
भारत कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर चुका है और कई देशों के साथ बातचीत जारी है. इसी बीच ऑस्ट्रेलिया की ओर से सकारात्मक संकेत मिला है. भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने कहा, “भारत और ऑस्ट्रेलिया वस्तु और सेवा दोनों सेक्टर में व्यापार को आगे बढ़ा सकते हैं. हम नए मौके तलाश सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया चाहता है कि भारत अपने बाजार में टैरिफ में कुछ कमी करे. इसमें कृषि सेक्टर भी शामिल है. हम ऐसा रास्ता निकाल सकते हैं, जिससे कृषि टैरिफ में राहत दी जाए, लेकिन इससे आम भारतीय किसान के हित प्रभावित न हों.” उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि एक संतुलित समझौता संभव है, जिसमें व्यापार भी बढ़े और किसानों को नुकसान भी न हो.”
भारत की प्राथमिकता पर बात करते हुए फिलिप ग्रीन ने कहा कि भारत लेबर मोबिलिटी पर ज्यादा ध्यान दे रहा है. भारत चाहता है कि भारतीयों के लिए ऑस्ट्रेलिया में काम करना और रहना आसान हो. उन्होंने कहा, “हम दोनों देशों के बीच योग्यता और डिग्री की मान्यता को आगे बढ़ा सकते हैं, ताकि लोगों को एक-दूसरे के यहां काम करने में आसानी हो.”
शिक्षा सहयोग पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में आने का मौका दिया है. सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ने इस पहल में कदम रखा है.” उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा, “मैंने भारत में ऑस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटी के छात्रों का पहला ग्रेजुएशन देखा. यह मेरे लिए बहुत भावुक पल था. छात्रों और उनके परिवारों के लिए यह बड़ी उपलब्धि थी कि उन्हें उच्च गुणवत्ता की शिक्षा कम लागत में यहीं मिल रही है.”
उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने आगे कहा, “इस समय करीब 1.35 लाख भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया में पढ़ रहे हैं. यह हमारे यहां सबसे बड़े या दूसरे सबसे बड़े छात्र समूहों में शामिल हैं. ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोगों की संख्या 10 लाख से ज्यादा है. यह समुदाय हमारे समाज और अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे रहा है.”
मालूम हो कि भारत ने हाल ही में न्यूजीलैंड और अन्य देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किए हैं. इसमें भारत से कृषि व्यापार भी एक अहम पहलू है. लेकिन, भारतीय किसानों ने सेब और अन्य कुछ फलों के आयात पर सरकार की नीतियों पर नाराजगी जाहिर की है. ऐसे में अब यह देखने लायक होगा, जब ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार को लेकर बातचीत आगे बढ़ेगी और कृषि व्यापार में कैसी डील सामने निकलकर आती है. (एएनआई)