
भारत के कपास बाजार को लेकर नई तस्वीर सामने आई है, जिसमें उत्पादन और आपूर्ति दोनों ही मोर्चों पर हालात पहले के अनुमान से कुछ बेहतर दिख रहे हैं. कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) ने 2025-26 सीजन के लिए कपास उत्पादन अनुमान में हल्की बढ़ोतरी की है, जिससे बाजार में अधिशेष की स्थिति और मजबूत होती नजर आ रही है. CAI के ताजा आकलन के अनुसार, अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 के सीजन में देश का कुल कपास उत्पादन अब 317 लाख गांठ आंका गया है. पहले के अनुमान की तुलना में यह करीब 7.5 लाख गांठ अधिक है.
इस संशोधन की सबसे बड़ी वजह महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों से मिले बेहतर फीडबैक हैं, जहां पैदावार उम्मीद से ज्यादा रही है. राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो महाराष्ट्र में करीब 3 लाख गांठ और तेलंगाना में 4.5 लाख गांठ की अतिरिक्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके अलावा कर्नाटक में 1 लाख गांठ और तमिलनाडु में लगभग 0.5 लाख गांठ उत्पादन बढ़ने का अनुमान है.
वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश और ओडिशा में उत्पादन में मामूली गिरावट देखी गई है, जिससे कुल अनुमान पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है. उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ आयात में आई तेजी ने भी कुल आपूर्ति को काफी मजबूत बना दिया है. 'बिजनेसलाइन' की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा पिछले साल 31 दिसंबर तक दिए गए ड्यूटी फ्री आयात की सुविधा का फायदा उठाते हुए व्यापारियों और मिलों ने बड़ी मात्रा में कपास मंगाया. पूरे सीजन में आयात करीब 50 लाख गांठ तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें से लगभग 31 लाख गांठ का आयात दिसंबर तक ही हो चुका था.
वहीं, खपत के मोर्चे पर तस्वीर थोड़ी नरम दिख रही है. CAI का कहना है कि 2025-26 सीजन में घरेलू खपत लगभग 305 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 314 लाख गांठ से कुछ कम है. दिसंबर के अंत तक कुल खपत करीब 76.25 लाख गांठ दर्ज की गई थी. कपड़ा उद्योग की मांग में सुस्ती और निर्यात ऑर्डर में दबाव इसका एक कारण माना जा रहा है.
इसके अलावा निर्यात के अनुमान में भी कटौती की गई है. CAI ने चालू सीजन के लिए कपास निर्यात को घटाकर 15 लाख गांठ कर दिया है, जबकि पिछले साल यह 18 लाख गांठ रहा था. दिसंबर के अंत तक लगभग 4.5 लाख गांठ कपास का निर्यात किया जा चुका है. इन सभी फैक्टर्स को मिलाकर देखें तो 2025-26 सीजन में कुल कपास आपूर्ति 427.59 लाख गांठ तक पहुंच सकती है. सीजन के अंत में करीब 122.59 लाख गांठ का अधिशेष रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है.