
भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) साइन होने वाला है. सूत्रों की मानें तो 27 जनवरी को ईयू 27 जनवरी को भारत के साथ अपने अब तक के सबसे बड़े एफटीए को औपचारिक रूप देगा. यूरोपीय मीडिया मैगजीन यूरेक्टिव की एक रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते को साइन करने के लिए ईयू के टॉप ऑफिशियल्स नई दिल्ली आएंगे. जो बात सबसे दिलचस्प है, उसके अनुसार इस एफटीए से कृषि क्षेत्र को खासतौर पर दूर रखा गया है.
रिपोर्ट में समझौते का समय और दायरा ब्रुसेल्स में मौजूद स्थितियों के साथ ही ईयू-भारत व्यापार संबंधों को प्रभावित करने वाली राजनीतिक बाधाओं का भी विस्तार से जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार यूरोपियन कमीश्न की प्रेसीडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को ईयू की संसद के सदस्यों को बंद कमरे में बताया कि समझौते को इसी महीने साइन किया जाना है. साथ ही इस समझौते को कृषि से दूर रखा गया है.
ईयू के अध्यक्ष और यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा 27 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर करने के लिए भारत की यात्रा करने वाले हैं.मध्य-दक्षिणपंथी ईपीपी समूह को संबोधित करते हुए, वॉन डेर लेयेन ने समझौते को ईयू के व्यापार संबंधों की तरफ 'बड़ा संकेत' बताया, भले ही इसमें कुछ प्रावधान अलग रखे गए हों. उन्होंने कहा कि यह 'शुरू से ही साफ' था कि कृषि को अंतिम पैकेज में शामिल नहीं किया जाएगा.
यह समझौता यूरोपीय संघ का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता होगा.इस एफटीएके साथ ही एक ऐसे बाजार तक पहुंच खुलेगी जो दुनिया की लगभग 25 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है. भारत में कृषि हमेशा से एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रहा है. ईयू पहले ही साफ कर दिया है कि दूध और चीनी सहित कई एग्री प्रॉडक्ट्स वार्ता से बाहर रखे गए हैं. हालांकि, यह छूट पूरी तरह से नहीं है.
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