
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के मुताबिक, 15 जनवरी 2026 तक, पूरे भारत में चीनी उत्पादन 159.09 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी अवधि के 130.44 लाख टन की तुलना में लगभग 22% की वृद्धि दिखाता है. चालू चीनी मिलों की संख्या में भी थोड़ी वृद्धि हुई है. मौजूदा समय में देश में 518 मिलें पेराई कर रही हैं, जबकि पिछले सीजन में इसी समय 500 मिलें चल रही थीं. इस तरह पिछले साल से 18 चीनी मिलें अभी ऑपरेशनल हैं जिससे चीनी का उत्पादन और बढ़ने की संभावना है.
| राज्य | चीनी उत्पादन (लाख टन) |
| यूपी | 46.05 |
| महाराष्ट्र | 64.50 |
| कर्नाटक | 31.05 |
| गुजरात | 3.86 |
| तमिलनाडु | 11.78 |
उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा की सरकारों द्वारा गन्ने की कीमतों में वृद्धि के बाद, बिहार सरकार ने भी हाल ही में गन्ने की कीमत (SAP) में 15 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि करके 380 रुपये प्रति क्विंटल (जल्दी पकने वाली किस्म के लिए) कर दिया है. इस्मा ने कहा है, गन्ने के दाम में वृद्धि से किसानों को मदद मिलती है, लेकिन बढ़ते चीनी उत्पादन लागत और गिरती एक्स-मिल चीनी कीमतों के बीच बढ़ता अंतर मिलों और गन्ने के भुगतान पर लगातार दबाव डाल रहा है.
इस्मा के मुताबिक, महाराष्ट्र और कर्नाटक में एक्स-मिल चीनी की कीमतें और गिरकर लगभग 3,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं, जो चीनी उत्पादन की मौजूदा लागत से काफी कम हैं. जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ रहा है और चीनी का स्टॉक बढ़ता जा रहा है. ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि गन्ने के पेमेंट का बकाया बढ़ना शुरू हो गया है और अगर मौजूदा बाजार की स्थिति बनी रही तो यह और बढ़ सकता है.
इस्मा ने कहा है, गन्ने की कीमतों और चीनी की बिक्री से होने वाली कमाई के बीच लगातार बेमेल होने के कारण इंडस्ट्री को बढ़ते ऑपरेशनल और कैश-फ्लो तनाव का सामना करना पड़ रहा है. इसे देखते हुए उत्पादन लागत में बढ़ोतरी के हिसाब से चीनी के मिनिमम सेलिंग प्राइस (MSP) में जल्द बदलाव करना, फाइनेंशियल स्थिति को ठीक करने, किसानों को समय पर गन्ने का पेमेंट सुनिश्चित करने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी होगा. इस्मा ने कहा है कि ये कदम उठाए जाएं तो इससे सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा.