
हरियाणा के करनाल में 7 जून 2026 को अनाज मंडी कमीशन एजेंट (आढ़ती) एसोसिएशन की एक बैठक हुई. इस बैठक में कुछ ऐसे निर्णय लिए गए, जिन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि आढ़ती बदलने के लिए पुराने आढ़ती से “नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट” (NOC) लेने की बात कही गई, जो कानून के खिलाफ बताया जा रहा है. इसके साथ ही हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कच्ची पर्ची (रसीद) व्यवस्था को जारी रखने का भी निर्णय लिया गया. इन फैसलों को लेकर आरोप है कि यह किसानों के अधिकारों के खिलाफ और नियमों का उल्लंघन है.
हरियाणा में अनाज मंडियों का संचालन हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा किया जाता है. यह व्यवस्था कृषि उपज विपणन अधिनियम 1961 और सामान्य नियम 1962 के तहत चलती है. इन नियमों के अनुसार आढ़तियों को सरकार द्वारा लाइसेंस दिया जाता है ताकि वे किसानों की फसल की खरीद-बिक्री में मदद कर सकें. आढ़तियों को तय कमीशन मिलता है और उन्हें सभी सरकारी नियमों का पालन करना होता है.
यदि कोई आढ़ती नियमों का पालन नहीं करता, तो उसका लाइसेंस रद्द करने और जुर्माना लगाने का प्रावधान भी कानून में दिया गया है. इसका उद्देश्य मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना है.
कानून के अनुसार किसान अपनी फसल किसी भी आढ़ती के माध्यम से बेच सकता है. फसल की बिक्री और तुलाई के बाद तुरंत भुगतान और जे-फार्म जारी करना अनिवार्य है. लेकिन लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि कुछ आढ़ती कच्ची पर्ची के जरिए किसानों से कम दाम पर फसल खरीदते हैं. इससे किसानों को नुकसान होता रहा है और मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी देखी गई है.
इस मामले में दायर एक जनहित याचिका के बाद हाईकोर्ट ने 27 जनवरी 2026 को हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि कच्ची पर्ची व्यवस्था पर रोक लगाई जाए. इसके बाद हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड ने 1 अप्रैल 2026 को आदेश जारी कर पूरे राज्य में कच्ची पर्ची पर प्रतिबंध लगा दिया. इसके साथ ही डिजिटल जे-फार्म प्रणाली शुरू की गई, जिससे किसानों को मोबाइल के जरिए ऑनलाइन रसीद मिलनी शुरू हुई.
इस सुधार से लाखों किसानों को फायदा हुआ और मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी. यह कदम कृषि सुधारों की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना गया.
हाल ही में करनाल की बैठक में लिए गए निर्णयों को लेकर यह आरोप है कि ये हाईकोर्ट के आदेश और सरकारी नियमों के खिलाफ हैं. कच्ची पर्ची को फिर से जारी रखने और आढ़ती बदलने पर NOC की शर्त लगाने को गैर-कानूनी बताया जा रहा है. इससे किसानों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि किसान किसी भी तरह के दबाव या प्रतिबंध में बंधे नहीं हो सकते. किसान बंधुआ मजदूर नहीं हैं और उन्हें अपनी फसल बेचने की पूरी आज़ादी मिलनी चाहिए.
इस पूरे मामले में मांग की जा रही है कि सरकार आढ़ती एसोसिएशन के इन फैसलों पर तुरंत रोक लगाए. साथ ही जो भी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. इसमें लाइसेंस रद्द करना और जुर्माना लगाना शामिल हो सकता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहती है, तो किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आय में सुधार होगा. इसलिए कानून का पालन हर स्थिति में जरूरी है.
ये भी पढ़ें:
धान छोड़ करेले की खेती से चमकी किस्मत, किसान दीपक की सात गुना बढ़ी आय
यूपी के पास देश के 35-36 फीसदी खाद्यान्न उत्पादन की क्षमता, अब जरूरत तकनीक की- CM योगी