
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुवार को हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में दो दिवसीय कृषि मेला रबी का शुभारंभ किया. उन्होंने कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए किसानों को कम पानी और कम संसाधनों में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया. मुख्यमंत्री ने हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में करीब 9.94 करोड़ रुपये की लागत से तैयार दीनदयाल उपाध्याय जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र का भी उद्घाटन किया. केंद्र का उद्देश्य किसानों को जैविक खेती की तकनीक, शोध और प्रशिक्षण से जोड़ना है. मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच सतत कपास उत्पादन, फसल विविधीकरण और जल संरक्षण को खेती का हिस्सा बनाना जरूरी है.
मुख्यमंत्री ने मेले में प्रदर्शित कपास चुगाई मशीन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मशीन एक घंटे में एक एकड़ कपास की चुगाई कर सकती है और हाथ से चुगाई की तुलना में समय करीब आधा करती है. उन्होंने कहा कि सरकार कपास चुगाई, गन्ना छिलाई और दूसरी कृषि मशीनों को बढ़ावा दे रही है, ताकि श्रमिकों की कमी के कारण कपास और गन्ने का रकबा प्रभावित न हो.
CM सैनी ने कपास को हरियाणा की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल बताते हुए कहा कि सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में किसान इससे जुड़े हैं. उन्होंने बदलते मौसम और कीटों की चुनौती को देखते हुए ऐसी किस्मों और तकनीकों पर जोर दिया, जो बदलती परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें.
मुख्यमंत्री ने कहा कि 257 कपास किसान खेत पाठशालाओं के जरिए 7 हजार से अधिक किसानों को बिजाई से चुगाई तक की जानकारी दी गई है. इसके अलावा 167 किसान मेलों में कम लागत पर कपास उत्पादन और बेहतर मुनाफे के उपाय बताए गए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार गेहूं और धान की खेती से पानी की खपत बढ़ती है और मिट्टी पर भी दबाव पड़ता है. उन्होंने दलहन, तिलहन और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने की जरूरत बताई.
उन्होंने बताया कि मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत धान की जगह वैकल्पिक फसलें बोने या खेत खाली रखने वाले किसानों को 8 हजार रुपये प्रति एकड़ सहायता दी जाती है. अब तक 2 लाख 34 हजार एकड़ क्षेत्र में वैकल्पिक फसल अपनाने पर 1 लाख 59 हजार किसानों को 166 करोड़ 34 लाख रुपये की सहायता दी जा चुकी है.
सीएम ने वर्षा जल संचयन, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरीगेशन तकनीकों को बढ़ावा देने की बात कही. उन्होंने बताया कि इन तकनीकों पर किसानों को 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है. तालाब निर्माण के लिए भी 85 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है. सिंचाई में शोधित पानी के इस्तेमाल के लिए 27 योजनाएं तैयार की गई हैं, जिनमें 20 पूरी हो चुकी हैं. इससे नहरों पर दबाव और भूजल दोहन कम करने में मदद मिलेगी.
मुख्यमंत्री ने मिट्टी की सेहत को जल संरक्षण के साथ महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि राज्य में 1 करोड़ 6 लाख सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं. किसानों को मिट्टी जांच की सुविधा देने के लिए 17 नई मृदा एवं जल परीक्षण प्रयोगशालाएं, मंडियों में 54 लघु प्रयोगशालाएं और स्कूल-कॉलेजों में 240 लघु प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं. उन्होंने कहा कि ड्रोन, सेंसर, मौसम की डिजिटल जानकारी और सटीक खेती जैसी तकनीकें अब कृषि का हिस्सा बन रही हैं.
सैनी ने कहा कि सरकार किसानों के साथ बीज से बाजार तक खड़ी है. उन्होंने बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 23 किस्तों में 7,881 करोड़ 60 लाख रुपये दिए जा चुके हैं. पिछले 12 सीजन में फसल खरीद के 1 लाख 85 हजार करोड़ रुपये 12 लाख किसानों के खातों में भेजे गए हैं. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और फसल खराबे के मुआवजे के रूप में पिछले 12 वर्षों में 16,160 करोड़ रुपये दिए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी.
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राकृतिक खेती के लिए करीब 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण कराया है. इनमें से 44 हजार एकड़ में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए 23,930 किसानों का सत्यापन किया गया है. कुरुक्षेत्र, जींद, सिरसा और करनाल में प्रशिक्षण केंद्रों के जरिए 12,188 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. कुरुक्षेत्र में 2 हजार एकड़ के क्लस्टर में स्मार्ट एग्रीकल्चर के तहत प्राकृतिक खेती शुरू करने की योजना भी बताई गई.
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की धुरी है और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार योजनाओं को लागू कर रही है. उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से फसल विविधीकरण के लिए किसानों को तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपील की. उन्होंने किसानों से मिट्टी, हवा और पानी की गुणवत्ता बनाए रखने तथा आधुनिक तकनीकों के जरिए कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने का आह्वान किया.
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने कहा कि कपास उत्पादन बढ़ाने के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में है. उन्होंने देसी कपास का रकबा बढ़ाने और एचएयू बीटी-12 तथा एचएयू बीटी-13 जैसी किस्मों को बढ़ावा देने की बात कही.
उन्होंने रेतीली जमीन में ड्रिप सिंचाई के साथ फर्टिगेशन और कपास के साथ मूंग की अंत:फसली खेती को अतिरिक्त आय के विकल्प के तौर पर बताया. विश्वविद्यालय सरसों, मूंग और बाजरा समेत दूसरी फसलों की उन्नत किस्मों पर भी काम कर रहा है.
कृषि मेले में मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर के 45 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया. इनमें प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, मधुमक्खी पालन और केंचुआ खाद के क्षेत्र में काम करने वाले 30 पुरुष और 15 महिला किसान शामिल रहे. मुख्यमंत्री ने सभी किसानों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए.