बिहार में राजस्व अधिकारियों की हड़ताल के बीच 3 अफसर निलंबित, सरकार ने दी सख्त चेतावनी

बिहार में राजस्व अधिकारियों की हड़ताल के बीच 3 अफसर निलंबित, सरकार ने दी सख्त चेतावनी

बिहार में जारी अंचल और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल के बीच सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि अनुशासनहीनता, सरकारी काम में बाधा और भ्रामक बयान देने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी. सरकार ने चेतावनी दी है कि काम पर नहीं लौटने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा.

Bihar revenue officers strikeBihar revenue officers strike
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Patna,
  • Mar 19, 2026,
  • Updated Mar 19, 2026, 11:29 AM IST

बिहार में अंचल अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल जारी है. इसी हड़ताल के बीच कड़ा रुख अपनाते हुए तीन राजस्व पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी काम में बाधा डालने, अनुशासनहीनता और भ्रामक बयान देने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा.
 
निलंबित किए गए अधिकारियों में अररिया के अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी जितेंद्र पांडे, पटना सदर के अंचलाधिकारी रजनीकांत और पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन अंचल के अंचलाधिकारी आनंद कुमार शामिल हैं. यह कार्रवाई बिहार सरकारी सेवा आचार नियमावली 1978 के नियम 8, 9 और 10 के तहत की गई है. उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने इसे अनुशासन कायम रखने की दिशा में जरूरी कदम बताया है.

50 प्रतिशत राजस्व पदाधिकारी काम पर

उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने बताया कि वर्तमान में लगभग 50 प्रतिशत राजस्व पदाधिकारी काम कर रहे हैं, जिसकी पुष्टि जिलाधिकारियों और अपर समाहर्ताओं की ओर से भेजी गई रिपोर्ट से हुई है. उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने वाला है जिसे देखते हुए काम निपटाना बहुत जरूरी है. अभी इसी विभाग के जरिये जनगणना के काम की भी मॉनिटरिंग की जा रही है. 17 अप्रैल से स्व गणना का काम शुरू होना है. इसकी तैयारी चल रही है. विभाग की ओर से कई अभियान चलाए जा रहे हैं. ऐसे में जो अधिकारी जल्द अपने काम पर लौट आते हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. लेकिन, सरकार के आदेशों को नहीं मानने और कामकाज में बाधा डालने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.

उपमुख्यमंत्री ने दी चेतावनी

उपमुख्यमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि मीडिया में भ्रामक प्रचार-प्रसार करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी. किसी भी प्रकार की अराजकता स्वीकार नहीं की जाएगी. गुमराह करने वाले बयान देने वालों को निलंबित किया जाएगा.

उन्होंने त्यागपत्र दे चुके और एक राजनीतिक दल से चुनाव लड़ने वाले पूर्व राजस्व पदाधिकारी आदित्य शिवम शंकर के आचरण और काम की जांच कराने का भी निर्णय लिया है. इस संबंध में एक तीन सदस्यों वाली जांच समिति का गठन किया गया है, जिसमें महेंद्र पाल को अध्यक्ष, मोना झा और नवाजिश अख्तर को सदस्य बनाया गया है. समिति मामले की विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी. इनके कार्यकाल के दौरान किए गए काम की भी जांच कराने का निर्णय लिया गया है. सरकार ने दोहराया है कि लोगों का सर्वोपरि है और प्रशासनिक अनुशासन से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.

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