
महाराष्ट्र के लातूर जिले में बारिश की कमी और खरीफ फसलों को हुए नुकसान को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है. कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार से लातूर को सूखाग्रस्त जिला घोषित करने और किसानों के लिए तुरंत राहत पैकेज देने की मांग की है. नेताओं का कहना है कि लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन समेत कई खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ है. ऐसे में किसानों को आर्थिक मदद देने के साथ पानी और चारे की व्यवस्था भी जरूरी है.
लातूर में करीब डेढ़ महीने से बारिश का लंबा सूखा बना हुआ है. बारिश नहीं होने का सीधा असर खेतों में खड़ी खरीफ फसलों पर पड़ा है. किसानों के मुताबिक सोयाबीन समेत दूसरी फसलों को काफी नुकसान हुआ है. इससे किसान और खेतिहर मजदूर दोनों परेशान हैं. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मौजूदा स्थिति सामान्य नहीं है और जिले में सूखे जैसे हालात बन गए हैं. ऐसे में सरकार को स्थिति का इंतजार करने के बजाय तुरंत राहत के कदम उठाने चाहिए.
लातूर के सांसद शिवाजी कालगे ने कृषि विभाग के अधिकारियों से खरीफ फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने को कहा है. उन्होंने अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि खेतों में हुए नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार किया जाए. फसल नुकसान का सही आंकड़ा तैयार होना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसी के आधार पर किसानों को सरकारी सहायता और फसल बीमा का लाभ मिल सकता है. कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि नुकसान का आकलन जमीन पर जाकर सही तरीके से किया जाए.
पूर्व मंत्री अमित देशमुख ने कहा कि करीब डेढ़ महीने से जारी सूखे के कारण सोयाबीन और दूसरी खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि फसल खराब होने से किसान और कृषि मजदूर आर्थिक परेशानी में हैं. खरीफ सीजन में सोयाबीन लातूर और आसपास के इलाकों के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण फसल है. बारिश की कमी से अगर फसल का उत्पादन प्रभावित होता है तो इसका असर किसानों की पूरी साल की कमाई पर पड़ सकता है.
अमित देशमुख ने कहा कि खरीफ फसलों को नुकसान के साथ जिले में आगे चलकर पानी और चारे की कमी की समस्या भी पैदा हो सकती है. उन्होंने सरकार से ऐसे इलाकों की पहचान कर पहले से जरूरी इंतजाम करने की मांग की. ग्रामीण इलाकों में पानी की कमी का असर सिर्फ खेती पर नहीं पड़ता. पशुओं के लिए पानी और चारे की व्यवस्था करना भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. ऐसे में प्रशासन को जरूरत वाले इलाकों में पानी के टैंकर और चारे की व्यवस्था करने की मांग की गई है.
कांग्रेस नेताओं ने सूखे जैसे हालात से प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की है. उनका कहना है कि फसल खराब होने के बाद किसान के पास अगली फसल की तैयारी, घर के खर्च और खेती की लागत पूरी करने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं बचता. देशमुख ने फसल बीमा कंपनियों के जरिए किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा दिलाने के लिए भी जरूरी कदम उठाने की मांग की. उनका कहना है कि जिन किसानों की फसल खराब हुई है, उन्हें बीमा का लाभ जल्द मिलना चाहिए.
कांग्रेस नेताओं ने किसानों की आर्थिक परेशानी को देखते हुए कृषि कर्जमाफी योजना का दायरा बढ़ाने की भी मांग की. उनका कहना है कि फसल खराब होने की स्थिति में किसान पर कर्ज का बोझ और बढ़ सकता है. ऐसे में प्रभावित किसानों को कर्ज से राहत देने के लिए सरकार को विशेष कदम उठाने चाहिए. नेताओं ने सरकार से इस दिशा में तत्काल फैसला लेने की मांग की है.
फसल खराब होने का असर किसानों के परिवार पर भी पड़ता है. इसी को देखते हुए कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि सूखे से प्रभावित इलाकों के स्कूल और कॉलेज के छात्रों की शैक्षणिक और परीक्षा फीस सरकार की ओर से जमा की जाए. नेताओं का कहना है कि खेती से होने वाली आय प्रभावित होने के बाद कई परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में सरकार की मदद से छात्रों की पढ़ाई जारी रखने में सहायता मिल सकती है.
कांग्रेस नेताओं ने जरूरत वाले इलाकों में चारा कैंप खोलने और पानी के टैंकर भेजने की मांग भी की है. उनका कहना है कि अगर बारिश की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में पशुओं के लिए चारे और पानी की समस्या बढ़ सकती है. प्रशासन से कहा गया है कि जिन गांवों में पानी की कमी है, वहां जरूरत के अनुसार टैंकर उपलब्ध कराए जाएं. इसी तरह पशुपालकों के लिए चारे की व्यवस्था भी की जाए.
एमएलसी विक्रम काले ने अधिकारियों से ग्रामीण रोजगार से जुड़े कामों की योजना बनाने और उन्हें जल्द पूरा करने को कहा. उन्होंने VB-G RAM G योजना और जिला वार्षिक योजना के तहत कामों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया. ऐसे कामों से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर पैदा करने और जरूरतमंद परिवारों को आय का साधन देने में मदद मिल सकती है. सूखे जैसी स्थिति में खेती का काम प्रभावित होने पर ग्रामीण रोजगार का महत्व और बढ़ जाता है.
महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सोमवार को कहा था कि राज्य में कम बारिश के कारण 18 जिलों में सूखे जैसे हालात बने हैं. उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र के करीब आधे किसान फिलहाल सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं. ऐसे में लातूर को सूखाग्रस्त घोषित करने की कांग्रेस नेताओं की मांग सामने आई है. अब किसानों की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है. किसानों को उम्मीद है कि फसल नुकसान का सही आकलन कर जल्द राहत और मुआवजे की व्यवस्था की जाएगी.
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