
देश में कच्चे जूट की कीमत बहुत तेजी से बढ़ गई है. इस वजह से जूट मिलों को जूट मिलना मुश्किल हो रहा है. जूट मिलों की संस्था इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन (IJMA) ने सरकार से कहा है कि इस समस्या को जल्दी ठीक किया जाए, ताकि जूट उद्योग को बचाया जा सके.
IJMA ने सुझाव दिया है कि 1 अप्रैल के बाद निजी व्यापारियों को कच्चा जूट खरीदने और बेचने की अनुमति न दी जाए. संस्था का कहना है कि व्यापारी जूट जमा करके रखते हैं, जिससे कीमत और बढ़ जाती है. अगर निजी व्यापार बंद होगा तो जूट सही दाम पर मिलों तक पहुंच सकेगा.
इस समय जूट मिलों के पास बहुत कम कच्चा जूट बचा है. दिसंबर 2025 में ही मिलों के पास से काफी जूट खत्म हो गया. वहीं जूट की कीमत बढ़कर करीब 13,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है. इतनी ज्यादा कीमत होने से मिलों के लिए काम करना मुश्किल हो गया है.
जूट की कमी और महंगाई की वजह से कई जूट मिलें बंद हो गई हैं या बहुत कम चल रही हैं. इसका सीधा असर मजदूरों पर पड़ा है. करीब 75 हजार से ज्यादा मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके घरों में परेशानी बढ़ गई है.
IJMA का कहना है कि 31 मार्च तक व्यापारियों को समय दिया जाए कि वे अपना जूट बेच दें. इसके बाद सरकार जूट को अपने नियंत्रण में ले. इससे जूट की कीमत भी ठीक रहेगी और मिलों को समय पर जूट मिलता रहेगा.
संस्था ने कहा है कि जो जूट व्यापारियों के पास बचा है, उसे जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया खरीदे. फिर यही संस्था जरूरत के अनुसार जूट मिलों को जूट दे. इससे मिलों का काम आसानी से चलता रहेगा.
अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो जूट की कीमत स्थिर रहेगी. जूट मिलें बिना रुकावट काम कर पाएंगी. आने वाले समय में अनाज रखने के लिए जरूरी जूट के बोरे भी समय पर बन सकेंगे और सरकार को भी सही दाम पर बोरे मिलेंगे.
14 जनवरी को हुई एक बैठक में सरकार, मजदूर संगठनों और उद्योग से जुड़े लोगों ने माना कि जूट उद्योग बड़ी परेशानी में है. सभी ने कहा कि अगर जल्दी फैसला नहीं लिया गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं.
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