हापुड़ में लगा किसान कारवां का 73वां पड़ाव, किसानों को मिली खेती और सरकारी योजनाओं की अहम जानकारी

हापुड़ में लगा किसान कारवां का 73वां पड़ाव, किसानों को मिली खेती और सरकारी योजनाओं की अहम जानकारी

उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की पहल के तहत हापुड़ के बहादुरगढ़ में ‘किसान तक’ कारवां का 73वां पड़ाव लगा. कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक खेती, सरकारी योजनाओं, मृदा जांच, नैनो उर्वरक और FPO से जुड़े लाभों की जानकारी दी गई, साथ ही विशेषज्ञों ने समस्याओं का समाधान भी बताया.

Kisan Karwan HapurKisan Karwan Hapur
धर्मेंद्र सिंह
  • Hapur,
  • May 02, 2026,
  • Updated May 02, 2026, 4:01 PM IST

उत्‍तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्‍त पहल के तहत हापुड़ जनपद के बहादुरगढ़ में आज ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा, जहां किसानों का उत्साह देखने लायक रहा. प्रदेश के 75 जिलों में चल रही इस विशेष कवरेज का यह 73वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर खेती-किसानी से जुड़ी नई जानकारियां हासिल की. इस दौरान जनपद के कृषि अधिकारियों ने किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने योजनाओं का लाभ उठाने की प्रक्रिया भी समझाई, ताकि अधिक से अधिक किसान इनका फायदा ले सकें.

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों, उन्नत बीज, फसल प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी. वैज्ञानिकों ने किसानों को बदलते मौसम और नई चुनौतियों के अनुसार खेती में नवाचार अपनाने की सलाह भी दी. कार्यक्रम में किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं के समाधान भी प्राप्त किए. ‘किसान तक’ का यह कारवां लगातार किसानों तक नई तकनीक और उपयोगी जानकारी पहुंचाने का काम कर रहा है, जिससे उनकी आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने में मदद मिल रही है.

जैविक खेती से सुधरेगा मृदा स्वास्थ्य

किसान कारवां के पहले चरण में प्रगतिशील किसान मूलचंद आर्य ने जैविक खेती के फायदों पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती से मिट्टी की सेहत लगातार खराब हो रही है, जबकि जैविक खेती मिट्टी को स्वस्थ बनाए रखती है. शुरुआती 3-4 वर्षों में उत्पादन थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन बाद में उत्पादन सामान्य हो जाता है और गुणवत्ता बेहतर मिलती है.

मिट्टी में 17 पोषक तत्वों की होती है जरूरत

दूसरे चरण में मृदा वैज्ञानिक डॉ. अशोक सिंह ने बताया कि किसान मृदा जांच को नजरअंदाज कर रहे हैं. मिट्टी में कार्बनिक तत्वों की कमी बढ़ रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है. उन्होंने कहा कि फसल के लिए 17 प्रकार के पोषक तत्व जरूरी हैं, इसलिए समय-समय पर मृदा परीक्षण कराना चाहिए.

FOM उत्पाद से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता

तीसरे चरण में रिलायंस एग्रो साइंस के नितिन सारस्वत ने FOM उत्पाद की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इसके उपयोग से मृदा का कार्बनिक प्रतिशत बढ़ता है और उत्पादन में भी वृद्धि होती है. हापुड़ में रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों को यह उत्पाद मुफ्त में दिया जा रहा है.

नैनो उर्वरकों से बेहतर उत्पादन

चौथे चरण में इफको के सिद्धार्थ राजपूत ने नैनो उर्वरकों के उपयोग पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इन उत्पादों से मृदा की सेहत सुधरती है और फसल उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.

FPO के जरिए किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार

पांचवें चरण में डॉ. नीलम ने बताया कि जनपद में कई किसान उत्पादक संगठन (FPO) बन चुके हैं. इनके माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और मशीनरी की सुविधा मिल रही है, जिससे उनकी आय बढ़ रही है.

मुफ्त मृदा जांच अभियान से किसानों को लाभ

छठे चरण में चंबल फर्टिलाइजर के आलोक चौधरी ने बताया कि उनकी संस्था द्वारा मुफ्त मृदा जांच अभियान चलाया जा रहा है. जांच के आधार पर किसानों को उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग की सही सलाह दी जाती है.

गर्मी में पशुओं की देखभाल जरूरी

सातवें चरण में पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ए.के. गिल ने बताया कि नया भूसा सीधे खिलाना नुकसानदायक हो सकता है. इसे पहले पानी में भिगोकर और हरे चारे के साथ मिलाकर देना चाहिए. साथ ही पशुओं को छायादार स्थान पर रखना जरूरी है.

आधुनिक उपकरणों से खेती होगी आसान

आठवें चरण में स्टील इंडिया के निशांत गोयल ने खेती और बागवानी के लिए आधुनिक उपकरणों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि किसानों के लिए विभिन्न उपकरण और सिंचाई यंत्र उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत ₹10,000 से ₹60,000 तक है.

बागवानी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति जरूरी

नवें चरण में डॉ. अरविंद यादव ने बताया कि कॉपर और बोरॉन की कमी से फलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है और फल झड़ने लगते हैं. उन्होंने किसानों को समय-समय पर इन तत्वों की पूर्ति करने की सलाह दी.

बीज, नर्सरी और मशीनों पर मिल रहा अनुदान

दसवें चरण में उद्यान निरीक्षक दलवीर सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा तोरी, करेला सहित कई सब्जियों के बीज और ड्रैगन फ्रूट की नर्सरी उपलब्ध कराई जा रही है. स्प्रे मशीनों पर 50% तक सब्सिडी दी जा रही है.

फसल परिवर्तन से बढ़ी किसान की आय

ग्यारहवें चरण में किसान वकार अहमद ने बताया कि बंदर और नीलगाय की समस्या के कारण उन्होंने नींबू और गेंदे की खेती शुरू की, जिससे उन्हें अच्छा लाभ मिल रहा है. वर्तमान में एक नींबू की कीमत करीब ₹10 मिल रही है.

फार्मर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, नहीं तो रुकेगा लाभ

उप कृषि निदेशक योगेंद्र कुमार ने बताया कि किसान सम्मान निधि का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्रेशन जरूरी है. बिना रजिस्ट्रेशन के अगली किस्त नहीं मिलेगी. बीज मिनी किट योजना के तहत किसानों का चयन लॉटरी से किया जाएगा.

प्रगतिशील किसानों का हुआ सम्मान

तेरहवें चरण में प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया, जिसमें वकार अहमद, प्रमोद कुमार, मूलचंद आर्य, राजेंद्र कुमार, भारत भूषण के नाम रहे.

लकी ड्रा में बांटे गए पुरस्कार

चौदहवें चरण में लकी ड्रा का आयोजन किया गया, जिसमें ₹500 के 10 पुरस्कार दिए गए. ₹2000 का पुरस्कार अनु को मिला, जबकि पहला पुरस्कार वीरेंद्र ने जीता.

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