
गुजरात में इस बार अक्टूबर महीने में भी गर्मी का असर बना हुआ है, इसका सीधा असर राज्य में बिजली की मांग पर पड़ रहा है. 16 अक्टूबर तक गुजरात में बिजली की अधिकतम मांग 29,822 मेगावाट दर्ज की गई, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा बताया गया है. पिछले साल अक्टूबर में यह मांग 21,822 मेगावाट थी. यानी एक साल में बिजली की अधिकतम मांग में 8,000 मेगावाट या करीब 36.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं. गुजरात के ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल की अध्यक्षता में ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स विभाग और बिजली कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई. इसमें बिजली की बढ़ती मांग, मौजूदा आपूर्ति और आने वाले महीनों में जरूरतों को पूरा करने की योजना पर चर्चा की गई. सरकार के मुताबिक, केंद्र के साथ बातचीत के बाद गुजरात को जल्द ही करीब 1,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की उम्मीद है.
आमतौर पर अक्टूबर में गर्मी कम होने लगती है. इसके साथ ही बिजली की मांग में भी गिरावट आती है. लेकिन इस साल अल नीनो के प्रभाव और लगातार अधिक तापमान के कारण स्थिति अलग बनी हुई है. आंकड़ों के मुताबिक, 16 अक्टूबर को गुजरात में एक दिन की बिजली खपत 574 मिलियन यूनिट रही. पिछले साल अक्टूबर में यह आंकड़ा 457 मिलियन यूनिट था. इस तरह बिजली की दैनिक खपत में करीब 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. गुजरात में आम लोगों को 24 घंटे बिजली मिलती है, जबकि किसानों को खेती के लिए निर्धारित 10 घंटों तक बिजली उपलब्ध कराई जाती है. फसलों की सिंचाई, घरों में कूलर और एयर कंडीशनर के इस्तेमाल और औद्योगिक गतिविधियों के कारण बिजली की जरूरत बढ़ गई है.
1. अल नीनो और बढ़ती गर्मी: इस साल मॉनसून कमजोर रहने के बावजूद तापमान अधिक बना हुआ है. इससे घरों, दुकानों और अन्य जगहों पर ठंडक के लिए बिजली का इस्तेमाल बढ़ा है.
2. खेती में बिजली की ज्यादा जरूरत: खड़ी फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को पर्याप्त बिजली दी जा रही है. सरकार के मुताबिक, कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग बढ़कर प्रतिदिन अधिकतम 12,000 मेगावाट तक पहुंच गई है.
3. त्योहारों का मौसम: नवरात्रि और दिवाली के आसपास बाजारों, दुकानों और उद्योगों में गतिविधियां बढ़ने से बिजली की जरूरत भी बढ़ती है.
4. हाइड्रो और पवन ऊर्जा का उत्पादन कम: कम बारिश के कारण जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ है. वहीं, हवा की गति कम रहने से पवन ऊर्जा से भी अपेक्षा के मुताबिक बिजली नहीं मिल पा रही है.
शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक बिजली की मांग पूरी करना खास चुनौती बन जाता है. सूर्यास्त के बाद सौर ऊर्जा का उत्पादन बंद हो जाता है, जबकि पवन ऊर्जा से मिलने वाली बिजली भी हवा की गति पर निर्भर करती है. ऐसे में मांग पूरी करने के लिए कोयला और गैस आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता बढ़ जाती है. राज्य लोड डिस्पैच सेंटर और बिजली वितरण कंपनियां बिजली की आपूर्ति और ग्रिड का संतुलन बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रही हैं.
बिजली की बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए गुजरात सरकार ने केंद्र के साथ समन्वय बढ़ाया है. गुजरात राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (GSECL) के बिजली संयंत्रों के लिए पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराने के संबंध में दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठकें की गईं. सरकार के मुताबिक, कोयला मंत्रालय ने नवंबर तक प्रतिदिन 10 से 11 रेलवे रैक और नवंबर से प्रतिदिन 13 से 14 रैक कोयले की आपूर्ति करने का आश्वासन दिया है. इससे राज्य के बिजली संयंत्रों को चलाने के लिए जरूरी ईंधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. इसके अलावा, बिजली संयंत्रों में उपलब्ध कोयले और दूसरे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
राज्य सरकार ने आने वाले महीनों में बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए कई व्यवस्थाएं की हैं.
- NTPC के फरक्का संयंत्र से: नवंबर महीने के लिए 379 मेगावाट बिजली की व्यवस्था की गई है.
- असम के हिस्से से: केंद्र सरकार के बिजली उत्पादन में असम राज्य के हिस्से से लंबी अवधि के लिए 500 मेगावाट बिजली मिलने की व्यवस्था की गई है.
- केंद्र के अतिरिक्त बिजली कोटे से: आवंटित नहीं की गई बिजली में से गुजरात के लिए 500 मेगावाट का आवंटन मंजूर किया गया है.
- अल्पकालिक बिजली अनुबंध: अक्टूबर के लिए 2,990 मेगावाट, नवंबर के लिए 1,740 मेगावाट और दिसंबर के लिए 1,335 मेगावाट बिजली के अनुबंध किए गए हैं.
सरकार को उम्मीद है कि इन इंतजामों से बढ़ती मांग के बीच बिजली की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी. (ब्रिजेश दोषी की रिपोर्ट)