
भारत सरकार ने खाद्य तेलों की पूरी वैल्यू चेन पर निगरानी तंत्र को मजबूत करने का फैसला किया है. बुधवार को सरकार की तरफ से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि खाद्य एवं वितरण विभाग की तरफ से बार-बार याद दिलाए जाने के बावजूद, ईमेल और टेलीफोन पर बातचीत करने के बाद भी जरूरी महीने का प्रोडक्शन रिटर्न जमा नहीं किया गया है. इस वजह से इन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है. सरकार का कहना है कि ऐसा न करना जरूरी वस्तु अधिनियम के तहत जारी आदेशों का उल्लंघन माना जाएगा.
विभाग की तरफ से संबंधित कंपनियों को बताया गया है कि एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के तहत, सेक्शन 3 के तहत जारी ऑर्डर का उल्लंघन करने पर निरीक्षण और जब्ती सहित कार्रवाई शुरू की जा सकती है. जब्ती का कोई भी ऑर्डर देने से पहले कारण बताने का एक उचित मौका जरूरी है. इसलिए, संबंधित यूनिट्स को लिखित जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया गया है. इसमें बताया गया है कि एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट, 1955 और बदले हुए VOPPA ऑर्डर, 2025 के नियमों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए, बयान में कहा गया है.
भारत सरकार ने अक्टूबर 2025 में वेजीटेबल ऑयल प्रॉडक्ट्स प्रोडक्शन एंड एवेलिबिलटी (रेगुलेशन) एमेंडमेंट ऑर्डर 2025 यानी VOPPA लागू किया था.संशोधित आदेश के तहत अब सभी खाद्य तेल निर्माता, प्रोसेसर, ब्लेंडर और री-पैकर के लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) और VOPPA पोर्टल (www.edibleoilindia.in) पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है. इसके साथ ही हर महीने उत्पादन, स्टॉक और उपलब्धता से जुड़ी डिटेल्ड जानकारी जमा करना भी जरूरी होगा.
इस ऑर्डर के तहत, कच्चे और रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल, सॉल्वेंट-एक्सट्रेक्टेड ऑयल, ब्लेंडेड ऑयल, वनस्पति, मार्जरीन और दूसरे नोटिफाइड प्रोडक्ट्स सहित अलग-अलग खाद्य तेलों से बने उत्पादों का उत्पादन, स्टॉक, इंपोर्ट, डिस्पैच, सेल्स और कंजम्प्शन से जुड़े रिटर्न हर महीने फाइल करने होंगे. बयान में कहा गया है कि यह फ्रेमवर्क एक ट्रांसपेरेंट, डेटा-आधारित एडिबल ऑयल इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक अहम कदम है, जो जानकारी वाली पॉलिसी प्लानिंग में मदद करेगा और नेशनल फूड सिक्योरिटी को मजबूत करेगा.
खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने इंदौर सहित कई जगहों पर निरीक्षण अभियान चलाया है. इन निरीक्षणों के दौरान NSWS/VOPPA रजिस्ट्रेशन की स्थिति, मासिक रिटर्न की समयबद्धता और सटीकता की जांच की गई. साथ ही उद्योग जगत के साथ बातचीत करके नियमों के पालन को बढ़ावा दिया गया. विभाग ने आगे साफ किया है कि इसी तरह के शो कॉज नोटिस उन सभी यूनिट्स को जारी किए जाएंगे जो या तो VOPPA फ्रेमवर्क के तहत रजिस्टर्ड नहीं हैं या जरूरी रिटर्न फाइल करने में नाकाम रही हैं ताकि पूरे सेक्टर में एक जैसा कम्प्लायंस पक्का हो सके.
इसके अलावा, बदले हुए VOPPA ऑर्डर, 2025 का सख्ती से पालन पक्का करने की डिपार्टमेंट की लगातार कोशिशों के तहत जरूरत के आधार पर कई खाद्य तेल प्रोसेसिंग यूनिट्स में इंस्पेक्शन ड्राइव किए जाएंगे.बयान में आगे कहा गया है कि जनवरी 2026 में पूरे हरियाणा और राजस्थान और उसके आस-पास निरीक्षण अभियान चलाए जाएंगे.
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