
भारत में खाने के तेल की मांग लगातार बढ़ती जा रही है, जिसका असर अब देश के आयात बिल पर भी साफ दिखाई देने लगा है. साल 2025-26 के पहले छह महीनों यानी नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच भारत ने बड़ी मात्रा में खाद्य तेल आयात किया. इससे न सिर्फ आयात की मात्रा बढ़ी, बल्कि सरकार और कंपनियों का खर्च भी काफी बढ़ गया. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान भारत ने करीब 78.15 लाख टन खाद्य तेल आयात किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 68.76 लाख टन था. यानी आयात मात्रा में करीब 13.66 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
खाद्य तेल के बढ़ते आयात के कारण देश का आयात बिल भी तेजी से बढ़ा है. पिछले साल जहां छह महीनों में लगभग 73 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए थे, वहीं इस साल यह बढ़कर करीब 87 हजार करोड़ रुपये पहुंच गया. यानी कुल खर्च में करीब 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. SEA के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी और रुपये की कमजोरी इसकी बड़ी वजह है.
अप्रैल महीने में भारत ने कुल खाद्य तेल आयात बढ़ाया, लेकिन पाम ऑयल की खरीद में गिरावट देखने को मिली. मार्च में जहां भारत ने 6.73 लाख टन क्रूड पाम ऑयल खरीदा था, वहीं अप्रैल में यह घटकर 5.10 लाख टन रह गया. इसके पीछे मुख्य कारण पाम ऑयल की बढ़ती कीमतें और कमजोर मांग बताई जा रही है.
दूसरी ओर सूरजमुखी तेल और सोयाबीन तेल की मांग तेजी से बढ़ी. अप्रैल में सूरजमुखी तेल का आयात दोगुने से ज्यादा बढ़कर 4.34 लाख टन पहुंच गया. वहीं सोयाबीन तेल का आयात भी मार्च के मुकाबले करीब 25 प्रतिशत बढ़ा. रिफाइनर कंपनियां अब सस्ते और बेहतर विकल्पों की तरफ रुख कर रही हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल देश में सरसों की अच्छी पेराई होने के कारण खाद्य तेल की उपलब्धता बनी हुई है. हालांकि आने वाले महीनों में स्टॉक कम होने पर आयात फिर बढ़ सकता है. कुल मिलाकर नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच भारत ने 39.67 लाख टन पाम ऑयल आयात किया, जो पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा है.
भारत ने सबसे ज्यादा पाम ऑयल इंडोनेशिया और मलेशिया से खरीदा. इंडोनेशिया ने 16.3 लाख टन और मलेशिया ने 15.2 लाख टन पाम ऑयल भारत को निर्यात किया. वहीं सोयाबीन तेल के मामले में अर्जेंटीना सबसे बड़ा सप्लायर रहा. भारत ने अर्जेंटीना से 13.32 लाख टन सोयाबीन तेल खरीदा. सूरजमुखी तेल मुख्य रूप से रूस और यूक्रेन से आया.
नेपाल से भी भारत को रिफाइंड खाद्य तेल का निर्यात लगातार बढ़ रहा है. नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच नेपाल ने करीब 2.17 लाख टन रिफाइंड तेल भारत भेजा. इसमें सबसे ज्यादा हिस्सा रिफाइंड सोयाबीन तेल का रहा. मार्च और अप्रैल में भी नेपाल से तेल की सप्लाई जारी रही.
बीवी मेहता ने बताया कि पिछले एक साल में रुपये में करीब 9 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है. इसका सीधा असर आयात लागत पर पड़ रहा है. डॉलर महंगा होने से विदेशों से तेल खरीदना और महंगा हो गया है. यही कारण है कि खाद्य तेल कंपनियों और आयातकों की चिंता बढ़ती जा रही है.
भारत में खाने के तेल की खपत लगातार बढ़ रही है और देश अभी भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और डॉलर की चाल का असर सीधे भारतीय बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ता है.
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