
दुनियाभर के चीनी बाजार में अगले सीजन बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म स्टोनएक्स (StoneX) ने अनुमान जताया है कि 2026-27 सीजन में वैश्विक चीनी बाजार अधिशेष से निकलकर घाटे में पहुंच सकता है. उत्पादन घटने और मांग बढ़ने के कारण बाजार का संतुलन बिगड़ने की आशंका है. स्टोनएक्स के मुताबिक, 2025-26 सीजन में जहां करीब 22.9 लाख टन चीनी अधिशेष रहने का अनुमान है, वहीं 2026-27 में बाजार लगभग 5.5 लाख टन के घाटे में जा सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह प्रमुख उत्पादक देशों में उत्पादन गिरना माना जा रहा है.
‘बिजनेसलाइन’ के मुताबिक, StoneX ने अपनी रिपोर्ट कहा है कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक भारत में इस साल के आखिर तक अल नीनो का असर देखने को मिल सकता है. मौसम में बदलाव की वजह से गन्ना उत्पादन पर दबाव बनने की आशंका है, जिससे चीनी उत्पादन हल्का प्रभावित हो सकता है.
उधर, थाईलैंड में हालात ज्यादा चुनौतीपूर्ण बताए गए हैं. लगातार कमजोर चीनी कीमतों से परेशान किसान अब दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. खासतौर पर कसावा की खेती तेजी से बढ़ रही है. इसी कारण वहां चीनी उत्पादन में करीब 15 प्रतिशत गिरावट का अनुमान लगाया गया है.
वहीं, यूरोप क्षेत्र में भी उत्पादन कमजोर रहने की संभावना जताई गई है. यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ के देशों में चीनी उत्पादन 12.5 प्रतिशत तक घटकर लगभग 1.53 करोड़ टन रहने का अनुमान है. इससे वैश्विक सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है. स्टोनएक्स के अनुसार, 2026-27 सीजन में दुनिया का कुल चीनी उत्पादन करीब 1 प्रतिशत घटकर 19.37 करोड़ टन रह सकता है, जबकि वैश्विक मांग बढ़कर 19.43 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है. यानी मांग और सप्लाई के बीच अंतर बढ़ सकता है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पिछले कुछ महीनों में निवेशकों ने चीनी बाजार में अपनी बिकवाली वाली पोजिशन घटाई है. हालांकि, हालिया तेजी का बड़ा कारण पश्चिम एशिया तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बताया गया. ऊंचे ऊर्जा दामों के चलते ब्राजील में इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे चीनी उत्पादन सीमित हो सकता है. फिलहाल बाजार में बहुत तेज तेजी या बड़ी गिरावट जैसे संकेत नहीं दिख रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कच्ची चीनी की कीमतें सीमित दायरे में कारोबार कर सकती हैं.