेगा. इससे व्यापार, पर्यटन और रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंच मजबूत होगी. साथ ही प्राकृतिक आपदाओं और खराब मौसम के दौरान भी संपर्क बनाए रखने में आसानी होगी.
प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद उधमपुर जिले की बश्त पंचायत सहित आसपास के कृषि क्षेत्रों में खुशी का माहौल है. यह इलाका सब्जी उत्पादन के लिए जाना जाता है. स्थानीय किसानों का कहना है कि लंबे समय से सर्दियों के दौरान सड़कें बंद होने की वजह से उनकी उपज समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच पाती थी, जिससे फसल खराब होने के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता था.
स्थानीय किसान बलराज चंद ने कहा कि क्षेत्र में बनी नई सड़क से पहले ही लोगों को काफी फायदा लाभ मिला है और अब सुरंग बनने से विकास को और रफ्तार मिलेगी. उन्होंने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि इस परियोजना के लिए करोड़ों रुपये मंजूर किए गए हैं. सुरंग बनने के बाद यात्रा का समय घटेगा, सफर ज्यादा आसान होगा और किसानों की सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद पहले से कहीं तेजी और आसानी से बाजार तक पहुंच सकेंगे. उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार भी जताया.
स्थानीय निवासी अर्जुन चंद ने कहा कि सड़क चौड़ी होने के बाद क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है, लेकिन सुरंग बनने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सर्दियों में होने वाली आवाजाही की दिक्कत काफी हद तक खत्म हो जाएगी. उनका कहना है कि वर्षों से बर्फबारी के कारण लोगों और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था, जिससे खेती और कारोबार दोनों प्रभावित होते थे.
वहीं, पूर्व सरपंच सुरिंदर सिंह ने कहा कि बश्त और आसपास के इलाके टमाटर, सेम और मौसमी हरी सब्जियों के बड़े उत्पादक क्षेत्र हैं. सुरंग बनने के बाद किसानों की उपज सीधे जम्मू और श्रीनगर की प्रमुख मंडियों तक आसानी से पहुंच सकेगी. इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी, किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी और परिवहन में होने वाली देरी से होने वाला नुकसान भी घटेगा.
सुरिंदर सिंह ने कहा कि परियोजना के निर्माण से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. इसके अलावा सड़क किनारे व्यापार, परिवहन, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र से जुड़े कारोबार को भी बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा कि अच्छी सड़क बनने के बाद किसानों को पहले ही नुकसान कम हुआ है और सुरंग बनने के बाद यह लाभ और बढ़ेगा. उन्होंने परियोजना को मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का धन्यवाद भी किया.
दोनों सुरंग परियोजनाएं जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय इलाकों में परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति देंगी. बेहतर कनेक्टिविटी से कृषि उपज की तेज ढुलाई, बाजारों तक सीधी पहुंच, रोजगार के अवसर और व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. (एएनआई)